पीएम मोदी ने वारसॉ में नवानगर के जाम साहब को दी श्रद्धांजलि तो शाही परिवार के वंशज ने लिखा इमोशनल नोट

नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। जामनगर राजघराने के वंशज जाम साहब शत्रुशल्य सिंहजी जडेजा ने बुधवार को पोलैंड में उनके विस्तारित परिवार के साथ बातचीत करने और वारसॉ में जाम साहब नवानगर स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया।

उन्होंने एक लिखित बयान में कहा कि प्रधानमंत्री यह “विवेकपूर्ण भाव” ‘अच्छे महाराजा’ दिग्विजय सिंहजी रणजीत सिंहजी जडेजा की भावना और मानवता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को पोलैंड पहुंचने के बाद वारसॉ में डोबरी महाराजा स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नवानगर के जाम साहब दिग्विजय सिंहजी रणजीत सिंहजी जडेजा के दयालुता के उल्लेखनीय कार्य के सम्मान में बनाया गया है। डोबरी महाराजा का मतलब होता है अच्छा महाराजा।

यह प्रतिमा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सैकड़ों पोलिश बच्चों को शरण देने के ‘डोबरी महाराजा’ के दयालु भाव के सम्मान में बनाई गई थी, जो भारत और पोलैंड के बीच संबंधों में सबसे अधिक प्रेरक अध्यायों में से एक है और जिसका दोनों देशों के बीच संबंधों पर स्थायी प्रभाव पड़ा है।

अपने संदेश में, जाम साहब शत्रुशल्य सिंहजी जडेजा ने पोलिश लोगों द्वारा झेली गई अकल्पनीय परीक्षाओं और कष्टों के प्रति गहरी श्रद्धा का उल्लेख किया।

उन्होंने यह भी बताया कि विरासत को आगे बढ़ाने तथा भारत और पोलैंड के लोगों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री से दोनों देशों के बीच युवा, छात्र और सांस्कृतिक आदान-प्रदान स्थापित करने पर विचार करने का अनुरोध किया है।

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जब प्रधानमंत्री मोदी वारसॉ पहुंचे, तो ‘भारतीय पोलिश’ भारत-पोलैंड संबंधों के ऐतिहासिक पहलू को याद कर रहे थे, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से दोनों देशों के बीच लोगों के बीच संबंधों का आधार रहा है।

विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) तन्मय लाल ने इस सप्ताह की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी की 21-22 अगस्त की यात्रा की घोषणा करते हुए कहा, “भारत और पोलैंड के बीच एक अनोखा संबंध 1940 के दशक के दौरान द्वितीय विश्व युद्ध के समय से है, जब पोलैंड की छह हजार से ज्यादा महिलाओं और बच्चों ने भारत की दो रियासतों- जामनगर और कोल्हापुर – में शरण ली थी। जैसा कि आप जानते होंगे, नवानगर के जाम साहब ने 1,000 से अधिक पोलिश बच्चों को आश्रय दिया था, और अन्य को कोल्हापुर में शरण दी गई थी।”

जाम साहब दिग्विजय सिंहजी रणजीत सिंहजी जडेजा की याद में एक स्मारक का अनावरण अक्टूबर 2014 में वारसॉ के ओचोटा जिले के गुड महाराजा के चौक पर किया गया था। मोंटे कैसीनो युद्ध स्मारक के पास वलीवडे-कोल्हापुर शिविर की याद में एक और पट्टिका का उद्घाटन नवंबर 2017 में वारसॉ में किया गया था। जाम साहब के नाम पर आठ पोलिश प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों का नाम भी रखा गया है।

पिछले कई दशकों में बड़ी संख्या में पोलिश शरणार्थियों और उनके वंशजों ने वारसॉ में स्मारक बनाकर और यादों को जीवित रखने के लिए वार्षिक कार्यक्रमों का आयोजन करके भारत के दो शाही परिवारों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है।

एसोसिएशन ऑफ पोल्स इन इंडिया, जो जामनगर और कोल्हापुर के महाराजाओं द्वारा स्थापित दो शिविरों में 1942 और 1948 के बीच रहने वाले सभी पोलिश लोगों को फिर से जोड़ता है, दो साल में एक बार दोनों शाही परिवारों और भारत के लोगों के प्रति अपनी कृतज्ञता और स्नेह को याद करने और दोहराने के लिए मिलता है।

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–आईएएनएस

एकेजे/

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