कीटो डाइट सप्लीमेंट सेल थेरेपी के माध्यम से कैंसर को खत्म करने में मदद कर सकता है : शोध

न्यूयॉर्क, 8 दिसंबर (आईएएनएस)। एक शोध में यह बात सामने आई है कि कीटोजेनिक डाइट में एक साधारण आहार सप्लीमेंट ‘सीएआर टी’ कोशिका कार्य को बढ़ा सकता है- जो एक व्यक्तिगत उपचार है जो रोगियों की अपनी प्रतिरक्षा कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए रीप्रोग्राम करता है।

पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के पेरेलमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन और अमेरिका में पेन मेडिसिन के अब्रामसन कैंसर सेंटर के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन के अनुसार, ”हालांकि इस दृष्टिकोण का मूल्यांकन क्लिनिकल परीक्षणों में किया जाना चाहिए, लेकिन प्रारंभिक शोध सीएआर टी कोशिका कार्य और कैंसर से लड़ने की क्षमताओं में सुधार के लिए संभावित रूप से लागत प्रभावी रणनीति का संकेत देते हैं।”

एक पोस्ट डॉक्टरल फेलो और सह-प्रमुख लेखक शान लियू ने कहा, “सीएआर टी सेल थेरेपी से रक्त कैंसर के हजारों रोगियों का सफलतापूर्वक इलाज किया गया है, लेकिन यह अभी भी सभी के लिए कारगर नहीं है।”

लियू ने पेरेलमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन के एक मेडिकल छात्र पुनीत गुरुप्रसाद के साथ मिलकर अध्ययन का नेतृत्व किया।

शोध दल ने डिफ्यूज-लार्ज बी-सेल लिंफोमा के माउस मॉडल का उपयोग करके सीएआर टी सेल की ट्यूमर से लड़ने की क्षमताओं पर कीटोजेनिक हाई फाइबर हाई फैट हाई प्रोटीन हाई कोलेस्ट्रॉल और एक नियंत्रण आहार सहित कई अलग-अलग आहारों के प्रभाव का परीक्षण किया।

उन्होंने पाया कि कीटोजेनिक आहार प्राप्त करने वाले चूहों में अन्य सभी आहारों की तुलना में ट्यूमर नियंत्रण और सर्वाइवल में सुधार देखने को मिला।

बाद के अध्ययनों में, उन्होंने पाया कि बीटा हाइड्रोक्सीब्यूटाइरेट का उच्च स्तर इस प्रभाव का एक प्रमुख मीडिएटर था।

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गुरुप्रसाद ने कहा, “हमारा सिद्धांत यह है कि सीएआर टी कोशिकाएं हमारे शरीर में मौजूद मानक शर्करा जैसे ग्लूकोज की बजाय बीएचबी को ईंधन स्रोत के रूप में पसंद करती हैं, इसलिए शरीर में बीएचबी के स्तर को बढ़ाने से सीएआर टी कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं को बाहर निकालने की अधिक शक्ति मिलती है।”

माइक्रोबायोलॉजी के सहायक प्रोफेसर, पीएचडी, मायान लेवी ने कहा, “हम एक ऐसे इलाज के बारे में बात कर रहे हैं जो अपेक्षाकृत सस्ता है और जिसमें टॉक्सिसिटी की संभावना कम है।”

लेवी ने कहा, “यदि इस परीक्षण के आंकड़े सही साबित होते हैं, तो मैं यह सोचने के लिए उत्साहित हूं कि इस तरह के एक काफी सरल दृष्टिकोण को आहार इलाज या अन्य पारंपरिक तरीकों के साथ कैसे जोड़ा जा सकता है, ताकि कैंसर विरोधी प्रभाव को बढ़ाया जा सके।”

–आईएएनएस

एमकेएस/एएस

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