अरुणाचल टाइगर रिजर्व के 57 कैजुअल स्टाफ 106 दिन बाद बहाल

ईटानगर, 15 अगस्त (आईएएनएस)। अरुणाचल प्रदेश के तीन बाघ अभयारण्यों में से एक, नामदाफा नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व (एनएनपी और टीआर) के 57 कैजुअल कर्मचारियों को उनकी सेवाएं समाप्त होने के साढ़े तीन महीने बाद बहाल कर दिया गया है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि विभिन्न पदनामों के 57 आकस्मिक कर्मचारियों को ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत 14 अगस्त से बहाल कर दिया गया है और उनकी नियुक्ति 31 मार्च, 2025 तक वैध रहेगी।

यह आदेश फील्ड डायरेक्टर वी.के. जवाल द्वारा जारी किया गया है। जवाल ने कहा कि 2024-25 वित्तीय वर्ष के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की वार्षिक संचालन योजना के अनुमोदन के अनुसार 22 महिलाओं और सात पूर्व सैनिकों सहित 57 कर्मचारियों को बहाल किया गया है।

इसके अतिरिक्त आदेश में बताया गया है कि यह नियुक्ति विभाग के भीतर किसी भी पद पर नियमित नियुक्ति की गारंटी नहीं देती है।

एनएनपी और टीआर में बाघों और अन्य वनस्पतियों और जीवों के संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करने के लिए 2023-24 के दौरान एनटीसीए के ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ कार्यक्रम के तहत 57 कर्मचारियों की भर्ती की गई थी।

अधिकारी के अनुसार प्रधान मुख्य वन संरक्षक द्वारा 1 मई को जारी उनकी समाप्ति के आदेश में छंटनी का कारण “फंड की कमी” बताया गया है।

इस निर्णय से व्यापक असंतोष फैल गया, इससे प्रभावित कर्मचारियों द्वारा शिकायतों और विरोध प्रदर्शनों की एक श्रृंखला शुरू हो गई।

म्यांमार की सीमा से लगे चांगलांग जिले में 1,985 वर्ग किमी में फैले नामदाफा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व को अक्सर सीमा पार से शिकारियों से चुनौती का सामना करना पड़ता है।

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नामदाफा एक नदी का नाम है, जो दाफाबुम से निकलती है और नोआ-देहिंग नदी से मिलती है। यह नदी राष्ट्रीय उद्यान के ठीक उत्तर-दक्षिण दिशा में बहती है और इसलिए इसे नामदाफा नाम दिया गया है।

नामदाफा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व को 1983 में भारत का 15वां बाघ रिजर्व घोषित किया गया था, जब इसका दर्जा वन्यजीव अभयारण्य से बढ़ाकर राष्ट्रीय उद्यान कर दिया गया था।

अरुणाचल प्रदेश में कमलांग टाइगर रिजर्व, और पक्के टाइगर रिजर्व दो और बाघ अभयारण्य हैं।

–आईएएनएस

एकेएस/सीबीटी

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