मुख्यमंत्री.! पर्यावरण, प्रदूषण, भूजल दोहन पर रोक न लगाने वाले विभागीय अधिकारियों पर करे सख्त कार्यवाही.! लगाये जुर्माना.!

मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी 5ता.सोनभद्र/लखनऊ- पर्यावरण प्रदूषण के लिए जिम्मेदार विभागीय अधिकारी है न की जनता.? अधिकारी अगर चाह ले तो बिना नियम कानून के एक प्लांट तक नहीं चल सकता.? खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.? प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री का सख्त आदेश निर्देश भी पर्यावरण दिवस जनपद सोनभद्र में दिखावा बनकर रह गया है.! भ्रष्टाचार व लूट का अड्डा बन गया है प्रदूषण विभाग.! जनता प्रदूषण से त्रस्त है और विभागीय अधिकारी लूटने और एसी में बैठने में मस्त हैं.! पर्यावरण संरक्षण व वृक्षारोपण के नाम पर खुलेआम लूट मची है जीव जंतु जानवर मनुष्य पानी के लिए तड़प रहे हैं.! फिर भी विभागीय अधिकारियों को पर्यावरण प्रदूषण भूजल दोहन की जरा भी चिंता नहीं है.! पर्यावरण प्रदूषण भूजल दोहन करने वाले खनन पट्टा धारकों, क्रशर प्लांटों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर सख्त कारवाई न किया जाना.? विभागीय अधिकारियों व प्रदूषण के लिए गठित निगरानी कमेटी का मौन बने रहना.? खुलेआम प्रदूषण का उड़ना समस्याओं का निस्तारण करने की व्जाय शासन प्रशासन एनजीटी कर्मचारी विभागीय अधिकारियों आदि का हवाला देकर मामले का टाल मटोल किया जाना, गुमराह किया जाना.? वृक्षारोपण व वृक्षों के संरक्षण के नाम पर फॉर्मेलिटी कर धनो के बंदर बांट कर मनुष्य के स्वास्थ्य एवं जीव जंतुओं के जीवन के साथ खिलवाड़ करने वाले विभागीय अधिकारियों एवं गठित कमेटी पर शासन प्रशासन मुख्यमंत्री द्वारा गंभीरता से लेते हुए विभाग व विभागीय अधिकारियों के उपर सख्त कार्रवाई कर दंड लगाया जाना चाहिए.? पर्यावरण प्रदूषण भूजल दोहन के लिए जिम्मेदार विभागीय अधिकारी होते हैं अगर वो नियम कानून के का पालन करायें तो ऐसी स्थिति कभी उत्पन्न नहीं होती.? केंद्र सरकार, राज्य सरकार, एनजीटी, मा.सुप्रीम कोर्ट, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा बार-बार पर्यावरण प्रदूषण को रोके जाने हेतु सख्त कार्रवाई का दिशा निर्देश गाइडलाइन जारी करने के बाद भी पर्यावरण प्रदूषण पर नियंत्रण न होना लोगों के स्वास्थ्य जीवन के साथ खिलवाड़ किया जाना एक गंभीर मुद्दा हुआ चर्चा का विषय बन गया है.! जनपद सोनभद्र/सिंगरौली के कई एरिया व गांव में क्रिटिकल जोन एरिया (अति प्रदूषण युक्त) घोषित होने व बिल्ली मारकंडी खनन क्षेत्र एरिया में भयंकर धूल डस्ट प्रदूषण, भूजल दोहन, पेयजल संकट, अनियंत्रित विस्फोट की गंभीर स्थिति होने के बाद भी विभागीय अधिकारियों द्वारा कार्रवाई न कर टाल मटोल कर प्रदूषण भूजल दोहन जैसे गंभीर मामले को ठंडे बस्ते में डालकर अपना पॉकेट गर्म कर एनओसी जारी कर हजारों जनता के स्वास्थ्य एवं जीवन के साथ खिलवाड़ किया जन चर्चा का विषय बन गया है चर्चा है कि जनपद के लेकर लखनऊ व दिल्ली तक विभागीय अधिकारी मिले हुए हैं.? अधिकारियों को पर्यावरण प्रदूषण भूजल दोहन को रोकने व मनुष्य जीव जंतुओं के हितों कि जरा भी चिंता नहीं है.! चिंता है तो सिर्फ अपने कुर्सी व कमाई की.? जनपद में टीम आने से पहले ही अधिकारियों द्वारा लोगों को अवगत करा दिया जाता है ताकि लोग पहले से ही सतर्क हो जाएं.? अधिकारियों के जाने का लोकेशन मिलते के साथ ही पूरे क्षेत्र की यथा स्थिति बहाल हो जाती है.? जिले के अधिकारी, मंत्री, नेता, जनप्रतिनिधि यह नहीं जानते कि प्रदूषण की कितनी गंभीर स्थिति बनी हुई है.? यहां तक की मुख्यमंत्री के जनपद दौरे के दौरान भी प्रदूषण न उड़े इसके लिए प्लांटो तक को बंद कर दिया जाता है.? अब सभी की नजर मुख्यमंत्री, मा.हाई कोर्ट, एनजीटी की ऊपर टिकी है की पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम होगा या यूं ही क्षेत्र की जनता परिवार बच्चों के साथ 24 घंटे प्रदूषण युक्त वातावरण में जीने को मजबूर होगी.?
सूत्रों की माने तो उद्योग का कोई विरोध नहीं करता, उद्योग लगे व चले, किंतु नियमानुसार चले, ताकि आम जनता को नुकसान न पहुंचे, लोग बीमार न हो, लोगों को रोजगार मिले, स्वच्छ वातावरण में अपने परिवार बच्चों के साथ जीवन यापन कर सके, जिसके लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार, एनजीटी द्वारा सख्त पहल किया जा रहा है ताकि पर्यावरण प्रदूषण पर रोक लग सके।
सूत्रों की माने तो सोनभद्र जिले में काफी समय से प्रदूषण अधिकारी (RO) का पद खाली चल रहा है, प्रदूषण की क्षेत्र में गंभीर समस्या है.! अधिकारी का रेगुलर ऑफिस में न बैठना व मिलना.! गायब रहना या पद रिक्त होना जिले में चर्चा का विषय बन गया है आखिर कब तक विभाग में RO सोनभद्र अधिकारी की नियुक्ति होगी.!










