सूख रही व सिल्ट से भरी हुई सवा सौ से अधिक नदियों का जीर्णाेद्वार कर किया पुनर्जीवित

मीडिया हाउस न्यूज एजेन्सी सोनभद्र-नदियाँ धरती के जीव-जन्तुओं, पौधों, मानव जीवन, जंगल प्राकृतिक सम्पदा आदि समस्त प्राकृतिक सौन्दर्य की जीवनरेखा और पोषक अमूल्य रत्न है। नदियों के किनारे मानव सभ्यता एवं सांस्कृतिक विरासत का विकास हुआ है। नदियाँ प्राकृतिक परिसम्पत्तियों के रूप में महत्वपूर्ण है। देश की कृषि, आर्थिक विकास, व्यापार और पर्यटन के लिए नदियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आदिकाल से अबतक नदियाँ पृथ्वी के समस्त प्राकृतिक, सामाजिक आर्थिक एवं सांस्कृतिक विरासत की पोषक रही है। नदियों के किनारे भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति विकसित एवं फली-फूली है। उत्तर प्रदेश में नदियों के किनारे बड़े-बड़े नगरो का विकास हुआ है। प्रदेश की प्रमुख नदियाँ गंगा, यमुना, घाघरा, गोमती, सोन, केन, वेतवा, रामगंगा, गंड़क, राप्ती आदि महत्वपूर्ण है जो प्रदेश के विभिन्न भागों से होकर बहती है और एक प्रमुख जल निकासी का नेटवर्क बनाती है तथा मिट्टी को उपजाऊ, पेयजल की पूर्ति तथा नगरों, गाँवों के विकास में पूरा योगदान देती है। इन नदियों का राज्य की भौगोलिक स्थिति, अर्थव्यवस्था प्राकृतिक भू-आकृतियों की विविधता व्यापार और औद्योगिक विकास के लिए प्रमुख स्थान है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने सूखी नदियों के पुनर्जीवित करने की नीति के तहत अनेको नदियों को पुनर्जीवित किया है। प्रदेश सरकार ने सूख रही व सिल्ट से भरी हुई सवा सौ से अधिक नदियों का जीर्णाेद्वार/पुनर्जीवित किया है। जिसमे प्रमुख रूप से जनपद जालौन की नून नदी, बाराबंकी की कल्यानी नदी, चित्रकूट की मन्दाकिनी नदी, अलीगढ़ की सेंगर नदी, ललितपुर की ओड़ी नदी, जौनपुर की कुँवर नदी, कानपुर देहात की पाँडु नदी, गोंडा की मनवर नदी, वाराणसी की नाद एवं वरूणा नदी, फिरोजाबाद की सिरसा नदी, इटावा की पुरहा नदी, हरदोई की सई नदी, अयोध्या की तमसा नदी आदि है। इन सभी नदियों की सिल्ट सफाई करा कर प्राकृतिक रूप में लाने से क्षेत्र के लाखों किसानों आमजनता को लाभ मिला है। साथ ही जीव जन्तुओं पशु-पक्षियों को पीने का पानी, पेड़-पौधों को विकसित होने तथा हरियाली बढ़ाने में काफी मददगार साबित हुई है।

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राप्ती नदी जनपद गोरखपुर में ग्राम रूदाइन मझगांवा तहसील बांसगांव एवं ग्राम सेमरौना तहसील चौरीचौरा के पास दो भागों गुर्रा एवं राप्ती में विभक्त हो जाती है। इस स्थल से सचौली ग्राम तक राप्ती नदी की कुल लम्बाई 69 किमी० एवं गुर्रा नदी की लम्बाई 44 किमी0 है। राप्ती नदी उक्त स्थल पर अलग होकर जनपद गोरखपुर के चौरीचौरा एवं बांसगांव तहसील के 27 ग्रामों एवं जनपद देवरिया के रूद्रपुर तहसील के 06 ग्रामों के किनारे से प्रवाहित होकर पुनः दोनों नदी देवरिया के सचौली ग्राम के पास मिल जाती है।

