स्वास्थ्य कवरेज में तेजी से विस्तार, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, थायरॉइड विकार जैसे गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) में वृद्धि

Media House नई दिल्ली-घरेलू सामाजिक उपभोग – स्वास्थ्य  जनवरी – दिसंबर 2025

  • भारत के स्वास्थ्य कवरेज में तेजी से विस्तार; बीमा अब लगभग आधी आबादी तक पहुंचा
  • संस्थागत प्रसव 96 प्रतिशत तक पहुंचा, जो मातृ देखभाल में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा मजबूत : देशभर में अधिकांश लोग मुफ्त या कम लागत वाले उपचार का लाभ उठा रहे है
  • बीमारियों का पता लगाने में सुधार के साथ रिपोर्ट की गई बीमारियों में वृद्धि, जबकि संक्रामक रोगों में गिरावट आई
  • बीमारियों के बदलते स्वरूप से निपट रहा भारत : संक्रमण में गिरावट, 30 वर्ष से अधिक आयु के बाद जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर विशेष ध्यान

स्नैपशॉट: ए. रुग्णता और अस्पताल में भर्ती:

· लगभग 13.1 प्रतिशत लोगों ने 2025 में अंतिम 15 दिनों की अवधि के दौरान पुरानी बीमारियों सहित किसी न किसी बीमारी से पीड़ित होने की सूचना दी। पिछले एनएसएस स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2017-18) में 7.5 प्रतिशत लोगों ने उसी 15 दिनों की अवधि में बीमारी की सूचना दी थी।

· बुजुर्गों (60 वर्ष या उससे अधिक आयु) में रिपोर्टिंग की दर अधिक थी।

· पिछले 365 दिनों की संदर्भ अवधि के दौरान अस्पताल में भर्ती होने की दर लगभग 2.9 प्रतिशत थी।

· अस्पताल में भर्ती होने की दर 60 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग में सबसे अधिक (8.1 प्रतिशत) थी। युवा आबादी में बच्चों (0-4 वर्ष) में अस्पताल में भर्ती होने की दर सबसे अधिक (3.4 प्रतिशत) थी।

· संक्रामक रोगों की रिपोर्टिंग में 2025 में पिछले एनएसएस सर्वेक्षण (2017-18) में देखे गए स्तरों की तुलना में कमी आई, जबकि उच्च रक्तचाप, मधुमेह और थायरॉइड विकार जैसे गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) में वृद्धि देखी गई।

· बचपन और किशोरावस्था के दौरान संक्रमण और श्वसन संबंधी बीमारियों की सबसे अधिक रिपोर्ट की गई।

· इस आयु वर्ग में अधिकतर बुखार और तीव्र ऊपरी श्वसन संक्रमण आम थे।

सरकार ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार योजना

· हृदय संबंधी और अंतःस्रावी/चयापचयी रोग 30 वर्ष की आयु के बाद सबसे अधिक बार रिपोर्ट किए गए।

· उच्च रक्तचाप और मधुमेह इसके सबसे बड़े कारण थे।

बी. प्रसव: लगभग सर्वत्र संस्थागत प्रसवों की सूचना मिली। पिछले 365 दिनों की अवधि में हुए लगभग 96 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में हुए।

सी. पिछले एनएसएस सर्वेक्षण (2017-18) में दर्ज स्तर की तुलना में स्वास्थ्य बीमा कवरेज का विस्तार हुआ हैजिसमें सरकारी प्रायोजित योजनाओं का योगदान सर्वाधिक है।

ए. परिचय

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने ‘घरेलू सामाजिक उपभोग: स्वास्थ्य’ शीर्षक से स्वास्थ्य सर्वेक्षण के निष्कर्ष जारी किए हैं। यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (एनएसएस) के 80 वें चरण के अंतर्गत जनवरी से दिसंबर 2025 के दौरान आयोजित किया गया था। सर्वेक्षण के कवरेज, नमूना डिजाइन, अवधारणात्मक ढांचा आदि का संक्षिप्त विवरण रिपोर्ट के अंत में दिया गया है।

घरेलू सामाजिक उपभोग: स्वास्थ्य पर किया गया सर्वेक्षण भारत की जनसंख्या में रुग्णता की व्यापकता, परिवारों द्वारा बताई गई बीमारियों की श्रेणी और स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग के तरीकों की जानकारी प्रदान करने वाले अनुभवजन्य आंकड़ों का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इस सर्वेक्षण में एकत्रित आंकड़ों का उपयोग रुग्णता, अस्पताल में भर्ती होने, प्रसव और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं पर परिवारों द्वारा किए गए खर्च के संकेतकों को संकलित करने के लिए किया जाता है।

