श्रीलंका का भी बांग्लादेश जैसा हो सकता था हश्र : राष्ट्रपति विक्रमसिंघे

कोलंबो, 2 सितम्बर (आईएएनएस)। श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने सोमवार को कहा कि सरकारी परिसंपत्तियों का उपयोग कर सरकार एक राष्ट्रीय धन कोष स्थापित करने की योजना बना रही है। यह नॉर्वे, कतर और सिंगापुर जैसे देशों द्वारा बनाई गई निवेश कंपनियों के समान होगा।

विक्रमसिंघे ने कहा कि उन्होंने आर्थिक पतन के दौरान देश की बागडोर संभाली थी और इसके पुनर्निर्माण के लिए “कठिन निर्णय” लिए थे।

उन्होंने कहा क‍ि अगर श्रीलंका के लोग धैर्य न द‍िखाते, तो बांग्लादेश की ही तरह श्रीलंका का भी हश्र हो सकता था।

श्रीलंका के राष्ट्रपति ने सोमवार को कोलंबो में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, “अगर लोग देश पर शासन करने के लिए सड़कों पर उतर आए होते तो श्रीलंका को भी आज बांग्लादेश जैसा ही हश्र झेलना पड़ सकता था। अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण के लिए कठिन और अलोकप्रिय निर्णय लेने की आवश्यकता थी, इसमें अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के परामर्श से आवश्यक कदम उठाना भी शामिल था।”

इस दौरान उन्होंने बुजुर्गों के लिए एक नई सेवानिवृत्ति बीमा योजना शुरू की।

उन्होंने कहा, “एक समय ऐसा था जब कई लोगों के लिए वाहन, घर या आधुनिक उपकरण खरीदना एक असंभव सपना लगता था। लेक‍िन, हमने उस चुनौतीपूर्ण समय को पार कर लिया है और अब अर्थव्यवस्था स्थिर हो गई है। लोगों की क्रय शक्ति बढ़ गई है। इससे छोटे व्यवसायों के विकास को बढ़ावा मिलने और निवेशकों को आकर्षित करने की उम्मीद है।”

श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सरकार ने लोगों को अधिकार प्रदान करने के लिए एक कार्यक्रम भी शुरू किया है। इसकी शुरुआत भूमि अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए फ्री होल्ड डीड जारी करने के निर्णय से हुई है।

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इस प्रयास के तहत, दो मिलियन फ्री होल्ड डीड वितरित किए जा रहे हैं। कोलंबो में फ्लैटों को लोगों को निशुल्क प्रदान करने के लिए एक अन्य योजना भी शुरू की गई है। देश के ऊपरी इलाकों में एस्टेट गांव बनाने की योजना बनाई गई है। इसमें प्रत्येक परिवार को प्लॉट दिया जाएगा।

उन्होंने कहा, “लोगों को अधिकार हस्तांतरित करने की यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।”

पिछले सप्ताह विक्रमसिंघे ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल की कोलंबो यात्रा के दौरान भारत के साथ चल रहे आर्थिक सहयोग पर चर्चा की थी।

विक्रमसिंघे ने पिछले कुछ महीनों में भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश को “निरंतर समर्थन” देने के लिए धन्यवाद दिया है।

उन्होंने श्रीलंका के विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारत के साथ मजबूत साझेदारी बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की है। साथ ही परिवर्तनकारी द्विपक्षीय परियोजनाओं के उद्देश्य से एक व्यापक एजेंडे पर प्रकाश डालते हुए इसके प्रयासों में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया।

श्रीलंका के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए नौ जून को नई दिल्ली में थे।

इसके तुरंत बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर दूसरे कार्यकाल का पदभार ग्रहण करने के बाद अपनी पहली द्विपक्षीय यात्रा में श्रीलंका गए थे। इसमें भारत ने श्रीलंका के प्रति अपने सबसे करीबी समुद्री पड़ोसी और समय की कसौटी पर खरे उतरे मित्र के रूप में अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

दो दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को चिह्नित करते हुए, जयशंकर और श्रीलंका के राष्ट्रपति ने संयुक्त रूप से कोलंबो और त्रिंकोमाली जिलों में मॉडल विलेज हाउसिंग प्रोजेक्ट के तहत 48 घर सौंपे थे।

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वहीं कैंडी, मटाले और नुवारा एलिया जिलों में भारतीय आवास परियोजना के तीसरे चरण के तहत 106 घर सौंपे गए थे।

6 मिलियन अमरीकी डाॅलर के भारतीय अनुदान से स्थापित समुद्र में खोज और बचाव कार्यों के लिए एक प्रमुख केंद्र, समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (एमआरसीसी) को भी वर्चुअल समारोह में संयुक्त रूप से चालू किया गया था।

श्रीलंका इस समय 21 सितम्बर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों में जुटा हुआ है।

–आईएएनएस

एकेएस/सीबीटी

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