केंद्र सरकार-रौनियार जाति को केंद्र की ओबीसी की सूची में शामिल करें, राष्ट्रपति प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री को पत्र-डा ए के गुप्ता (रौनियार)

– उत्तर प्रदेश में रौनियार जाति ओबीसी, केंद्र में समान्य, समाज के साथ भेदभाव क्यों.!
– बिहार झारखंड राज्य में केंद्र में ओबीसी, तो यूपी को भी क्यों नही शामिल करती सरकार.!
– केंद्र द्वारा ओबीसी का प्रमाण पत्र जारी न किये जाने से पढ़ने वाले युवा लड़के लड़कियां परेशान.!
Media House सोनभद्र-ऑल इंडिया रौनियार वैश्य समाज सोनभद्र द्वारा महामहिम राष्ट्रपति- नई दिल्ली, प्रधानमंत्री-भारत सरकार नई दिल्ली, केंद्रीय मंत्री-केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली, राज्यपाल-उत्तर प्रदेश लखनऊ, मुख्यमंत्री-उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ, अध्यक्ष-लोकसभा नई दिल्ली अध्यक्ष- राज्यसभा नई दिल्ली, अध्यक्ष-राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग नई दिल्ली को रजिस्टर डाक द्वारा पत्र भेज कर रौनियार जाति को केंद्र की ओबीसी की सूची में तत्काल शामिल किए जाने की मांग केंद्र सरकार व राज्य सरकार से की। उक्त बातें ऑल इंडिया रौनियार वैश्य समाज के संस्थापक/अध्यक्ष डा ए के गुप्ता (रौनियार) ने कही।
रौनियार समाज के संस्थापक/अध्यक्ष डा ए के गुप्ता (रौनियार) ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवास करने वाले रौनियार समाज पिछड़ी जाति (ओबीसी) वर्ग से आता है। सामाजिक शैक्षणिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ा है। किंतु केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश की रौनियार जाति को केंद्र की ओबीसी की सूची में शामिल नही किये जाने से समाज के पढ़ने लिखने एवं एडमिशन लेने वाले युवा लड़के लड़कियां छात्र काफी परेशान हैं। न हीं केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के लोगों को पिछड़ी जाति (ओबीसी) का प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है।
डा ए के गुप्ता (रौनियार) ने कहा कि विभिन्न राज्यों में रौनियार जाति पिछड़ी जाति (ओबीसी अनुच्छेद ।। ) की श्रेणी में आता है। जिसके अधीन राज्य सरकारों द्वारा रौनियार जाति के मौलिक अधिकारों, शिक्षा, रोजगार की गारंटी के लिए ओबीसी प्रमाण पत्र जारी होता है।भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा केंद्रीय सूची में रौनियार जाति को पिछड़े जाति (ओबीसी-अनुच्छेद ।। ) में झारखंड राज्य में क्रमांक नंबर-122 पर और बिहार राज्य में क्रमांक नंबर- 83 रौनियार जाति का लिस्ट में नाम अंकित हैं। झारखंड बिहार राज्यों के लोगों को पिछड़ी जाति (ओबीसी) का केंद्र सरकार द्वारा प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। किंतु सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली की सूची में उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के अधीन जारी सूची (पेज नंबर 33 ) में रौनियार जाति का नाम सम्मिलित नहीं किया गया है, न हीं उत्तर प्रदेश के लोगों को ओबीसी का प्रमाण-पत्र जारी किया जा रहा है जिसके कारण समाज के पढ़ने लिखने वाले, लाखों युवा लड़के लड़कियों को स्कूलों कालेजों में एडमिशन लेने में और सरकारी नौकरी में नियुक्तियों से वंचित रहना पड़ रहा है।
समाज के लोगों के साथ हो रहे भेदभाव को लेकर आल इंडिया रौनियार वैश्य समाज द्वारा केंद्र सरकार, राज्य सरकार, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग नई दिल्ली आदि विभागों को रजिस्टर डाक द्वारा पत्र भेजकर मांग किया कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार की केंद्रीय सूची में रौनियार जाति को भी पिछड़ी जाति के (अनुच्छेद ।। ) में अन्य राज्यों की भांति उत्तर प्रदेश के लोगों को भी तत्काल सूची में शामिल किया जाए ताकि रौनियार जाति के लोगो को भी पिछड़ी जाति (ओबीसी) का प्रमाण पत्र केंद्र सरकार द्वारा जारी हो सके। जिससे समाज के पढ़ने वाले लाखों लडके लडकियों बच्चों का भविष्य उज्जवल व सुरक्षित हो सके और आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े, वंचित समाज के लोगों के समस्याओं का निदान हो सके।










