15 से 18 तक प्रतिदिन होंगी स्लोवाकिया और वियतनाम के लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां
“अंतरराष्ट्रीय जनजाति भागीदारी उत्सव” का उद्घाटन आज सुबह 8 बजे मुख्यमंत्री करेंगे

मीडिया हाउस न्यूज एजेन्सी लखनऊ-जनजाति विकास विभाग उत्तर प्रदेश, उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान और उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी द्वारा आयोजित लोक नायक बिरसा मुण्डा की जयंती “जनजातीय गौरव दिवस” के अवसर पर आयोजित “अंतरराष्ट्रीय जनजाति भागीदारी उत्सव” का उद्घाटन सुबह आठ बजे उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अकादमी परिसर में किया जाएगा। उसके उपरांत सांस्कृतिक शोभायात्रा सुबह 11 बजे गोमतीनगर स्थित 1090 चौराहे से शुरू होकर आयोजन स्थल संगीत नाटक अकादमी तक जाएगी। इसके साथ ही प्रतिदिन शाम पांच से रात नौ बजे तक विभिन्न आदिवासी जनजातियों के सतरंगी कार्यक्रम होंगे। इस क्रम में 15 से 18 नवम्बर तक स्लोवाकिया और वियतनाम के लोक कलाकारों की विशेष प्रस्तुतियां भी होंगी।
उद्घाटन समारोह में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री उत्तर प्रदेश जयवीर सिंह, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण असीम अरुण और राज्य मंत्री, समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग, संजीव कुमार गोंड की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी ने बताया कि इस अवसर पर संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मेश्राम, समाज कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम और संस्कृति निदेशालय के सचिव शिशिर जी भी उपस्थित रहेंगे।
उद्घाटन संध्या के दिन 15 नवम्बर को गुजरात का सिद्धि धमाल नृत्य, जम्मू कश्मीर का मोंगों नृत्य-बकरवाल, सिक्किम का सिंघी छम नृत्य, ओडिशा का घुड़का नृत्य, महाराष्ट्र का सांघी मुखौटा नृत्य, छत्तीसगढ़ माटी मंदरी नृत्य, राजस्थान का लंगा मांगणीयार नृत्य और तेरहताली नृत्य, कर्नाटक का फुगड़ी-सिद्धि नृत्य, मध्य प्रदेश का रमढोल नृत्य, उत्तर प्रदेश का लोकप्रिय गरदबाजा, नगमतिया नृत्य, चंगेली नृत्य और बीन वाद्य का मंचीय प्रदर्शन देखने को मिलेगा। जिनसे यह आकर्षक कार्यक्रम देखने छूट जाएंगे वह दोबारा इनका आनन्द 16 नवम्बर को उठा सकेंगे। इस क्रम में 16 नवम्बर को क्रान्तिकारी बिरसा मुण्डा का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान विषयक संगोष्ठी का आयोजन भी किया जाएगा। यह संगोष्ठी दोपहर 12 बजे से अकादमी परिसर के कान्फ्रेंस हॉल में होगी। इसके साथ ही लोग चाय चौपाल, कुल्हड़ चाट, भुने आलू, फर्रुखाबादी नमकीन सहित अन्य व्यंजनों का स्वाद भी ले सकेंगे।
इस अंतरराष्ट्रीय भागीदारी उत्सव में गुजरात, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र, सिक्किम, उड़ीसा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, गोवा, केरल, हिमाचल प्रदेश, असम, त्रिपुरा झारखंड, पंजाब, उत्तर प्रदेश सहित 22 राज्यों के 600 से अधिक कलाकार अपने पारंपरिक नृत्य, संगीत, परिधान, वाद्य यंत्रों आदि का प्रदर्शन करेंगे। इसके अतिरिक्त आयोजन में हस्तशिल्प के 100 से अधिक स्टॉल लगाए जा रहे हैं जहाँ उत्तराखंड से एंब्रॉयडरी, हैंडलूम चादर, मध्य प्रदेश से बीड ज्वेलरी, लेदर शिल्प, चंदेरी साड़ी, पीतल