डीपीएस बोकारो के छात्र ने कर दिया बड़ा कारनामा, सड़क हादसे में लोगों की बचाएगी जान

रूपेश के ‘रक्षक’ प्रोजेक्ट को अपनाएगी भारत सरकार, मिला पेटेंट
अब एक्सीडेंट होते ही अस्पतालों को मिल जाएगी सूचना और समय पर पहुंच सकेगी एंबुलेंस
परिजनों और पुलिस को भी तत्काल हो जाएगा फोन, उल्लेखनीय उपलब्धि पर प्राचार्य डॉ. गंगवार ने दी बधाई
मीडिया हाउस न्युज एजेंसी बोकारो : गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ अपने विद्यार्थियों के समग्र विकास दिशा में डीपीएस बोकारो की कटिबद्धता ने एक बार फिर अपना रंग दिखाया है। विद्यालय का छात्र रहे रूपेश कुमार के वैज्ञानिक नवाचार संबंधी प्रोजेक्ट ‘रक्षक’ को अब भारत सरकार अपनाने जा रही है। सड़क हादसों में लोगों की जान बचाने में काफी महत्वपूर्ण उसके इस प्रोजेक्ट को भारत सरकार ने ‘इंस्पायर मानक अवार्ड स्कीम’ के तहत पेटेंट प्रदान किया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के अधीनस्थ राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान (नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन) की ओर से इससे संबंधित सारी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। अब संभावना है कि आनेवाले दिनों में कार बनाने वाली कंपनियां उसके इस प्रोजेक्ट को इस्तेमाल करेगी और सड़क दुर्घटनाओं में समय रहते लोगों की जान बचाई जा सकेगी। बता दें कि रूपेश ने एक खास डिवाइस और मोबाइल एप्लीकेशन – रक्षक तैयार किया है। इसकी मदद से दुर्घटना होने के साथ ही संबंधित घटनास्थल के एक किलोमीटर के दायरे में स्थित सभी अस्पतालों को कॉल और एसएमएस के जरिए वाहन के लोकेशन के साथ सूचना मिल जाएगी। इससे सही समय पर घायल व्यक्ति तक एंबुलेंस पहुंचाई जा सकेगी। इतना ही नहीं, अस्पतालों के साथ-साथ वाहन में सवार लोगों के परिजनों और पुलिस को भी तत्काल सूचना मिल सकेगी। इसके अलावा उक्त एप में रजिस्टर्ड आसपास के कार चालकों को भी लोकेशन व सूचना मिल जाएगी। घर-परिवार के लोगों को भी अलर्ट मिल जाएगा। रूपेश की इस उपलब्धि से डीपीएस बोकारो परिवार में हर्ष है। विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने इसके लिए उसे बधाई देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उन्होंने कहा कि विद्यालय अपने छात्र-छात्राओं की प्रतिभाओं को निखारने का हर अवसर प्रदान करता है। रूपेश प्रतिभाशाली छात्र रहा है। उसकी वैज्ञानिक कुशलता को विद्यालय ने पहचाना और तराशते हुए आज यह मुकाम दिलाया कि उसे सरकार से पेटेंट मिल सका। उसके द्वारा बनाया गया रोड सेफ्टी डिवाइस सड़क-सुरक्षा के दृष्टिकोण से काफी अहम है।
• जून में जापान टूर पर भेजेगी सरकार :
डीपीएस बोकारो से भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना इंस्पायर मानक अवार्ड योजना के लिए चयनित होने वाले रूपेश को तीन महीने बाद जून 2025 में जापान टूर का भी मौका मिला है। उक्त योजना के तहत अंतिम चरण में चयनित होने पर उसे पुरस्कार-स्वरूप लगभग आठ लाख रुपए की पुरस्कार-राशि भी मिलेगी और राष्ट्रपति भवन में चार दिनों तक आतिथ्य का अवसर भी मिलेगा। अपनी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता तथा डीपीएस बोकारो परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए रूपेश ने कहा कि जिस तरह का सेफ्टी डिवाइस उसने बनाया है, अगर कार निर्माता कंपनियां पहल करें, तो वह अपने आइडिया को व्यापक स्तर पर धरातल पर उतार सकता है। इससे दूसरा फायदा यह भी होगा कि सभी वाहन चालकों का डाटा एक जगह सुरक्षित रह पाएगा। साथ ही, सड़क हादसों के समय मिलने वाले लोकेशन के आधार पर संबंधित इलाके के एक्सीडेंट जोन की भी जानकारी मिल सकेगी।
