आंध्र प्रदेश सरकार ने पादरी की मौत की जांच के दिए आदेश

अमरावती, 26 मार्च (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश सरकार ने पादरी प्रवीण पगडाला की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जांच के आदेश दिए हैं।

ईसाई संगठनों द्वारा गड़बड़ी की आशंका जताए जाने के बाद राज्य सरकार ने कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जांच के आदेश दिए हैं, जबकि पूर्वी गोदावरी पुलिस ने भी एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।

प्रवीण पगडाला (45) का शव मंगलवार को राजमुंदरी के पास कोंटामुरू में सड़क किनारे उनकी मोटरसाइकिल के बगल में मिला था।

पुलिस ने कहा कि उनकी मौत सड़क दुर्घटना में हुई, जबकि उनके परिवार के सदस्यों और अनुयायियों को संदेह है कि उनकी हत्या की गई है, क्योंकि उन्होंने हाल ही में अपनी जान को खतरा होने की बात कही थी।

राजमुंदरी के सरकारी अस्पताल के पास लगातार दूसरे दिन भी तनाव की स्थिति बनी रही, जहां कई ईसाई समूहों के प्रतिनिधि घटना की गहन जांच की मांग को लेकर एकत्र हुए।

हैदराबाद निवासी प्रवीण सोमवार रात कोव्वुर शहर में एक चर्च में कार्यक्रम में भाग लेने के बाद अपनी रॉयल एनफील्ड बाइक से राजमुंदरी आ रहे थे। मंगलवार सुबह कोंटामुरू के पास राहगीरों ने उनका शव देखा।

पूर्वी गोदावरी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) नरसिंह किशोर ने राजमुंदरी में मीडियाकर्मियों को बताया कि प्रवीण का मोबाइल फोन उसके शव के पास मिला है। उसने आखिरी कॉल राममोहन आरजेवाई नामक व्यक्ति को की थी। पुलिस ने राममोहन को सूचना दी, जो मौके पर पहुंचे और मृतक की पहचान प्रवीण के रूप में की। इसके बाद पुलिस ने प्रवीण के परिवार को सूचित किया, जो हैदराबाद में रहता है। प्रवीण के साले की शिकायत पर पुलिस ने संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला दर्ज किया।

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पुलिस ने डॉग स्क्वॉड की मदद से मौके से सबूत जुटाए। एसपी ने कहा कि डॉक्टरों की एक टीम ने पोस्टमार्टम किया और पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई। शव को बुधवार को प्रवीण के परिवार को सौंप दिया गया।

पुलिस ने कोव्वुर टोलगेट और कोंटामुरू के पास मोटरसाइकिल चलाते प्रवीण की सीसीटीवी फुटेज जुटाई। प्रवीण की बाइक और लाल रंग की कार एक ही समय पर चलती हुई देखी गई। पुलिस को संदेह है कि दुर्घटना रात 11:43 बजे हुई।

एसपी ने कहा, “हम सबूतों का विश्लेषण कर रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि रात 11:31 बजे से 11:42 बजे के बीच क्या हुआ। हम कार की पहचान करने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।”

–आईएएनएस

एससीएच/एकेजे

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