ग्रीष्म ऋतु में राप्ती नदी ग्राम रूदाइन महागांवा एवं सेमरौना से लेकर देवरिया के सचौली ग्राम तक लगभग सूख जाती है। नदी के सूखने के कारण उक्त क्षेत्र के भू-गर्भजलस्तर, जलीय जीव-जन्तु, पशु-पक्षी एवं नदी के किनारे आवासित आबादी एवं कृषकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। बाढ़ अवधि में दोनो नदी गुर्रा एवं राप्ती में डिस्चार्ज का बंटवारा समानुपातिक नहीं होने के कारण गुर्रा नदी के दोनों किनारों पर निर्मित तटबंधों पर भारी दबाव बने रहने तथा जन-धन की भारी क्षति होने की सम्भावना बनी रहती थी। राप्ती नदी के पुनरूद्धार से ग्रीष्म ऋतु में हो रहा लाभः-राप्ती नदी जो लगभग सूख चुकी थी। उसके पुनरूद्धार का कार्य होने के उपरान्त यह नदी पुनः अपने प्राकृतिक रूप में अविरल रूप से प्रवाहित होने लगी है। राप्ती नदी में अविरल प्रवाह होने से जनपद गोरखपुर के बांसगांव एवं चौरीचौरा तहसील के 27 ग्राम एवं जनपद देवरिया के रूद्रपुर तहसील के 06 ग्राम सहित कुल 33 ग्रामों के भू-गर्भ जलस्तर में बढ़ोत्तरी हुई है तथा 60,000 कृषकों एवं पशु-पक्षियों के साथ नदी में रहने वाले जलीय जीव-जन्तु को भी लाभ प्रप्त हो रहा है।

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दोनों नदियों में समानुपातिक प्रवाह होने से गुर्रा नदी के दोनों किनारों पर जनपद गोरखपुर के चौरीचौरा तहसील के 20 ग्रामों एवं जनपद देवरिया के रूद्रपुर तहसील के 06 ग्रामों सहित कुल 26 ग्रामों की कुल 35,000 कृषकों एवं लाखों की आबादी को बाढ़ से होने वाली जन-धन की क्षति से बचाव आगामी आने वाली बाढ़ से होगा। प्रदेश के सिंचाई विभाग द्वारा नदियों के दोनों किनारों पर निर्मित तटबंधों एवं कटाव निरोधक कार्य भी बाढ़ अवधि में सुरक्षित रहने से निरन्तर आगामी वर्षों में तटबंध से जन-धन को पूरी सुरक्षा मिलेगी। बाढ़ अवधि के उपरान्त दोनों नदियां अपने क्रास सेक्शनल एरिया के अनुरूप प्रवाहित होगी, जिससे कि दोनों नदियों में अविरल प्रवाह बने रहने की पूर्ण सम्भावना है।

उत्तर प्रदेश कि छोटी गण्डक एक घुमावदार भूजल आधारित नदी है जो नेपाल राष्ट्र के परसौनी जनपद-नवलपरासी से उद्गमित होकर भारत राष्ट्र में लक्ष्मीपुर खुर्द ग्राम सभा जनपद-महराजगंज उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती है। यह नदी महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया जनपदों में 250 किमी० की लम्बाई में बहती हुई अनन्तः बिहार राज्य के सीवान जिले के गोठानी के पास घाघरा नदी में मिल जाती है। छोटी गण्डक के भारत राष्ट्र में प्रवेश करने के उपरान्त प्रारम्भ के लगभग 10 किमी0 लम्बाई में अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका था। जिसके कारण नदी सेक्शन पूर्णतः सिल्टेड व संकुचित हो गयी और क्षेत्रीय लोग उस क्षेत्र पर कृषि कार्य करने लगे।
प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल नेतृत्व में सिंचाई विभाग द्वारा नदी का पुर्नजीवित करने हेतु प्रयास किये गये, जिसके क्रम में नदी के सेक्शन की पुर्नस्थापना का कार्य प्रारम्भ किया गया। नदी को मूल स्वरूप में लाने की प्रक्रिया के दौरान ही नदी का भूजल स्तर प्राकृतिक रूप में आने लगा और विभाग द्वारा की गई पहल कारगर व सफल साबित हुई। इस नदी की सिल्ट, गाद, झाड़ आदि की साफ-सफाई कराकर नदी को उसके प्राकृतिक स्वरूप में लाया गया। नदी में अविरल जल प्रवाहित होने से क्षेत्र के कृषकों, जीव-जन्तुओं, पशु-पक्षियों और आम जन को फायदा मिल रहा है।

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