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (एनएसएस) ने 1950 के दशक में रोग संबंधी प्रारंभिक अध्ययन शुरू किए, जिसके परिणामस्वरूप इसके 28 वें चरण (1973-74) में पहला पूर्ण पैमाने पर रोग सर्वेक्षण किया गया। तब से, वर्तमान सर्वेक्षण (80 वां चरण, 2025) से पहले स्वास्थ्य पर छह और सर्वेक्षण किए जा चुके हैं।

बी. मुख्य निष्कर्ष

  • सर्वेक्षण की तारीख से पहले के पिछले 15 दिनों के दौरान लगभग 13.1 प्रतिशत व्यक्तियों ने बीमारी की सूचना दी (बीमार होने के रूप में जवाब दिया), जहां शहरी क्षेत्रों (14.9 प्रतिशत ) के व्यक्तियों ने ग्रामीण क्षेत्रों (12.2 प्रतिशत ) के व्यक्तियों की तुलना में थोड़ी अधिक बीमारी की सूचना दी।
  • बीमारी की सूचना देने वाले व्यक्तियों का उच्चतम अनुपात 60 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग (43.9 प्रतिशत ) में देखा गया, उसके बाद 45-59 वर्ष की आयु वर्ग (22.5 प्रतिशत ) और 0-4 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चे (9.9 प्रतिशत ) थे।
  • बचपन और किशोरावस्था के दौरान संक्रमण और श्वसन संबंधी बीमारियों की सबसे अधिक रिपोर्ट की गई, जबकि मनोरोग/तंत्रिका संबंधी और गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल संबंधी बीमारियां युवावस्था में चरम पर थीं।
  • हृदय संबंधी (उच्च रक्तचाप) और अंतःस्रावी/चयापचयी (मधुमेह) जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों (एनसीडी) की रिपोर्ट 30 वर्ष की आयु के बाद सबसे अधिक बार की गई।
  • सर्वेक्षण की तिथि से पूर्व के पिछले 365 दिनों में प्रति 100 व्यक्तियों पर औसतन 2.9 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया (अर्थात्, ऐसे मामले जिनमें व्यक्तियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया)। शहरी क्षेत्रों में रहने वाले व्यक्तियों (3.2 प्रतिशत) ने ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले व्यक्तियों (2.7 प्रतिशत ) की तुलना में अधिक बार अस्पताल में भर्ती होने की सूचना दी।
  • प्रसव: पिछले 365 दिनों की अवधि में लगभग सभी प्रसव (लगभग 96.2 प्रतिशत ) संस्थागत प्रसवों के माध्यम से हुए। ग्रामीण क्षेत्रों में 95.6 प्रतिशत  प्रसव संस्थागत थे, जबकि केवल 4.4 प्रतिशत  प्रसव घर पर हुए। शहरी क्षेत्रों में संस्थागत प्रसवों का प्रतिशत और भी अधिक था, जो 97.8 प्रतिशत  था, जबकि घर पर केवल 2.2 प्रतिशत  प्रसव हुए।
  • ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में प्रसवपूर्व देखभाल की लगभग सार्वभौमिक पहुंच (98 प्रतिशत ) देखी गई। प्रसवोत्तर देखभाल की रिपोर्टिंग भी मजबूत थी, ग्रामीण क्षेत्रों में 92 प्रतिशत  और शहरी क्षेत्रों में 95 प्रतिशत ।
  • देशभर में स्वास्थ्य बीमा कवरेज में 2017-18 (ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 14 प्रतिशत  और शहरी क्षेत्रों में लगभग 19 प्रतिशत ) और 2025 (ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 47 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में लगभग 44 प्रतिशत) के बीच काफी सुधार देखा गया है।
  • पिछले 365 दिनों के दौरान अस्पताल में भर्ती होने के प्रत्येक मामले (प्रसव को छोड़कर) पर अनुमानित औसत चिकित्सा व्यय लगभग 34,064 रुपये था (ग्रामीण क्षेत्रों में 31,484 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 38,688 रुपये), जबकि माध्यिका चिकित्सा व्यय लगभग 11,285 रुपये था (ग्रामीण क्षेत्रों में 10,500 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 12,400 रुपये)।
  • अखिल भारतीय स्तर पर सरकारी अस्पतालों में प्रति अस्पताल में भर्ती होने के मामले पर औसत व्यय (प्रसव को छोड़कर) 6,631 रुपये था, जबकि सरकारी अस्पतालों में इलाज किए गए आधे मामलों में 1,100 रुपये या उससे कम का खर्च शामिल था।
  • पिछले 15 दिनों के दौरान बाह्य रोगी देखभाल के लिए भारत में औसत जेब खर्च चिकित्सा व्यय लगभग 861 रुपये (ग्रामीण 847 रुपये, शहरी 884 रुपये) था, जबकि माध्यिका व्यय लगभग 400 रुपये (ग्रामीण 395 रुपये, शहरी 420 रुपये) था।
  • सरकारी अस्पतालों में पिछले 15 दिनों के दौरान बाह्य रोगी देखभाल के लिए प्रति उपचार औसत व्यय लगभग 289 रुपये था और माध्यिका लगभग शून्य थी, जो यह दर्शाता है कि सरकारी अस्पतालों में आधे उपचार निःशुल्क प्राप्त हुए।
  • पिछले 365 दिनों के दौरान प्रति प्रसव चिकित्सा व्यय का औसत खर्च सरकारी अस्पतालों में लगभग 2,299 रुपये था, जबकि सभी अस्पतालों में मिलाकर औसत खर्च लगभग 14,775 रुपये था। सरकारी अस्पतालों में प्रसव का औसत खर्च (801 रुपये) सभी अस्पतालों के औसत खर्च (2,851 रुपये) के एक तिहाई से भी कम था।
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B1. पिछले 15 दिनों की अवधि के दौरान रुग्णता

