गठिया, ल्यूपस का शीघ्र पता लगाएगी नई एआई तकनीक

नई दिल्ली, 8 जनवरी (आईएएनएस)। एक शोध में यह बात सामने आई है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक ऑटोएंटीबॉडी बीमारियों, जैसे रुमेटॉइड आर्थराइटिस और ल्यूपस का शीघ्र पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ज्यादा रिस्क वाले रोगियों को इससे लाभ मिल सकता है।

ऑटोइम्यून बीमारियों वाले लोगों में प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से उनके शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं और टिशू पर हमला करती है। इससे टाइप 1 डायबिटीज, मल्टीपल स्केलेरोसिस, ल्यूपस और रुमेटीइड गठिया शामिल हैं।

पेन स्टेट कॉलेज ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं के नेतृत्व वाली टीम ने कहा कि इसका शुरू में पता लगाना बेहद जरुरी है इससे उपचार और बेहतर रोग प्रबंधन में सुधार हो सकता है।

मशीन लर्निंग (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ) का उपयोग करते हुए टीम ने एक नई विधि विकसित की है जो प्रीक्लिनिकल लक्षणों वाले लोगों में ऑटोइम्यून रोग की प्रगति की भविष्यवाणी कर सकती है।

इन बीमारियों के अक्सर डायग्नोज से पहले एक प्रीक्लिनिकल चरण शामिल होता है जो हल्के लक्षणों या रक्त में कुछ एंटीबॉडी द्वारा पहचाना जाता है।

जेनेटिक प्रोग्रेसन स्कोर या जीपीएस नाम की यह विधि प्रीक्लिनिकल से रोग चरणों तक की प्रगति की भविष्यवाणी कर सकती है।

शोघ में टीम ने रुमेटीइड गठिया और ल्यूपस की प्रगति की भविष्यवाणी करने के लिए वास्तविक दुनिया के डेटा का विश्लेषण करने के लिए जीपीएस का उपयोग किया।

मौजूदा मॉडलों की तुलना में यह पद्धति हल्के लक्षणों को निर्धारित करने में 25 से 1,000 प्रतिशत अधिक सटीक पाई गई।

पेन स्टेट कॉलेज ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर, डेजियांग लियू ने कहा, ”अधिक प्रासंगिक जनसंख्या को टारगेट कर इस बीमारी की हिस्ट्री वाले लोगों या जो शुरुआती लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं, उनके लिए हम मशीन लर्निंग का उपयोग कर परेशानी का हल निकाल सकते हैं।

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लियू ने कहा कि जीपीएस का उपयोग करके रोग की प्रगति का सटीक पूर्वानुमान लगाने से उपचार को आसान बनाया जा सकता है।

-आईएएनएस

एमकेएस/केआर

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