भाजपा ने की जम्मू-कश्मीर में फारूक अब्दुल्ला की 'सुरक्षा बलों के बिना शांति' की मांग की आलोचना

नई दिल्ली, 7 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के ‘सुरक्षा बलों के बिना कश्मीर घाटी में शांति लाने’ के आह्वान की आलोचना की, और ऐसे समय में कोई भी ‘विघटनकारी’ बयान देने के प्रति आगाह किया, जब केंद्र शासित प्रदेश में सामान्य स्थिति की वापसी देखी जा रही है।

भाजपा प्रवक्ता शाजिया इल्मी ने आईएएनएस से बात करते हुए कश्मीर घाटी से सेना हटाने के आह्वान पर कड़ी आपत्ति जताई और नेकां प्रमुख को 2019 के बाद हरियाली वाले क्षेत्रों पर ध्यान देने की सलाह दी।

इल्मी ने कहा, “फारूक अब्दुल्ला का बयान समझ से बाहर है। हम सभी जानते हैं कि उनके शासन के दौरान क्या हुआ था। आम कश्मीरियों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया और उनकी आजीविका नष्ट हो गई। अब जब शांति कायम हो गई है, तो वह सेना को हटाने की बात कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “इतने सालों के बाद आखिरकार जम्मू में शांति है। लोग अब लाल चौक पर शांति से घूम सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अनुच्छेद 370 को रद्द करने का कड़ा फैसला लिया, क्योंकि यह देश के लिए जरूरी था।”

एक दिन पहले फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि केंद्र ने कश्मीर घाटी में ‘जबरन’ शांति लाने के लिए सैनिकों की कई बटालिय तैनात की हैं।

उन्होंने मीडियाकर्मियों से कहा, “जाओ, चलो और जम्मू-कश्मीर की सड़कों को देखो। चारों ओर सैनिकों के बिना शांति होनी चाहिए।”

शाज़िया इल्मी ने कथित तौर पर अवैध संपत्ति पर बनी मस्जिद से संबंधित हिमाचल प्रदेश के मुद्दे पर भी कांग्रेस की आलोचना की।

उन्होंने पूछा, “कांग्रेस पार्टी के दोहरे मानदंड हैं। जब उत्तर प्रदेश की बात आती है, तो मामले को हिंदू-मुस्लिम मोड़ दिया जाता है, लेकिन, जब शिमला की संजौली मस्जिद की बात आती है, तो यह एक मंजिल से पांच मंजिल तक चला जाता है। अन्य राज्यों के लिए, वे सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने की कोशिश करते हैं, जबकि उनके द्वारा शासित राज्यों में, अवैध निर्माण वैध निर्माण जाते हैं।”

–आईएएनएस

एसएचके/सीबीटी

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