I. पिछले 15 दिनों के दौरान बीमार के रूप में प्रतिक्रिया देने वाले व्यक्तियों का अनुपात (पीपीआरए)

चित्र 1 में अखिल भारतीय स्तर पर पुरुष, महिला और संयुक्त जनसंख्या के लिए अलग-अलग छह व्यापक आयु समूहों के लिए 15 दिनों के दौरान आयु-विशिष्ट पीपीआरए (प्रतिशत) दर्शाया गया है।

नीचे दिया गया चित्र-2  छह व्यापक आयु समूहों के लिए 15 दिनों के दौरान आयु-विशिष्ट पीपीआरए (प्रतिशत) दर्शाता है, जो पुरुष, महिला और संयुक्त जनसंख्या के लिए अलग-अलग ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग है।

बीमारी की सबसे अधिक दर 60 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग,  45-59 वर्ष आयु वर्ग और उसके बाद 0-4 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में दर्ज की गई।

II. पिछले 15 दिनों के दौरान अनुभव की गई बीमारियों की प्रकृति

नीचे दिया गया चित्र-3  विभिन्न आयु समूहों में पिछले 15 दिनों के दौरान भारतीय आबादी द्वारा रिपोर्ट की गई प्रमुख बीमारियों के प्रतिशत वितरण को दर्शाता है।

III. बाह्य रोगी देखभाल: पिछले 15 दिनों की अवधि में हुई बीमारियों का स्वास्थ्य सेवा प्रदाता द्वारा उपचार

ग्रामीण निवासियों ने शहरी निवासियों (25 प्रतिशत) की तुलना में सरकारी अस्पताल/सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का अधिक बार उपयोग किया (35 प्रतिशत)।

B2. पिछले 365 दिनों की अवधि के दौरान अस्पताल में भर्ती होना

I. आयु वर्ग और लिंग के अनुसार पिछले 365 दिनों के दौरान अस्पताल में भर्ती होने की प्रतिशत दर (प्रसव को छोड़कर)

अस्पताल में भर्ती होने की रिपोर्टिंग बहुत छोटे बच्चों (0-4 वर्ष) में उच्च स्तर पर शुरू होती है, युवावस्था और युवावस्था के दौरान कम रहती है, फिर उम्र के साथ फिर से बढ़ती है और वृद्ध वयस्कों में चरम पर पहुंच जाती है।

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B3. पिछले 365 दिनों की अवधि के दौरान प्रसव

प्रसव के स्थान के अनुसार प्रसवों का प्रतिशत वितरण

लगभग सर्वत्र संस्थागत प्रसव:

कुल 96.2 प्रतिशत  प्रसव में से केवल 3.8 प्रतिशत  प्रसव घर पर हुए।

B4. स्वास्थ्य बीमा के अंतर्गत आने वाली आबादी

अखिल भारतीय स्तर पर किसी भी स्वास्थ्य बीमा या वित्तपोषण योजना के अंतर्गत आने वाले व्यक्तियों का प्रतिशत

