कारीगर समुदाय और लोक-कलाकारों का कल्याण हमारी प्राथमिकता : मनोज सिन्हा

जम्मू, 1 मार्च (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को कश्मीर हाट में श्रीनगर हेरिटेज फेस्टिवल में हिस्सा लिया।

अपने संबोधन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस फेस्टिवल में हिस्सा लेने वाले सभी कारीगरों और कलाकारों को बधाई दी और जिला प्रशासन श्रीनगर और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए), क्षेत्रीय केंद्र जम्मू-कश्मीर की संयुक्त पहल की सराहना की।

उन्होंने कहा कि श्रीनगर हेरिटेज फेस्टिवल हमारे महान कारीगरों, लोक कलाकारों, लेखकों की उपलब्धियों और योगदान को याद करता है और हमारी अनूठी और विविध सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करता है जो भविष्य के विकास को प्रेरित करेगी। विरासत का संरक्षण और प्रचार हमारे शहरों के सतत विकास और जीवन की शहरी गुणवत्ता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है। कारीगर समुदाय और लोक-कलाकारों का कल्याण मेरे प्रमुख उद्देश्यों में से एक है।

उपराज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत को पुनर्जीवित करने और नागरिकों, विशेषकर कला, शिल्प और संस्कृति की दुनिया से जुड़े लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के अपने संकल्प को दोहराया।

उन्होंने कहा, “कारीगर समुदाय और लोक-कलाकारों का कल्याण मेरे प्रमुख उद्देश्यों में से एक है। मैं यह भी देखना चाहता हूं कि हर बच्चा जड़ों से जुड़ा हो और कारीगर समुदाय की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने वाला हर युवा जम्मू-कश्मीर की आर्थिक वृद्धि में योगदान करने के लिए सशक्त हो।”

उपराज्यपाल ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में, सुनियोजित नीतियों और उनके समयबद्ध कार्यान्वयन ने यह सुनिश्चित किया है कि हमारे शिल्पकारों, कारीगरों और कलाकारों को समृद्ध और फलने-फूलने के लिए बेहतर संसाधन और अवसर प्रदान किए जाएं।

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उन्होंने कहा, “शहरों के सतत विकास और शहरी जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए विरासत का संरक्षण और संवर्धन महत्वपूर्ण है। मेरा मानना है कि संस्कृति जीवन जीने का एक तरीका है और हमें सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत की रक्षा के लिए अपनी समृद्ध विरासत के उत्तराधिकारियों, युवा पीढ़ियों को शामिल करना चाहिए।”

इस अवसर पर उपराज्यपाल ने “आइकॉनिक वूमन ऑफ जेएंडके” नामक पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने श्रीनगर हेरिटेज फेस्टिवल में हिस्सा लेने वाले छात्रों और कलाकारों को भी सम्मानित किया।

इससे पहले, उन्होंने पारंपरिक गांव, आर्ट गैलरी का दौरा किया और प्रदर्शनियों, खेलों के लाइव प्रदर्शनों और विभिन्न पारंपरिक सांस्कृतिक गतिविधियों को देखा।

–आईएएनएस

एकेएस/एकेजे

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