Bhojpuri Kavi Sammelan 2026: भोजपुरी भाषा की मिठास से गूंजा कवि सम्मेलन! दुबई से बिहार तक के कवियों ने छठ गीतों से बांधा समां

Bhojpuri Kavi Sammelan 2026 :
Bhojpuri Kavi Sammelan 2026 : भोजपुरी भाषा की मिठास और छठ गीतों की गूंज से सजी साहित्यिक शाम! ‘हमार भोजपुरी भाषा’ का भव्य आभासी कवि सम्मेलन संपन्न, देश-विदेश के कवियों ने बांधा समां
Bhojpuri Kavi Sammelan 2026: भोजपुरी साहित्य और लोक संस्कृति को समर्पित रहा ‘उगा हो सूरजदेव’ कवि सम्मेलन, बोकारो से दुबई तक जुड़े साहित्यकार; भोजपुरी भाषा की प्रतिष्ठा, संरक्षण और संवर्धन का लिया संकल्प
Bhojpuri Kavi Sammelan 2026 : भोजपुरी भाषा की मिठास, लोक संस्कृति की सुगंध और छठ महापर्व की आध्यात्मिक भावना से सराबोर एक विशेष साहित्यिक आयोजन में देश-विदेश के कवियों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मन मोह लिया। छठ पर्व के पावन अवसर पर ‘हमार भोजपुरी भाषा’ संस्था की ओर से आयोजित आभासी भोजपुरी कवि सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कवि सम्मेलन का विषय ‘उगा हो सूरजदेव’ रखा गया था। 1 नवंबर 2026 को रात 8 बजे Google Meet के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ विदेश से भी भोजपुरी साहित्यकारों और कवियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम में भोजपुरी भाषा, साहित्य, लोक परंपराओं और छठ गीतों की महत्ता पर विशेष चर्चा हुई। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से छठी मईया की महिमा, सूर्य उपासना, लोक आस्था और भोजपुरी संस्कृति की समृद्ध परंपरा को जीवंत कर दिया। इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि भोजपुरी केवल बातचीत की भाषा नहीं, बल्कि अपनी विशिष्ट साहित्यिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक संस्कारों से जुड़ी एक समृद्ध भाषा है।
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Bhojpuri Kavi Sammelan 2026 : देश-विदेश के साहित्यकारों की मौजूदगी ने बढ़ाई कार्यक्रम की शोभा
‘हमार भोजपुरी भाषा’ संस्था द्वारा आयोजित इस आभासी कवि सम्मेलन में भोजपुरी के प्रतिष्ठित विद्वान द्वारिका नाथ तिवारी, बोकारो मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं पूर्व सैन्य अधिकारी एवं साहित्यप्रेमी चिदानंद पाण्डेय ‘चिद्रूप’, बनारस (उत्तर प्रदेश) ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
कार्यक्रम का कुशल संचालन संतोष कुमार ओझा ‘प्रभाकर’, बाघमारा, धनबाद ने किया। मंच संचालन के दौरान उन्होंने साहित्यिक गरिमा और भोजपुरी भाषा की मिठास को बनाए रखते हुए कवियों को अपनी रचनाएं प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया।
कार्यक्रम में शामिल कवियों ने भोजपुरी और छठ गीतों की ऐसी मनमोहक प्रस्तुतियां दीं कि पूरा साहित्यिक माहौल भक्तिमय और सांस्कृतिक रंगों से भर गया।
Bhojpuri Kavi Sammelan 2026 : भोजपुरी भाषा को अश्लीलता से नहीं, साहित्य और संस्कार से मिलेगी पहचान : द्वारिका नाथ तिवारी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि द्वारिका नाथ तिवारी ने अपने संबोधन में भोजपुरी भाषा की विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भोजपुरी अत्यंत सरस, सरल और प्रतिष्ठित भाषा है। इसकी अपनी समृद्ध साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक पहचान है।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि कुछ लोगों द्वारा भोजपुरी के नाम पर अश्लीलता फैलाकर इस प्रतिष्ठित भाषा को बदनाम करने की नाकाम कोशिश की जा रही है। ऐसी प्रवृत्तियों से भोजपुरी की वास्तविक पहचान प्रभावित होती है।
उन्होंने साहित्यकारों और रचनाकारों से आह्वान किया कि वे अपनी कलम के माध्यम से भोजपुरी भाषा की प्रतिष्ठा को बचाने, आगे बढ़ाने और समृद्ध करने का निरंतर प्रयास करें। भोजपुरी साहित्य में अच्छे गीतों, कविताओं, कहानियों और सांस्कृतिक रचनाओं का सृजन समय की आवश्यकता है।
