करोड़ के जीएसटी रिफंड घोटाले के मास्टरमाइंड को दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट से हिरासत में

Media House  नई दिल्ली-अहमदाबाद स्थित डीजीजीआई की क्षेत्रीय इकाई ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए, जीएसटी रिफंड  धोखाधड़ी के मास्टरमाइंड कपिल चुघ को गिरफ्तार कर लिया है। कई आर्थिक आपराधिक मामलों में वांछित यह आरोपी 19 अप्रैल 2026 को दुबई से लौट रहा था, तभी आईजीआई एयरपोर्ट पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

जांच प्रक्रिया में बाधा डालते हुए कपिल चुघ ने डीजीजीआई, एजेडयू, अहमदाबाद द्वारा जारी 22 समन की अनदेखी की और कभी जांच में सहयोग नहीं किया। कई राज्यों और क्षेत्रों में लगभग ₹1,825 करोड़ के जीएसटी घोटाले को अंजाम देकर वह कानून के शिकंजे से बचने के लिए दुबई भाग गया था।

इस मामले में की गई जांच से पता चला है कि कपिल चुघ ने अपने सहयोगी विपिन शर्मा के साथ मिलकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आीटीसी) का धोखाधड़ी से लाभ उठाने और ‘जीरो-रेटेड सप्लाई’ के बहाने रिफंड दावों के माध्यम से उसे नकद में बदलने की एक सुनियोजित व्यवस्था तैयार की थी। कपिल चुघ इस पूरे नेटवर्क के मुख्य सूत्रधार और एक अभ्यस्त आर्थिक अपराधी के रूप में उभरा है, जिसने डमी फर्मों, कर्मचारियों और अपने करीबी सहयोगियों के माध्यम से पूरे नेटवर्क को नियंत्रित किया। ये संस्थाएं दूसरों के केवाईसी दस्तावेजों का उपयोग करके बनाई गई थीं और घोषित पतों पर न तो इनका कोई कामकाज था और न ही वहां कोई बुनियादी ढांचा, जनशक्ति या वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि पाई गई। इन डमी संस्थाओं के मालिक/निदेशक केवल नाम के लिए थे, जिन्हें निश्चित मासिक नकद भुगतान किया जाता था। जीएसटी पंजीकरण, इनवॉइस जनरेशन, बैंकिंग संचालन, रिटर्न दाखिल करने और रिफंड दावे जमा करने जैसी सभी गतिविधियां मास्टरमाइंड्स द्वारा एक ही जगह से नियंत्रित किए जाते थे।

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धोखाधड़ी की कार्यप्रणाली के तहत, बिना किसी माल की आपूर्ति के फर्जी बिलों के जरिए अवैध आईटीसी जेनरेट किया गया। भारी-भरकम आईटीसी प्राप्त करने के लिए इनवॉइस में महंगे तंबाकू उत्पादों का व्यापार दिखाया गया। जांच में सामने आया कि इन बिलों को कई बिचौलिया फर्मों के बीच घुमाकर लेनदेन की एक जटिल श्रृंखला तैयार की गई थी। कागजों पर दिखाए गए इस फर्जी व्यापार के जरिए अपात्र आईटीसी को एक कंपनी से दूसरी कंपनी में भेजा गया। इस पूरी साजिश का मकसद आईटीसी को उन खास फर्मों में इकट्ठा करना था जिन्हें निर्यातक के रूप में दिखाया गया था, जिनमें से अधिकांश कांडला विशेष आर्थिक क्षेत्र (केएएसईजेड) से संबंधित थीं।

इस फर्जीवाड़े के साथ-साथ, आरोपियों ने स्थानीय स्तर पर बिना इनवॉइस के सस्ता और गुणवत्ताहीन तंबाकू खरीदा। इस माल को ‘किमाम और जर्दा’ जैसे महंगे ब्रांडेड उत्पादों के नाम पर फर्जी तरीके से ऊंचे दामों पर निर्यात किया गया। जबकि असलियत में उनके पास इसे बनाने की न तो कोई फैक्ट्री थी और न ही मशीनरी। जीएसटी रिटर्न में दिखाया गया टर्नओवर पूरी तरह फर्जी था, जिसका एकमात्र मकसद सरकारी खजाने से रिफंड प्राप्त करना था। इसके बाद एलयूटी सुविधा का फायदा उठाते हुए बिना टैक्स चुकाए माल बाहर भेजा गया और आईटीसी रिफंड का दावा किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि ई-वे बिलों में फर्जी वाहन नंबरों का इस्तेमाल किया गया और पूरे व्यापार को असली दिखाने के लिए ट्रांसपोर्ट के कागजात भी फर्जी तैयार किए गए थे।

पैसों के लेन-देन की जांच में यह खुलासा हुआ कि करोड़ों के ट्रांजेक्शन के बावजूद, पैसा केवल कुछ ही खातों के बीच घूम रहा था। जैसे ही भुगतान प्राप्त होता, उसे तुरंत संबंधित कंपनियों में भेज दिया जाता या कैश निकाल लिया जाता था। जांच में पाया गया कि वास्तविक व्यापार में होने वाले खर्च, जैसे सप्लायर को भुगतान या ट्रांसपोर्ट का खर्चा, कहीं भी मौजूद नहीं था। इतना ही नहीं, इस फर्जीवाड़े में शामिल कई कंपनियों के फोन नंबर, आईपी एड्रेस और अकाउंटेंट तक एक ही थे, जिससे यह साबित होता है कि पूरा गिरोह एक ही जगह से संचालित हो रहा था।

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कपिल चुघ ने अपने निर्यात व्यवसाय के टर्नओवर को गलत तरीके से और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया ताकि यस बैंक से लगभग ₹11 करोड़ की हेराफेरी की जा सके। इसके अतिरिक्त, जाली दस्तावेजों के माध्यम से धोखाधड़ी से ऋण सुविधाएं प्राप्त करने के एक अन्य मामले में सीबीआई द्वारा उसके खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है। इसके अलावा, सेबी ने 30.03.2026 के अपने आदेश के माध्यम से मेसर्स एलीटकोन के एमडी विपिन शर्मा के खिलाफ कार्रवाई की है। उस पर जीएसटी धोखाधड़ी से जुड़ी फर्जी बिलिंग के जरिए कंपनी के टर्नओवर को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और कंपनी के मूल्यांकन में हेरफेर करने का आरोप है।

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