मिच्छामि दुक्कड़म… जाने-अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए संपूर्ण जीव-जगत से मांगी माफी

क्षमापना दिवस के साथ जैन श्वेतांबर तेरापंथ समाज का नौ-दिवसीय पर्युषण पर्व संपन्न

मीडिया हाउस न्युज एजेंसी बोकारो : जैन श्वेतांबर तेरापंथ समाज की ओर से चास के माणकचंद छल्लाणी भवन में मनाए जा रहे नौ-दिवसीय पर्युषण पर्वाराधना का गुरुवार को समापन हो गया। बुधवार को संवत्सरी पर्व शुरू होने के बाद लगातार दो दिनों तक संपूर्ण जीव-जगत से क्षमा-याचना की गई। यह पर्व क्षमा, आत्म-निरीक्षण और आध्यात्मिक शुद्धि का पर्व है। इस दिन सभी ने ‘मिच्छामी दुक्कड़म’ कहकर एक-दूसरे से क्षमा मांगी। यहां ‘मिच्छामी’ का भाव क्षमा करने और ‘दुक्कड़म’ का अर्थ गलतियों से है अर्थात मेरे द्वारा जाने-अनजाने में किसी भी तरह की गलती हुई है या मैंने किसी को दुख पहुंचाया है, तो उसके लिए क्षमा याचना। जैन धर्मावलंबियों ने जाने-अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए छोटे-बड़े, पशु-पक्षी सहित पूरी प्रकृति व संपूर्ण जीव-जगत से माफी मांगी। आचार्य श्री महाश्रमणजी के आध्यात्मिक निर्देशन में पहुंचीं जैन उपासिका सायर जी कोठारी एवं संगीता जी पटावरी के सानिध्य में सूर्योदय के साथ ही जैन धर्मावलंबी पहुंचने लगे और वर्षभर में हुई भूलों के लिए एक-दूसरे से परस्पर क्षमा-याचना की। अपने सात दिनों तक त्याग, तपस्या, जप, मौन, संयम के साथ पर्युषण पर्व को आध्यात्मिक तरीके से मनाने के बाद आठवें दिन सभी जैन धर्मावलंबियों ने उपवास किया और गुरुवार को क्षमापना दिवस मनाया। इस अवसर पर उपस्थित श्रावकों को संबोधित करते हुए उपासिका सायर जी कोठारी ने कहा कि जैन समाज में क्षमायाचना का यह दिन बड़ा ही विलक्षण दिवस है। इस दिन वर्षों से एक दूसरे के प्रति मन में पल रही द्वेषता और कलुषता को निर्मल ह्रदय से क्षमा-याचना करके धोए जाने का सार्थक प्रयास किया जाता है। व्यक्ति अगर भावों से और मन से क्षमा मांग लेता है और सामने वाला क्षमादान दे देता है तो इससे एक सुंदर व स्वस्थ समाज और राष्ट्र की परिकल्पना सार्थक होती है। क्षमा वीरों का आभूषण होता है, क्योंकि क्षमा दान विरले व्यक्ति ही कर सकता है। उपासिका संगीताजी पटावरी ने कहा कि पर्युषण पर्व जैन धर्म के मूल सिद्धांतों को आत्मसात करने और जीवन में सुधार लाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। यह आठ दिवसीय पर्व जैन धर्म के अनुयायियों के लिए आत्मशुद्धि, ध्यान और तपस्या का महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान समाज के लोग संयम, साधना और सत्संग का पालन करते हैं, साथ ही अपने जीवन में अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह के सिद्धांतों का गहन अभ्यास करते हैं। क्षमापना संवत्सरी से पहले सारे जीवों से क्षमा-याचना पर्युषण पर्व का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब तक मन में किसी के प्रति वैर की गांठ है, किसी के प्रति मन में द्वेष है, तब तक हमारा मोक्ष नहीं होगा। भगवान महावीर ने सिखाया है कि सारे जीवों से मैत्रीभाव रखो और हम उनकी ही बात भूल गए। सच्चा धर्म तभी प्रकट होता है जब हृदय में क्षमापना प्रकट होता है। नौदिनी इस पूरे आयोजन की सफलता में माणिकचंद छल्लाणी, जयचन्द, राजेश कोठारी, अरिहन्त जैन, सुशील बैद, कनक जैन, सरिता कोठारी, अलका जैन, नीतू बोथरा, सती बोथरा, सुनीता कोठारी, गजराज बागवानी, शांतिलाल जैन, शशि बोथरा, अंकित, तारा चंद, अंजली, उन्नति, जयचंद बांठिया, ताराचंद, मदन चौरड़िया, रेणु चौरड़िया, कनक जैक, शशि बांठिया, किरण पारिख, प्रमोद चौरड़िया, अभय बेगवानी, बजरंग लाल चौरड़िया, सियाराम कुमार, बबीता कोठारी, सरोज सुमन चौरड़िया, संजय बांठिया, संजू बांठिया आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस आशय की जानकारी मीडिया प्रमुख सुरेश बोथरा ने दी।

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