• ससमय एंबुलेंस के अभाव में हर साल 45 हजार लोगों की होती है मौत :
फिलहाल सीबीएसई 12वीं बोर्ड की परीक्षा दे रहे रूपेश ने बताया कि भारत में सड़क दुर्घटना प्रमुख चुनौतियों में से एक है। भागम-भाग और रफ्तार की होड़ में हर साल अपने देश में लगभग डेढ़ लाख लोगों की मौत सड़क हादसे में होती है। इनमें लगभग 30 फीसदी यानी लगभग 45 हजार लोगों की मौत सही समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंच पाने के कारण हो जाती है। इस समस्या से निजात पाने और सही समय पर दुर्घटनाग्रस्त लोगों को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के उद्देश्य से ही उसने यह प्रोजेक्ट तैयार किया, जिसे पूरा करने में इंस्पायर मानक अवार्ड योजना के तहत भारत सरकार की तरफ से उसे पारितोषिक के रूप में सहयोग भी मिला।
• पिता के दोस्त की सड़क हादसे में मौत के बाद आया आइडिया :
रूपेश ने बताया कि लगभग कुछ वर्ष पहले उसके पिता बीएसएलकर्मी रविशंकर कुमार के एक पूर्व सैनिक मित्र की सड़क हादसे में दर्दनाक मृत्यु हो गई थी। अगर सही समय पर एंबुलेंस घटनास्थल पर पहुंच गई होती, तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। इस दुर्घटना के बाद ही उसे यह आइडिया सूझा कि कुछ ऐसा उपकरण वह बनाए, जिससे सड़क हादसे में घायल लोगों की जान समय रहते बचाई जा सके। उसने इस बारे में अपने विद्यालय में संबंधित गाइड टीचर मो. ओबैदुल्लाह अंसारी से बात की और उनकी मदद से इस प्रोजेक्ट की ओर काम आगे बढ़ाया। प्रारंभिक स्तर पर इसे मूर्त रूप देने में उसे लगभग एक महीने का समय लगा था और करीब 1200 रुपए का खर्च आया था। इस प्रोजेक्ट के लिए उसने सभी सामान आनलाइन जुगाड़ किए थे।
• कार की स्पीड और झटके के दबाव का पता लगाकर काम करता है सेंसर :
रूपेश द्वारा बनाया गए डिवाइस में एमसीयू (माइक्रोकंट्रोलर यूनिट), सेंसर, जीपीएस, सिम कार्ड, एक्सीलरेशन डिटेक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। जबकि, इससे जुड़े मोबाइल ऐप में वाहन चालक का नाम, घर का पता, ब्लड ग्रुप एवं परिजनों के मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड रहते हैं। कंप्यूटर कोडिंग की मदद से उक्त डिवाइस में सभी संबंधित डाटा को फीड किया जाता है। रूपेश ने बताया कि इसमें खास तरह के सेंसर का इस्तेमाल किया गया है, जो कार की स्पीड और झटके के दबाव का पता लगाता है। सुरक्षित सीमा से अधिक रफ्तार होने पर यह डिवाइस ड्राइवर को अलर्ट भी करता है। वहीं, एक्सीडेंट होने पर वाहन की गति और गाड़ी पर झटके से अचानक पड़ने वाले दबाव का पता लगाकर सेंसर एमसीयू को संदेश भेजता है, जहां से संबंधित नंबरों पर फोन और एसएमएस चला जाता है।
• झारखंड से दो छात्रों को मिला पेटेंट,: गौरतलब है कि डीपीएस बोकारो के रूपेश के साथ-साथ झारखंड से कुल दो विद्यार्थियों के वैज्ञानिक नवाचार को पेटेंट मिला है। दूसरा छात्र कोयलानगर, धनबाद का तुहीन भट्टाचार्जी है, जिसने कोयला चोरी रोकने को लेकर एक परिवहन प्रणाली विकसित की है। बता दें कि रूपेश ने डीपीएस बोकारो से नागपुर यूनिवर्सिटी में आयोजित 108वीं इंडियन साइंस कांग्रेस में भी झारखंड का प्रतिनिधित्व कर पूरे राज्य का मान बढ़ाया था। बीएसएलकर्मी रविशंकर कुमार एवं बिहार में राजस्व पदाधिकारी सुनीता कुमारी के होनहार पुत्र रूपेश की शुरू से ही कोडिंग में रुचि रही है। वह आगे चलकर एक सफल कंप्यूटर इंजीनियर बनना चाहता है।