उनका मानना था कि भोजपुरी की वास्तविक ताकत उसकी मिठास, सरलता, लोक परंपराओं और सामाजिक संस्कारों में छिपी हुई है। इसलिए सभी साहित्यकारों को सकारात्मक और गुणवत्तापूर्ण साहित्य रचने की दिशा में आगे आना चाहिए।
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Bhojpuri Kavi Sammelan 2026 : रेवतीपुर में होगा भव्य भोजपुरी कवि सम्मेलन, नए काव्य संग्रह का भी होगा विमोचन
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व सैन्य अधिकारी चिदानंद पाण्डेय ‘चिद्रूप’ ने भोजपुरी साहित्य के विकास को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि शीघ्र ही अपने पिताजी द्वारा लिखी गई रचनाओं के भोजपुरी काव्य संग्रह के विमोचन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रेवतीपुर में एक भव्य कवि सम्मेलन आयोजित करने की योजना है।
इस आयोजन के माध्यम से भोजपुरी साहित्यकारों और कवियों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने के साथ-साथ नई पीढ़ी को भोजपुरी साहित्य की समृद्ध परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने साहित्यकारों से अपील की कि वे भोजपुरी भाषा और साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर सक्रिय रहें।
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Bhojpuri Kavi Sammelan 2026 : बोकारो में होगा भोजपुरी कवि सम्मेलन, भोजपुरी पत्रिका के प्रकाशन की तैयारी
‘हमार भोजपुरी भाषा’ संस्था के संस्थापक एवं आयोजन संयोजक श्याम कुंवर भारती ने कार्यक्रम के दौरान संस्था की आगामी योजनाओं की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि जल्द ही बोकारो सिटी में एक भव्य भोजपुरी कवि सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही भोजपुरी भाषा और साहित्य को समर्पित एक पत्रिका का प्रकाशन भी प्रारंभ किया जाएगा।
इस पत्रिका के माध्यम से भोजपुरी के नए और पुराने रचनाकारों को अपनी कहानियां, कविताएं, गीत, आलेख और साहित्यिक विचार प्रकाशित कराने का अवसर मिलेगा।
श्याम कुंवर भारती ने अपनी लिखी भोजपुरी कहानी ‘घुरहू के मेहरारू मुखियाइन’ पर भोजपुरी फिल्म निर्माण की योजना बनाने की भी बात कही। यदि यह योजना साकार होती है, तो भोजपुरी साहित्य की एक कहानी को फिल्म के माध्यम से व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 29 नवंबर को जम्मू-कश्मीर में आयोजित होने वाले अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में सभी साहित्यकारों से बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की गई है।
Bhojpuri Kavi Sammelan 2026 : छठ गीतों के संकलन का होगा प्रकाशन, लोक संस्कृति को मिलेगा नया मंच
कार्यक्रम के दौरान श्याम कुंवर भारती ने भोजपुरी लोक संस्कृति की विभिन्न विधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भोजपुरी भाषा की असली पहचान उसके पारंपरिक गीतों और लोक साहित्य में बसती है।
उन्होंने साहित्यकारों से आग्रह किया कि वे भोजपुरी संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए लगातार कहानियां, कविताएं, गीत, आलेख और पुस्तकें लिखते रहें।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि भोजपुरी गीतों की मिठास और उनमें समाहित संस्कारों को बनाए रखना बेहद जरूरी है।
भोजपुरी की प्रमुख लोक विधाओं में निर्गुण, पूर्वी, विवाह गीत, छठ गीत, सोहर, देवी पचरा, लोकगीत, कजरी और चैता गीत शामिल हैं। इन सभी विधाओं में समाज की परंपराएं, पारिवारिक रिश्ते, धार्मिक आस्था, ग्रामीण जीवन और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलती है।
उन्होंने बताया कि जल्द ही भोजपुरी छठ गीतों का एक विशेष संकलन प्रकाशित करने की योजना है। इस संकलन के माध्यम से छठ महापर्व से जुड़े पारंपरिक गीतों और लोक आस्था को साहित्यिक रूप में संरक्षित करने का प्रयास किया जाएगा।
