ईरान के खर्ग द्वीप के पास टैंकर पर हमला, अमेरिकी मिसाइल हमले से मची हलचल

तेहरान 

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम की ओर जा रहा है। इसी बीच ईरानी मीडिया ने खर्ग द्वीप पर बड़े हमले का दावा किया है। जानकारी के मुताबिक खर्ग द्वीप के पास जोरदार धमाके सुने गए हैं। ये धमाके वहीं हुए हैं जहां तेल का मुख्य हब है। एसएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक खर्ग द्वीप के पास ही ईरान के टैंकर को निशाना बनाया गया है।

अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अमेरिका ने ईरान के टैंकर को ही निशाना बनाया है या फिर खर्ग द्वीप पर भी तबाही मचाई है। बीते दिनों अमेरिका ने एआई वीडियो जारी करते हुए दावा किया था कि खर्ग द्वीप को तबाह करके टुकड़े-टुकड़े कर दिया गया है। हालांकि ईरान ने अमेरिका के इस दावे को खारिज कर दिया था।

अमेरिका बोला- यह युद्ध नहीं है
अमेरिका एक तरफ युद्ध की आग भड़काता ही जा रहा है और दूसरी तरफ दावा कर रहा है कि यह युद्ध नहीं है। वेंस से अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय 'व्हाइट हाउस' में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान पूछा गया कि क्या तीन नवंबर को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले युद्ध समाप्त हो सकता है जिसके जवाब में उन्होंने कहा, ''मैं इसे युद्ध नहीं कहूंगा। फिलहाल सक्रिय गोलीबारी नहीं हो रही है।''

ट्रंप इसे बता रहे मामूली बात
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष को ''मामूली बात'' करार दिया और देश के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस के इस बयान से सहमति जताई कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को ''युद्ध'' नहीं कहा जा सकता। ट्रंप ने 'ओवल ऑफिस' (अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक कार्यालय) में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान वेंस की एक दिन पहले की टिप्पणियों के बारे में सवाल किए जाने पर कहा कि ईरान पर अमेरिकी हमले अब ''रुक-रुककर'' हो रहे हैं। उन्होंने इस संघर्ष की गंभीरता को कम दिखाने की कोशिश की जबकि इस युद्ध पर अमेरिकी करदाताओं के 37.5 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक खर्च हो चुके हैं और अमेरिका के 18 सैन्यकर्मियों की मौत हुई है।

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होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए एक अहम रास्ता बना हुआ है। क्षेत्रीय तनाव के बीच इससे होकर होने वाली जहाजों की आवाजाही में काफी कमी आई है। हाल के दिनों में यहाँ से गुज़रने वाले जहाजों की संख्या बहुत कम हो गई है। बड़े तेल टैंकर और गैस कैरियर लगभग इस रास्ते का इस्तेमाल करना बंद कर चुके हैं। तनाव बढ़ने से पहले, दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की खेप इसी जलडमरूमध्य से होकर गुज़रती थी।

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