समावेशी शिक्षा के गढ़ एएमयू को सांप्रदायिक शरारत के गड्ढे से बचाने की जरूरत : मुख्तार अब्बास नकवी

नई दिल्ली, 9 नवंबर (आईएएनएस)। पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने शनिवार को आईएएनएस से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने, सुप्रीम कोर्ट द्वारा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) का अल्पसंख्यक दर्जा बरकरार रखने के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) का अल्पसंख्यक दर्जा बरकरार रखने के फैसले पर भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने आईएएनएस से कहा कि कोई इंस्टीट्यूट केवल अल्पसंख्यक ही नहीं बल्कि अनुकरणीय होना चाहिए। एएमयू का अपना शानदार इतिहास है। लेकिन इस शिक्षा के गढ़ को सांप्रदायिकता के गड्ढे से बचाने की जरूरत है।

उन्होंने आगे कहा कि अलीगढ़ विश्वविद्यालय कोर्ट का मेंबर मैं कई बार रहा हू्ं, अच्छी तरह याद है कि वहां पर सबसे पहले ग्रेजुएशन जिन्होंने किया, वो डॉ. उपाध्याय थे। इसके अलावा आज भी 60 प्रतिशत से ज्यादा मेडिकल और लगभग इतने ही बीटेक में जो छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, वो गैर-मुस्लिम या गैर-अल्पसंख्यक हैं। इसलिए समावेशी शिक्षा के गढ़ को सांप्रदायिक शरारत के गड्ढे से बचाना चाहिए।

इसके अलावा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ को लेकर भाजपा नेता ने कहा, “पूरी दुनिया में संकट के दौर में जिस तरीके से युद्ध का हाहाकार मचा हुआ है, उस दौर में भारत एक संकटमोचक की भूमिका में सामने दिखाई दे रहा है।”

लोगों को विश्वास है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया के संकट के समय पर संकटमोचक की भूमिका में मजबूती से खड़ा है। पुतिन के अलावा कई देशों के राष्ट्रीय अध्यक्षों ने भी इस बात को कहा है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया में उभरती हुई महाशक्ति है।

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कर्नाटक की योगा टीचर के साथ हुए अपराध को लेकर मुख्तार अब्बास नकवी ने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी पूरी दुनिया का ठेका लेकर घूमती है। वह कहती है कि महिलाओं, दलितों, अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय हो रहा है, लेकिन जिन राज्यों में जनता ने उनको जनादेश दिया है, वहां के क्या हाल हैं, उसके बारे में कांग्रेस पार्टी कोई बात नहीं करती।

जेपीसी की बैठक को लेकर हो रहे हंगामे पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा बहिष्कार के पीछे की एक ही मंशा है कि वो वक्फ जैसे मुद्दे पर कोई बात या चर्चा नहीं करना चाहते, बल्कि बहिष्कार करना चाहते हैं। वक्फ को संवैधानिक सुधार के दायरे में लाना वक्फ और वक्त दोनों के लिए जरूरी है।

–आईएएनएस

एससीएच/एएस

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