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Bhojpuri Kavi Sammelan 2026 : दुबई से आसाम तक के कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से मोहा मन
इस आभासी भोजपुरी कवि सम्मेलन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेश से भी रचनाकार जुड़े। सभी कवियों ने भोजपुरी भाषा और छठ महापर्व पर आधारित गीतों एवं कविताओं की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से दुर्गा दत्त मिश्रा, दुबई; प्रिंस कुमार ओझा, मुंबई; संजय कुमार ओझा, नई दिल्ली; दिलीप पैनाली, आसाम; इंद्रजीत तिवारी ‘निर्भीक’, बनारस, उत्तर प्रदेश; चिदानंद पाण्डेय ‘चिद्रूप’, बनारस, उत्तर प्रदेश; श्याम कुंवर भारती, बोकारो, झारखंड; संतोष कुमार ओझा ‘प्रभाकर’, धनबाद; डॉ. बैधनाथ प्रिंस, कथारा, बोकारो; श्वेता चौबे, चंपारण, बिहार; नन्द कुमार मिश्र, बिहार तथा द्वारिका नाथ तिवारी ने अपनी रचनाओं और गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
कवियों की प्रस्तुतियों में छठ महापर्व की आस्था, भगवान सूर्य की उपासना, छठी मईया की महिमा और भोजपुरी लोक जीवन की भावनाएं स्पष्ट रूप से दिखाई दीं।
Bhojpuri Kavi Sammelan 2026 : भोजपुरी भाषा के संरक्षण में साहित्यकारों की भूमिका अहम
आज के समय में भोजपुरी भाषा का विस्तार देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी देखने को मिल रहा है। बड़ी संख्या में भोजपुरी भाषी लोग अलग-अलग देशों में रहते हैं और अपनी मातृभाषा एवं संस्कृति से जुड़े हुए हैं। ऐसे में ऑनलाइन कवि सम्मेलन जैसे आयोजन साहित्यकारों को एक मंच पर जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं।
‘हमार भोजपुरी भाषा’ संस्था का यह आयोजन भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया। कार्यक्रम में उठाए गए विचारों से स्पष्ट हुआ कि भोजपुरी भाषा को उसकी वास्तविक पहचान दिलाने के लिए साहित्यिक गुणवत्ता, लोक संस्कृति और पारंपरिक गीतों को प्राथमिकता देना जरूरी है।
भोजपुरी की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए कवि सम्मेलन, साहित्यिक पत्रिका, पुस्तक प्रकाशन और लोकगीतों के संकलन जैसी गतिविधियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
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Bhojpuri Kavi Sammelan 2026 : साहित्य और संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लेकर संपन्न हुआ आयोजन
‘उगा हो सूरजदेव’ विषय पर आयोजित इस आभासी भोजपुरी कवि सम्मेलन ने छठ महापर्व की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भावना को साहित्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। देश-विदेश के कवियों की भागीदारी ने आयोजन को व्यापक स्वरूप दिया।
कार्यक्रम में भोजपुरी भाषा की प्रतिष्ठा बनाए रखने, अश्लीलता से दूर गुणवत्तापूर्ण साहित्य सृजन करने, पारंपरिक लोकगीतों को संरक्षित करने और नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा से जोड़ने का संदेश दिया गया।
संस्था की आगामी योजनाओं में बोकारो में कवि सम्मेलन, भोजपुरी पत्रिका का प्रकाशन, छठ गीतों का संकलन और साहित्यिक रचनाओं को व्यापक मंच उपलब्ध कराना शामिल है।
कुल मिलाकर, ‘हमार भोजपुरी भाषा’ का यह आयोजन भोजपुरी साहित्य और लोक संस्कृति के प्रचार-प्रसार की दिशा में एक सराहनीय पहल रहा। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि भाषा की असली पहचान उसकी मिठास, साहित्य, संस्कृति और संस्कारों से बनती है।
भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से भोजपुरी भाषा की साहित्यिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास जारी रहेगा।
समाचार संबंधी जानकारी
स्रोत एवं प्रेस विज्ञप्ति: प्रिंस कुमार ओझा
पद: सचिव, हमार भोजपुरी भाषा संस्था
कार्यक्रम: आभासी भोजपुरी कवि सम्मेलन
विषय: उगा हो सूरजदेव
आयोजन तिथि: 1 नवंबर 2026
माध्यम: Google Meet
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