प्रधानमंत्री के सीमावर्ती लोगों को 'प्रथम ग्रामीण' कहने पर पुंछ के लोगों ने कहा शुक्रिया

पुंछ, 7 फरवरी (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के लोगों ने सीमावर्ती गांवों के निवासियों को संसद में “प्रथम ग्रामीण” कहने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया है। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर राज्यसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए गुरुवार को यह बात कही।

पुंछ के लोगों ने शुक्रवार को आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इससे उन्हें अपने घर जैसा महसूस हो रहा है। पीएम मोदी ने सीमावर्ती कृषि के व्यापक विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने की बात भी कही। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे भविष्य में रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे।

सामाजिक कार्यकर्ता दिलबाग सिंह ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा कि सीमावर्ती इलाकों के लोगों को अब ‘फ्रंट लाइन’ के लोगों के रूप में माना जाएगा। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों का विकास सबसे पहले होगा और सरकार उनके विकास के लिए प्रतिबद्ध है। हम इन लोगों से अनुरोध करेंगे कि वे अपनी स्थानीय सीमाओं को प्राथमिकता दें, चाहे वह टूरिज्म का विकास हो या अन्य मुद्दे। मैं पुंछ के सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए अनुरोध करूंगा। यहां पर्यटन को बढ़ावा देना चाहिए। जम्मू-कश्मीर में जो धनराशि आती थी, उसका अधिकतर हिस्सा कहीं और समायोजित किया जाता था। हम चाहेंगे कि पुंछ के इस विशेष क्षेत्र का ध्यान रखा जाए, उनके सीमावर्ती इलाकों का विकास किया जाए, जो अब तक विकसित नहीं हुए हैं। यह विकास उन जगहों के लिए हो जहां टूरिज्म को बढ़ावा देने की जरूरत है। मैं कहूंगा कि हमें विश्व में किसी से मुकाबला नहीं करना है, और मैं एक बार फिर उनका धन्यवाद करता हूं।”

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स्थानीय निवासी सुनील कुमार ने कहा, “सीमा पर रहने वाले लोगों को पहले बैकवर्ड यानी पिछड़े लोग कहा जाता था, जहां सड़कें और पानी की सुविधाएं नहीं होती थीं। लेकिन हमारे प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को अपने भाषण में कहा कि ये लोग बैकवर्ड नहीं, बल्कि फॉरवर्ड हैं, सबसे आगे वे हैं जो फ्रंट लाइन पर लड़ते हैं। इस बात से हम बहुत खुश हुए और हम अपने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हैं। हम चाहते हैं कि जो प्रधानमंत्री ने कहा, उस पर जल्द से जल्द अमल भी हो, क्योंकि इससे लोगों का रोजगार बढ़ेगा और उनमें आशा की किरण जागृत होगी।”

एक अन्य स्थानीय कैप्टन अलीम अहमद ने कहा, “गुरुवार को हमने एक खबर सुनी जिसमें हमारे प्रधानमंत्री ने कहा कि सीमा पर रहने वाले लोगों को पहले ‘पिछड़े हुए’ कहा जाता था। लेकिन कल उन्होंने कहा कि ये लोग ‘फ्रंट’ पर रहते हैं। अगर प्रधानमंत्री यह कह रहे हैं कि हम फ्रंट पर रहते हैं, तो मेरी एक रिक्वेस्ट है कि जिला स्तर के अधिकारी इस बात को ध्यान में रखें। अगर प्रधानमंत्री ने यह कहा है, तो हमारे विकास के लिए कदम उठाए जाएं। हम फ्रंट पर रहते हैं, जिसमें कुछ अच्छाई और कुछ बुराई, तकलीफ भी है, खासकर सीमा पर। लेकिन हम चाहते हैं कि हमारे क्षेत्र का विकास हो और उसे आगे बढ़ाया जाए। जैसे पहले जब यहां कोई सीमा नहीं थी, फिर जब फ्रेंड्स लगे तो हमें काफी शोहरत मिली। इसी तरह हमारे लिए कुछ और अच्छा किया जाए ताकि हिंदुस्तान की जनता, जो फ्रंट पर रहती है, को यह गर्व हो कि हम फ्रंट पर रहते हैं और हम भी हिंदुस्तान के निवासी हैं, जिनका ध्यान रखा जा रहा है। मेरी सरकार से भी एक रिक्वेस्ट है कि हमारी देखभाल की जाए।”

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सुनील कुमार शर्मा ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने कल अपने भाषण में कहा कि सीमा पर रहने वाले लोग अब ‘पिछड़े लोग’ नहीं रहे। उन्होंने बहुत तरक्की की है। पीएम मोदी का यह कहना ही सीमा के लोगों के लिए एक बड़ा कदम है। सरकार टूरिज्म के जरिए पैसा ला रही है, सड़कों का बड़े पैमाने पर विकास हो रहा है, और हर किसी को सुविधाएं मिल रही हैं। हम भी सीमा पर देख रहे हैं कि हमें भी उन्हीं सुविधाओं का लाभ मिल रहा है।”

उल्लेखनीय है कि गुरुवार को राज्यसभा में पीएम मोदी ने कहा था, “हमने समाज के विभिन्न वर्गों और देश के पिछड़े भूभागों की चिंता की है। सीमावर्ती गांवों को बैकवर्ड या आखिरी गांव कहा जाता रहा है, लेकिन हमने इस मनोवैज्ञानिक परिवर्तन के साथ उन्हें प्राथमिकता दी। हमने सीमा पर रहने वालों को पहले स्थान पर रखा, जहां सूरज की पहली और आखिरी किरणें पड़ती हैं। इन गांवों को ‘फर्स्ट विलेज’ के रूप में विशेष योजनाओं के साथ विकसित करने का निर्णय लिया। इस काम को इतनी प्राथमिकता दी कि पिछले कार्यकाल में मंत्री परिषद के सदस्यों को ऐसे दूरदराज के गांवों में 24 घंटे रहने के लिए भेजा गया, जहां तापमान माइनस 15 डिग्री तक गिरता है। वहां जाकर उन्होंने समस्याओं का समाधान खोजा।”

–आईएएनएस

पीएसएम/एकेजे

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