डीएसआईआर द्वारा समर्थित सीएसआईआर “सीआरटीडीएच एमएसएमई को सशक्त बनाना” विषय पर चिंतन शिविर का उद्घाटन

मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी 15ता.नई दिल्ली-भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के सामान्य अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास केंद्र (सीआरटीडीएच) कार्यक्रम का 2014 में स्थानांतरीय अनुसंधान को प्रोत्साहन देने और उद्योग के बीच सहयोग को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से शुभारंभ किया गया है। इन केंद्रों का प्राथमिक उद्देश्य वैज्ञानिक ज्ञान, विचारों और आविष्कारों एवं विपणन योग्य उत्पादों और सेवाओं के रूप में उनके व्यावहारिक अनुप्रयोग के बीच अंतर दूर करना है। सूक्ष्म, लघु उद्यमों और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), स्टार्ट-अप और इनोवेटर्स को अत्याधुनिक सुविधाओं और संसाधनों तक पहुंच प्रदान करते हुए ये केंद्र अनुसंधान परिणामों को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य समाधानों में बदलने की सुविधा प्रदान करते हैं।

सीआरटीडीएच कार्यक्रम के अंतर्गत, डीएसआईआर ने इलेक्ट्रॉनिक्स/नवीकरणीय ऊर्जा, किफायती स्वास्थ्य, पर्यावरणीय हस्तक्षेप, कम लागत वाली मशीनिंग और नई सामग्री/रासायनिक प्रक्रियाओं जैसे पांच क्षेत्रों में एक ढांचागत इकोसिस्टम तैयार किया  है और पूरे देश में विभिन्न सार्वजनिक वित्त पोषित अनुसंधान संस्थानों (पीएफआरआई) में स्थित 18 सीआरटीडीएच का समर्थन किया है। ये केंद्र उद्योग-संस्था संपर्क को बढ़ावा देने, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों के बीच सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण सामाजिक प्रभावों का सृजन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

“आजादी का अमृत महोत्सव” पहल के एक अंग के रूप में और “आत्मनिर्भर भारत” की यात्रा एवं सीआरटीडीएच और एमएसएमई/स्टार्ट-अप/इनोवेटर्स के बीच संवाद को मजबूत बनाने के लिए, डीएसआईआर ने सभी स्थापित सीआरटीडीएच में “सीआरटीडीएच द्वारा एमएसएमई को सशक्त बनाना” विषय पर चिंतन शिविर आयोजित करने की योजना बनाई है। ये शिविर विभिन्न हितधारकों के साथ गहन विचार-विमर्श और जुड़ाव के एक मंच के रूप में कार्य करेंगे। आईआईटी खड़गपुर, सीएसआईआर-आईआईटीआर, लखनऊ और सीएसआईआर-सीएमईआरआई दुर्गापुर में तीन चिंतन शिविरों का पहले ही आयोजन किया जा चुका है। वर्तमान एक दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन सीआरटीडीएच द्वारा डीएसआईआर के साथ सीएसआईआर-खनिज एवं सामग्री प्रौद्योगिकी संस्थान, भुवनेश्वर (आईएमएमटी) में किया जाएगा।

इस कार्यक्रम का शुभारंभ परियोजना समन्वयक द्वारा अतिथियों और प्रतिनिधियों को स्थापित सीआरटीडीएच सुविधाओं तक पहुँचाने से होगा। इस आयोजन में, डीएसआईआर के सचिव और सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. एन. कलाईसेल्वी एवं सीएसआईआर-आईएमएमटी, भुवनेश्वर के निदेशक डॉ. रामानुज नारायण का उद्घाटन भाषण होगा। चर्चा सत्र की शुरूआत वैज्ञानिक-जी और सीआरटीडीएच प्रमुख, डीएसआईआर डॉ. सुजाता चकलानोबि  द्वारा चिंतन शिविर के अवलोकन के साथ होगा, इसके पश्चात सीएसआईआर-आईएमएमटी, भुवनेश्वर में डीएसआईआर-सीआरटीडीएच का आधिकारिक वीडियो जारी किया जाएगा। कार्यक्रम में डीएसआईआर से डॉ. विपिन सी शुक्ला, डॉ. रणजीत बैरवा और डॉ. सुमन मजूमदार के साथ-साथ पीआई-सीआरटीडीएच के डॉ. यतेंद्र चौधरी भी अपनी टीम के साथ भागीदारी करेंगे। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के प्रतिनिधि और चैंबर्स ऑफ कॉमर्स, उद्योग संघों के प्रतिनिधि भी अपने अनुसंधान एवं विकास प्रयासों में सीआरटीडीएच के लाभों पर चर्चा के लिए इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।

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विषयगत सत्र की शुरूआत डॉ. यतेंद्र चौधरी द्वारा सीएसआईआर आईएमएमटी, भुवनेश्वर में सीआरटीडीएच के अवलोकन के साथ होगी। प्रतिभागी समस्या-समाधान के साधन के रूप में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने पर जोर देने के साथ, एमएसएमई के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। इसका उद्देश्य सरकार के लक्ष्यों के अनुरूप नीतियों, कार्यक्रमों और पहलों के विकास एवं कार्यान्वयन में योगदान देने योग्य नूतन विचारों,  अंतर्दृष्टिकोणों और अभिनव दृष्टिकोण प्राप्त करना हैं। चैंबर्स ऑफ कॉमर्स, उद्योग संघों के प्रतिनिधि अपनी अनुसंधान एवं विकास आवश्यकताओं के अनुरूप एमएसएमई की जरूरत पर भी अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे। इस सत्र के माध्यम से देश में एमएसएमई के लिए अनुसंधान बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकियों, भविष्य की प्रौद्योगिकियों और वर्तमान और भविष्य के अवसरों के साथ एमएसएमई को सशक्त बनाने में सीआरटीडीएच की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। ‘चिंतन शिविर’ के समापन पर, एक ‘संवाद’ की योजना है, जहां एमएसएमई/स्टार्टअप/इनोवेटर्स के समक्ष आने वाली सभी चुनौतियों के बीच, पांच बड़ी चुनौतियों की पहचान की जाएगी और इनका समाधान निकालने के लिए संभावित समाधान तलाशे जाएंगे।

कुल मिलाकर, इस आयोजन का उद्देश्य गहन चर्चा, महत्वपूर्ण विश्लेषण और रणनीतिक योजना के माध्यम से सरकारी अधिकारियों और हितधारकों के संयुक्त ज्ञान, बौद्धिक कार्यकुशलता और विशेषज्ञता का लाभ उठाना है। इसका लक्ष्य देश में एमएसएमई, स्टार्टअप और इनोवेटर्स के सामने आने वाली चुनौतियों के संभावित समाधानों पर विचार-मंथन करना है, साथ ही भारत को औद्योगिक अनुसंधान और विनिर्माण के लिए एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के अवसरों का लाभ उठाना है।

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