स्वास्थ्य बीमा कवरेज की रिपोर्टिंग में वृद्धि हुई है। 2017-18 (पिछले एनएसएस स्वास्थ्य सर्वेक्षण) में ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 14.1 प्रतिशत  और शहरी क्षेत्रों में 19.1% लोग ही बीमा के दायरे में थे। 2025 तक कवरेज ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़कर 47.4 प्रतिशत  और शहरी क्षेत्रों में 44.3 प्रतिशत  हो गया।

B5. व्यय

I. पिछले 365 दिनों की अवधि के दौरान अस्पताल में भर्ती (इन-पेशेंट केयर) पर जेब से किया गया चिकित्सा व्यय  अखिल भारतीय स्तर पर

अस्पताल में भर्ती होने के प्रत्येक मामले में औसत चिकित्सा व्यय और माध्यिका चिकित्सा व्यय नीचे दिए गए हैं।

चिकित्सा संस्थान जेब से किया गया चिकित्सा व्यय
औसत (रुपये) माध्यिका (रुपये)
सरकारी अस्पताल/सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाएं 6,631 1,100
धर्मार्थ/ट्रस्ट/गैर सरकारी संगठन द्वारा संचालित अस्पताल 39,530 10,000
निजी अस्पताल (सरकारी पैनल में शामिल अस्पतालों सहित) 50,508 24,000
सभी 34,064 11,285

 

नोट: 1. सरकारी अस्पतालों/सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में एचएससी/पीएचसी/सीएचसीएएएम आदि शामिल हैं।

2. सरकारी स्वास्थ्य वित्तपोषण योजना/बीमा जैसे एबी-पीएमजेएवाईसीजीएचएस/ईसीएचएस/अन्य केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं (जैसे रेलवे आदि)राज्य स्वास्थ्य बीमा योजनाएंराज्य सरकार समर्थित चिकित्सा प्रतिपूर्ति (कर्मचारियों के लिए)ईएसआईएस/ईएसआईसी आदि के अंतर्गत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों को निजी अस्पताल‘ श्रेणी में शामिल किया गया है।

II. पिछले 365 दिनों की अवधि के दौरान प्रति संस्थागत प्रसव पर जेब से किया गया चिकित्सा व्यय अखिल भारतीय स्‍तर पर

प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती होने के प्रत्येक मामले में औसत जेब से किया गया चिकित्सा व्यय और जेब से खर्च किया गया माध्यिका चिकित्सा व्यय नीचे दिया गया है।

चिकित्सा संस्थान जेब से किया गया चिकित्सा व्यय
औसत (रुपये) माध्यिका (रुपये)
सरकारी अस्पताल/सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाएं 2,299 801
धर्मार्थ/ट्रस्ट/गैर सरकारी संगठन द्वारा संचालित अस्पताल 19,612 13,000
निजी अस्पताल (सरकारी पैनल में शामिल अस्पतालों सहित) 37,630 32,000
सभी 14,775 2,851

 

नोट: 1. सरकारी अस्पतालों/सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में एचएससी/पीएचसी/सीएचसीएएएम आदि शामिल हैं।

2. सरकारी स्वास्थ्य वित्तपोषण योजना/बीमा जैसे एबी-पीएमजेएवाईसीजीएचएस/ईसीएचएस/अन्य केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं (जैसे रेलवे आदि)राज्य स्वास्थ्य बीमा योजनाएंराज्य सरकार समर्थित चिकित्सा प्रतिपूर्ति (कर्मचारियों के लिए)ईएसआईएस/ईएसआईसी आदि के अंतर्गत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों को निजी अस्पताल‘ श्रेणी में शामिल किया गया है।

टिप्पणी: घरेलू सामाजिक उपभोग: स्वास्थ्य के भौगोलिक कवरेजनमूना आकारनमूना डिजाइन और अवधारणात्मक ढांचे के बारे में संक्षिप्त जानकारी

ए. भौगोलिक कवरेज

इस सर्वेक्षण में भारत के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को शामिल किया गया है (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के गांवों को छोड़कर, जहां पहुंचना मुश्किल है)।

बी. नमूना आकार

स्वास्थ्य संबंधी शेड्यूल (शेड्यूल 25.0) के सर्वेक्षण के लिए कुल 17,520 प्रथम चरण इकाइयां (एफएसयू) (9,575 गांव और 7,945 शहरी ब्लॉक) का सर्वेक्षण किया गया। सर्वेक्षण में शामिल परिवारों की संख्या 1,39,732 थी (ग्रामीण क्षेत्रों में 76,296 और शहरी क्षेत्रों में 63,436)।

