नैतिकता के आधार पर सीएम सिद्दारमैया को देना चाहिए इस्तीफा : आरटीआई कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा

बेंगलुरु, 17 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) भूमि आवंटन घोटाला मामले में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। अब इसे लेकर सियासत तेज हो गई है।

मुख्यमंत्री के खिलाफ शिकायतकर्ताओं में से एक आरटीआई कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा ने कहा, “मैंने राज्यपाल को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने का अनुरोध किया था और संबंधित दस्तावेज संलग्न किये थे। राज्यपाल ने मेरे अनुरोध को स्वीकार करते हुए इसे मंजूरी दे दी है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमने पहले ही जनप्रतिनिधि न्यायालय में मामला दायर कर दिया है। मैंने राज्यपाल के पत्र की एक प्रति अदालत में जमा की है और अनुरोध किया है कि 20 अगस्त को निर्णय लेने से पहले इस पर विचार किया जाए। मुझे नहीं पता कि इस मामले को अदालत में कितना समय लगेगा, लेकिन हमने इसे तब तक लड़ने का फैसला किया है जब तक हम जीत हासिल नहीं कर लेते। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं यह नहीं कहूंगा कि सीएम को इस्तीफा दे देना चाहिए, लेकिन नैतिकता तो यही कहती है कि उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। चूंकि वह एक उच्च पद पर हैं, इसलिए हमने ऐसे उदाहरण देखे हैं, जहां समान पदों पर बैठे व्यक्ति फैसला आने तक इस्तीफा दे देते हैं। इस सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए सीएम को इस्तीफा दे देना चाहिए, हालांकि मैं दोहराता हूं कि मैं उन पर ऐसा करने के लिए दबाव नहीं डाल रहा हूं।”

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मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने कहा है कि विपक्षी भाजपा और जनता दल (एस) एमयूडीए भूमि आवंटन के संबंध में झूठे आरोप लगाकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

इस घटनाक्रम को लेकर सीएम सिद्दारमैया ने कहा, “राज्यपाल का फैसला पूरी तरह से असंवैधानिक है, हम इसे कानूनी रूप से चुनौती देंगे। उन्होंने कहा क‍ि राज्यपाल इस सरकार को सहन नहीं कर पा रहे हैं और हटाने की कोशिश कर रहे हैं।”

राज्यपाल के आदेश में कहा गया है, “मैं इस बात से संतुष्ट हूं कि टी.जे. अब्राहम, प्रदीप कुमार एस.पी. और स्नेहमयी कृष्णा की याचिकाओं में उल्लिखित अपराधों के आरोपों पर मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी दी जा सकती है।

“मैं मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17ए और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 218 के तहत याचिकाओं में उल्लिखित कथित अपराधों के लिए मंजूरी देता हूं।”

दरअसल, मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की पत्नी पार्वती को उनके भाई मल्लिकार्जुन ने कुछ जमीन गिफ्ट के तौर पर दी थी। यह जमीन मैसूरु जिले के कैसारे गांव में स्थित है। बाद में इस जमीन को मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) ने अधिग्रहित कर ल‍िया, और इसके बदले पार्वती को विजयनगर इलाके में 38,223 वर्ग फीट का प्लॉट दे दिया।

आरोप है कि दक्षिण मैसूरु के संभ्रांत इलाके में मौजूद विजयनगर के प्लॉट की कीमत कैसारे गांव की उनकी मूल जमीन से बहुत ज्यादा है। इसी को लेकर सिद्दारमैया भ्रष्टाचार के आरोप में घिर गए हैं।

–आईएएनएस

एकेएस/एकेजे

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