खनन हादसा-7 मजदूरों की मौत, डीजीएमएस उप महानिदेशक ने उजागर की सुरक्षा नियमों की अनदेखी,

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Media House सोनभद्र, उत्तर प्रदेश सोनभद्र जिले के ओबरा थाना क्षेत्र स्थित बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में कृष्णा माइनिंग वर्क्स की खदान में 15 नवंबर 2025 को हुए दर्दनाक हादसे, जिसमें 7 मजदूरों की मौत हो गई, के बाद प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस भयावह घटना के पीछे की परिस्थितियों और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को लेकर, डीजीएमएस (खान सुरक्षा निदेशालय) उप महानिदेशक, गाजियाबाद अंचल, नीरज कुमार ने अपनी बाइट (वक्तव्य) में विस्तृत जानकारी दी।
हादसे की जांच और निरीक्षण के बाद, डीजीएमएस के शीर्ष अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह त्रासदी किसी आकस्मिक दुर्घटना से अधिक, खदान मालिक द्वारा की गई जानबूझकर सुरक्षा नियमों की अवहेलना का परिणाम है। डीजीएमएस उप महानिदेशक नीरज कुमार ने मीडिया को संबोधित करते हुए हादसे के पीछे की परिस्थितियों और मजबूरियों को लेकर अपनी बात रखी, जिसमें उन्होंने मुख्य रूप से अवैध गतिविधियों और निर्देशों की अनदेखी को उजागर किया। नीरज कुमार ने स्पष्ट किया कि यह खदान लगभग 200 फीट से अधिक गहरी हो चुकी थी और सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन के कारण, डीजीएमएस द्वारा इस खदान में व्यावसायिक खनन पर लगभग डेढ़ महीने पहले ही प्रतिबंध लगा दिया गया था।
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डीजीएमएस उप महानिदेशक नीरज कुमार ने कहा, हमारी ओर से इस खदान में व्यावसायिक उत्खनन की अनुमति नहीं थी। मालिक को केवल सुरक्षा मानकों को बहाल करने और ढलानों को सुधारने के लिए सुधारात्मक कार्यों की अनुमति दी गई थी। इसके बावजूद, मालिक ने लापरवाही दिखाते हुए मनमाने तरीके से अवैध खनन जारी रखा, जो सीधे तौर पर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खदान मालिक ने अधिक मुनाफे की मजबूरी या लालच में मजदूरों की जान को गंभीर खतरे में डाला। कुमार ने आगे बताया, हादसे के वक्त खदान में न तो उचित बेंच निर्माण था और न ही जोखिम नियंत्रण के उपाय मौजूद थे। ड्रिलिंग के दौरान ढलान की स्थिरता पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसके कारण पत्थर का बड़ा हिस्सा धंस गया। यह दर्शाता है कि वहाँ मजदूरों को कमजोर चट्टानों के नीचे काम करने पर मजबूर किया जा रहा था, जो कि नियमों के बिल्कुल विपरीत है।
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डीजीएमएस अधिकारी ने यह भी संकेत दिया कि यह त्रासदी केवल खदान मालिक की गलती नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक और विभागीय लापरवाही को भी दर्शाती है, जिसकी जांच की जा रही है। नीरज कुमार ने निष्कर्ष निकाला, यह हादसा स्पष्ट रूप से सुरक्षा निर्देशों की घोर अवहेलना का परिणाम है। हम खदान में काम करने वाले सभी जिम्मेदारों मालिकों, प्रबंधकों और पर्यवेक्षकों की जवाबदेही तय करने के लिए विस्तृत जांच कर रहे हैं। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए हम पूरे अंचल में सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करेंगे। डीजीएमएस के वक्तव्य और प्रारंभिक जांच के आधार पर, पुलिस ने खदान मालिक समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर लिए हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की गई है। प्रदेश सरकार ने भी मृतकों के परिजनों को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।डीजीएमएस और मजिस्ट्रियल जांच दोनों जारी हैं, ताकि इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार सभी लोगों को सजा दिलाई जा सके और सोनभद्र के खनन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित किया जा सके।

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