की मूर्ति, वुडेन वर्क, महेश्वरी साड़ी, पश्चिम बंगाल से धान ज्वेलरी, टेराकोटा, कांथा साड़ी, बिहार से मधुबनी पेंटिंग, टिकुली, सिक्की वर्क, तेलंगाना से हैदराबादी मोती शिल्प, केरल से कॉटन सिल्क, उड़ीसा से पिपली वर्क, संबलपुरी साड़ी, कोटिकी साड़ी, हरियाणा से मोढ़ा शिल्प, राजस्थान की लाख की चूड़ियां, गोटा पट्टी, स्टोन पेंटिंग, महाराष्ट्र से कोल्हापुरी चप्पल, म्यूरल वुडन पेंटिंग, कोसा सिल्क साड़ी व ड्रेस मटेरियल तथा उत्तर प्रदेश से खुर्जा पाट्री, ब्रास वर्क, बनारसी साड़ी, सुपारी के खिलौने तथा गाय के गोबर से बने उत्पाद, “द ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया”और प्रधानमंत्री वनधन केन्द्रों में निर्मित उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहेंगे। इसके साथ ही “पोथी घर”, जनजाति कवि सम्मेलन और नाटकों का भी प्रदर्शन किया जाएगा।
इस उत्सव में प्रतिदिन चाय चौपाल, कुल्हड़ चाट, भुने आलू, फर्रुखाबादी नमकीन का आनन्द उठाया जा सकेगा। “अंतरराष्ट्रीय भागीदारी उत्सव” के अनुरूप परिसर को भी पारंपरिक ग्रामीण शैली से अलंकृत किया जा रहा है। इस उत्सव परिसर की आंतरिक सज्जा, हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से आईं मनीषा ठाकुर संभाल रही हैं। वह पराली और टाट के बोरे से स्टॉल्स सजा रही हैं। बताते चले कि वह मिट्टी, गोबर, गौमूत्र, भूसा, नीम का पानी और हल्दी के मिश्रण से पारंपरिक मिट्टी के घर बनाने में महारत हासिल कर चुकी हैं। उनके अनुसार भट्टी के बजाए धूप में पकने और चूना मसाले के कारण ऐसे मिट्टी के पारंपरिक घरों की आयु साठ साल तक होती है। कम खर्च में तैयार होने के साथ-साथ यह घर तापमान भी नियंत्रित रखते हैं। इसके साथ ही परिसर के प्रवेश मार्ग पर दीवारों और मंच पर गेरुआ और सफेद रंग से पारंपरिक चित्रकारी करने के लिए खासतौर से फिरोजाबाद से संतोष सिंह जादौन आए हैं। साल 2019 में आयोजित कुंभ में उन्हें राज्य ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता में सम्मानित भी किया जा चुका है।
आज भी उनकी दो साधुओं वाली पेंटिंग अकादमी संग्रह में है। श्री वार्ष्णेय कॉलेज, अलीगढ़ से परास्नातक, संतोष इस परिसर की सज्जा, वर्ली आर्ट और ग्रामीण चित्रकारी से कर रहे हैं। मंच पर जहां ग्रामीण वृद्धजन और भित्तिचित्र उकेरती महिलाओं को दर्शाया गया। दूसरी ओर उत्सव के प्रवेश मार्ग पर बनी ट्रेडिशनल आर्ट वॉल पर दरवाजे खिड़की, ओखले के साथ-साथ जो भित्ति चित्र उकेरे जा रहे हैं उनमें खासतौर से फिरोजाबादी शैली में शीशों की सजावट भी की जाएगी। इसे मणिकुट्टम शैली की कलाकारी कहा जाता है। इस में दीपकों की भी रचनात्मक सजावट की गई है। विनोद वर्मा इस सजावट में उनका साथ दे रहे हैं। इसमें संतोष एक्रेलिक रंगों का प्रयोग कर रहे हैं। मुख्य रूप से गेरुआ और पिसे चावल के सफेद जैसे रंगों का प्रयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही आवश्यकता के अनुरूप सतरंगी चित्रकारी भी की जाएगी। उन्होंने बताया कि मुख्य रूप से वर्तमान में वह आगरा मंडल में टीचिंग लर्निंग मटेरियल तैयार कर रहे हैं। दूसरी ओर मध्य प्रदेश के सिंगरौली निवासी दीपक बसोर बांस की एक से बढ़कर एक कलाकृतियां लाएं हैं। दीपा सिंह फूलों और अनाज की रंगोली बना रही है वहीं भास्कर विश्वकर्मा सेंड आर्ट का हुनर दर्शाएंगे।










