माकपा और भाजपा ने टीएमसी पर बोला हमला, सीएम ममता बनर्जी को लिया आड़े हाथ

कोलकाता, 31 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लाल और गेरुआ एक हो गए वाले बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता और पश्चिम बंगाल राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने ममता बनर्जी के इस बयान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ईद की सभा में सियासी भाषण देना एक मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता। वहीं, भाजपा सांसद ज्योतिरमय सिंह महतो ने भी ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ममता खुद पार्टियां बदलती रहती हैं और अब वह फिर से माकपा से हाथ मिला सकती हैं।

मोहम्मद सलीम ने ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ईद के मौके पर, जब वह धार्मिक सभा में गई थीं, तो उन्हें सरकार की नीतियों की चर्चा करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने वहां भी चुनाव और राजनीति की बातें शुरू कर दीं। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का गठन ही भाजपा के साथ मिलकर माकपा और वामपंथी ताकतों को खत्म करने के लिए किया गया था।

उन्होंने कहा कि पिछले 10-12 सालों में ममता बनर्जी ने पुलिस, झूठे मुकदमे और राजनीतिक हिंसा का सहारा लेकर माकपा को खत्म करने की कोशिश की, लेकिन अब जब माकपा फिर से नई ऊर्जा और नई पीढ़ी के साथ उभर रही है, तो ममता बनर्जी को लाल झंडे की याद आ रही है। उन्होंने तृणमूल और भाजपा के संबंधों को उजागर करते हुए कहा, “नारद, शारदा और चिटफंड घोटाले में ममता बनर्जी और उनका परिवार फंसा हुआ है और खुद को बचाने के लिए वह भाजपा के साथ मिली हुई हैं।”

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इसके अलावा, मोहम्मद सलीम ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी जहां भी जाती हैं, वहां ‘चोर और लफंगे’ उनके साथ होते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों के छात्रों से अपील करते हुए कहा कि वे ममता बनर्जी से शिक्षा, भ्रष्टाचार और नौकरियों की भर्ती में हुए घोटालों को लेकर सवाल करें।

पुरुलिया से भाजपा सांसद ज्योतिरमय सिंह महतो ने भी सीएम ममता बनर्जी के बयान पर पलटवार किया और कहा कि ममता बनर्जी खुद समय-समय पर पार्टियां बदलती रहती हैं। उन्होंने कहा, “पहले वह भाजपा के साथ थीं, फिर कांग्रेस में गईं और अब आप देखेंगे कि वह सीपीएम से भी हाथ मिला लेंगी। हर दशक में उनकी पार्टी बदल जाती है।”

महतो ने कहा कि ममता बनर्जी अपनी राजनीतिक अस्थिरता के लिए जानी जाती हैं और अब वह अकेले लड़ने की बात कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी का बंगाल में जनाधार कमजोर हो रहा है और ममता बनर्जी की रणनीति केवल खुद को बचाने की है।

–आईएएनएस

डीएससी/सीबीटी

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