'थ्री सी प्रमोटर्स' के खिलाफ ईडी की बड़ी कार्रवाई, 75.16 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क

लखनऊ, 9 जनवरी (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में 75.16 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है।

ईडी ने यह कार्रवाई मेसर्स थ्री सी प्रमोटर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (थ्री सी प्रमोटर्स), मेसर्स थ्री सी इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड और अन्य समूह कंपनियों के खिलाफ की है। इन कंपनियों के नाम पर अंबाला और मोहाली में कृषि भूमि और नोएडा में वाणिज्यिक, संस्थागत भूमि, और निर्माणाधीन आवासीय फ्लैट्स की कुल संपत्तियों को जब्त किया गया है। इस कार्रवाई का संबंध मेसर्स हैसिंडा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रमोटरों/निदेशकों द्वारा की गई धोखाधड़ी से है।

प्रवर्तन निदेशालय ने यह जांच इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इन एफआईआर में मेसर्स हैसिंडा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और इसके प्रमोटरों/निदेशकों पर आरोप था कि उन्होंने निवेशकों और गृह खरीदारों से रकम लेकर धोखाधड़ी की और उन्हें फ्लैट्स नहीं दिए। जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि नोएडा के सेक्टर 107 में स्थित लोटस 300 परियोजना 2010-11 में 67,941.45 वर्ग मीटर भूमि पर शुरू की गई थी, जिसमें निवेशकों से राशि जुटाने के बाद भी परियोजना पूरी नहीं हो पाई। धन की हेराफेरी के कारण परियोजना में आवश्यक वित्तीय संसाधनों की कमी हो गई और अंततः यह परियोजना अधूरी रह गई, जिसके परिणामस्वरूप कंपनी दिवालिया हो गई।

ईडी ने मेसर्स थ्री सी ग्रुप के निदेशकों और प्रमोटरों के विभिन्न परिसरों में 17 से 20 सितंबर 2024 के बीच छापेमारी की। इस दौरान 42 करोड़ रुपये की नकदी, हीरे और आभूषण, आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। इसके अतिरिक्त, यह भी सामने आया कि मेसर्स थ्री सी यूनिवर्सल डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को दी गई अधिकांश धनराशि असुरक्षित ऋण के रूप में विभिन्न अन्य समूह कंपनियों को दी गई थी। इस राशि का इस्तेमाल पंजाब और नोएडा, यूपी में अचल संपत्तियों को खरीदने में किया गया था।

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ईडी ने इस मामले में पहले 28 अक्टूबर 2024 को एक अनंतिम कुर्की आदेश जारी किया था, जिसमें पंजाब के होशियारपुर, फतेहगढ़ साहिब और मोहाली में कृषि भूमि और औद्योगिक भूखंडों को कुर्क किया गया था, जिनकी कुल कीमत 23.13 करोड़ रुपये थी। अब तक की कुल संपत्तियों का मूल्य 98.29 करोड़ रुपये हो चुका है। प्रवर्तन निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई कमी पाई जाती है, तो इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच जारी है और यह उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही और भी संपत्तियां जब्त की जा सकती हैं।

–आईएएनएस

पीएसके/सीबीटी

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