सी. नमूना डिजाइन

यह सर्वेक्षण बहुस्तरीय स्तरीकृत नमूनाकरण पद्धति का पालन करते हुए किया गया है। प्रथम चरण इकाइयां (एफएसयू) शहरी क्षेत्रों में शहरी फ्रेम सर्वेक्षण (यूएफएस) ब्लॉक और ग्रामीण क्षेत्रों में गांव हैं, जो जनगणना 2011 के अनुसार हैं (उन गांवों को हटाकर अद्यतन किया गया है जो शहरीकृत हो चुके हैं और नवीनतम यूएफएस में शामिल हैं)। केरल के ग्रामीण क्षेत्रों को छोड़कर, जहाँ पंचायत वार्डों को एफएसयू माना गया है, बाकी सभी क्षेत्रों में अंतिम चरण इकाइयां (यूएसयू) परिवार हैं। एफएसयू और यूएसयू दोनों का चयन सरल रेंडम सेम्पलिंग विदाउट रिप्लेसमेंट विधि द्वारा किया गया है। बड़े एफएसयू के मामले में बड़े गांवों/यूएफएस ब्लॉकों को नोशनली लगभग समान आकार की छोटी इकाइयों में विभाजित किया गया है, जिन्हें उप-इकाइयां कहा जाता है।

डी. प्रमुख संकेतकों का अवधारणात्मक ढांचा

घरेलू सामाजिक उपभोग: स्वास्थ्य सर्वेक्षण रुग्णता और अस्पताल में भर्ती होने से संबंधित संकेतकों का अनुमान प्रदान करता है, जैसे रुग्णता की व्यापकता, अस्पताल में भर्ती होने की दर, सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं का उपयोग और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं पर परिवार का प्रत्यक्ष व्यय। सर्वेक्षण से प्राप्त प्रमुख संकेतक नीचे परिभाषित हैं:

(क) 15 दिनों की अवधि के दौरान बीमार के रूप में प्रतिक्रिया देने वाले व्यक्तियों का अनुपात (पीपीआरए)

‘बीमार व्यक्तियों का अनुपात (पीपीआरए)’ को जनसंख्या में उन व्यक्तियों की अनुमानित संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है, जिन्होंने पिछले 15 दिनों की अवधि के दौरान किसी बीमारी की सूचना दी  और इसे अनुमानित कुल जनसंख्या के अनुपात के रूप में व्यक्त किया जाता है। यह आंकड़ा प्रतिशत के रूप में दर्शाया जाता है।

पी पीआरए (प्रतिशत) = 100  X जनसंख्या में बीमार बताए गए व्यक्तियों की कुल संख्या/कुल व्यक्तियों की संख्या

(ख) अस्पताल में भर्ती होने की दर

अस्पताल में भर्ती होने की दर को पिछले 365 दिनों की अवधि के दौरान अस्पताल में भर्ती होने (अस्पताल में इलाज) की अनुमानित संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है, जिसे कुल अनुमानित जनसंख्या के अनुपात के रूप में व्यक्त किया जाता है। हालांकिइसकी गणना में प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती होने के मामलों को शामिल नहीं किया जाता है।

अस्पताल में भर्ती होने की दर (प्रतिशत) = 100 X पिछले 365 दिनों के दौरान अस्पताल में भर्ती होने वाले कुल लोगों की संख्या / कुल व्यक्तियों की संख्या (पिछले 365 दिनों के दौरान मृत हुए पूर्व सदस्य सहित)

(ग) प्रति भर्ती औसत जेब से चिकित्सा व्यय

प्रत्यक्ष चिकित्सा व्यय  = कुल चिकित्सा व्यय – प्रतिपूर्ति राशि (बीमा कंपनी या नियोक्ता द्वारा)

चिकित्सा व्यय: चिकित्सा व्यय में डॉक्टर/सर्जन की फीस, दवाइयां, नैदानिक ​​परीक्षण, बिस्तर शुल्क, अन्य चिकित्सा व्यय (परिचारक शुल्क, फिजियोथेरेपी, व्यक्तिगत चिकित्सा उपकरण, रक्त, ऑक्सीजन आदि) शामिल हैं।

प्रति भर्ती औसत जेब से चिकित्सा व्यय = कुल अपनी जेब से’ किया गया चिकित्सा व्यय/अस्पताल में भर्ती होने के मामलों की कुल संख्या

नोट: परिवारों (या परिवारों के भीतर के व्यक्तियों) को उनके निवास स्थान के आधार पर क्षेत्र (ग्रामीण/शहरी) में अलग किया जाता हैन कि उपचार के स्थान के आधार पर।

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