कर्नाटक के पूर्व सीएम येदियुरप्पा को पोक्सो मामले में हाईकोर्ट ने दी अंतरिम राहत, व्यक्तिगत पेशी पर रोक

बेंगलुरु, 14 मार्च (आईएएनएस)। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम मामले में अंतरिम राहत प्रदान करते हुए 15 मार्च को प्रथम फास्ट ट्रैक कोर्ट के समक्ष उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति के लिए जारी समन पर रोक लगा दी है।

प्रदीप सिंह येरुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को येदियुरप्पा की याचिका पर विचार करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसमें उनके खिलाफ दायर आरोपपत्र को रद्द करने की मांग की गई थी।

अदालत ने पाया कि मामले में व्यापक जांच की जरूरत है और तदनुसार, समन और मामले के अदालती संज्ञान दोनों पर रोक लगा दी गई।

येदियुरप्पा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सी.वी. नागेश ने दलील दी कि उच्च न्यायालय ने पहले ही मामले में अंतरिम राहत दे दी है।

उन्होंने आगे कहा कि एफआईआर में आईटी सेक्शन येदियुरप्पा के बजाय शिकायतकर्ता पर लागू होगा, क्योंकि उन्होंने पीड़िता की मां के मोबाइल फोन से बातचीत को डिलीट नहीं किया था।

पीड़ित लड़की और उसकी मां के बयानों के आधार पर आरोप पत्र दाखिल किया गया। हालांकि, घटनास्थल पर मौजूद गवाहों ने कहा है कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई। वकील नागेश ने यह भी बताया कि कथित घटना के एक महीने बाद पुलिस कमिश्नर के पास शिकायत दर्ज कराई गई थी।

यह मामला 2 फरवरी, 2024 को अनुचित तरीके से छूने के आरोप से जुड़ा है। हालांकि उच्च न्यायालय ने पहले येदियुरप्पा को अदालत में पेश होने के संबंध में रियायत दी थी, लेकिन उसने मामले पर अंतरिम रोक नहीं लगाई थी।

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इन दलीलों का विरोध करते हुए महाधिवक्ता शशिकिरण शेट्टी ने अदालत से येदियुरप्पा को कोई राहत न देने का आग्रह किया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पहले के उच्च न्यायालय के आदेश में केवल येदियुरप्पा को अदालत में पेश होने से छूट दी गई थी और कार्यवाही पर रोक नहीं लगाई गई थी।

बेंगलुरू की प्रथम फास्ट ट्रैक अदालत ने 28 फरवरी को इस मामले के संबंध में येदियुरप्पा को समन जारी कर 15 मार्च को अदालत के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया था।

अदालत ने मामले में पुलिस द्वारा दाखिल आरोपपत्र पर विचार करने के बाद यह आदेश पारित किया। येदियुरप्पा को अब तक उच्च न्यायालय से समन के मामले में छूट मिली हुई थी।

7 फरवरी को कर्नाटक उच्च न्यायालय ने इस मामले में उनके खिलाफ आरोप रद्द करने से इनकार कर दिया था।

हालांकि, बेंच ने येदियुरप्पा को अग्रिम जमानत दे दी थी, जिससे उन्हें गिरफ्तारी से छूट मिल गई थी। एफटीसी द्वारा जारी ताजा समन ने मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और वह कानूनी कार्यवाही का सामना करने के लिए तैयार हैं।

मामले की जांच कर रहे आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने 27 जून, 2024 को एक विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत में आरोप पत्र प्रस्तुत किया।

आरोप पत्र के अनुसार, येदियुरप्पा सहित तीन अन्य आरोपियों पर पोक्सो अधिनियम और आईपीसी की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं, जिनमें 354 (ए) (यौन उत्पीड़न), 204 (दस्तावेजों या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को नष्ट करना) और 214 (अपराध को छिपाने के लिए रिश्वत की पेशकश करना) शामिल हैं।

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आरोप पत्र में आरोप लगाया गया कि 2 फरवरी, 2024 को शिकायतकर्ता अपनी 17 वर्षीय बेटी पर यौन उत्पीड़न के संबंध में मदद मांगने के लिए येदियुरप्पा के आवास पर गई थी। इसमें दावा किया गया है कि येदियुरप्पा लड़की को एक कमरे में ले गए और उसका यौन उत्पीड़न किया। पीड़िता ने उस हरकत का विरोध किया और कमरे से बाहर चली गई। इसके बाद, येदियुरप्पा ने कथित तौर पर उनकी मदद करने से इनकार कर दिया।

चार्जशीट में आगे कहा गया है कि जब पीड़िता ने घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किए, तो येदियुरप्पा ने उन्हें बिचौलियों के जरिए अपने आवास पर बुलाया और 2 लाख रुपये नकद दिए। आरोप है कि इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया और फोन गैलरी से मीडिया फाइलें डिलीट करवा दीं।

पीड़िता की मां का 26 मई, 2024 को बेंगलुरु में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण निधन हो गया।

येदियुरप्पा ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा, “मेरे आवास के पास एक मां और बेटी परेशान दिखीं। दया के कारण, मैंने उनकी स्थिति के बारे में पूछताछ करने के लिए उन्हें फोन किया। मैंने उनकी मदद करने के लिए बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर को भी फोन किया। हालांकि, उन्होंने मुझ पर आरोप लगाना शुरू कर दिया। इसके बावजूद, मैंने उन्हें वित्तीय मदद दी। मैं इन आरोपों का अदालत में सामना करूंगा।”

–आईएएनएस

एकेएस/केआर

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