आरक्षण बढ़ाने का निर्णय चुनावी लौलीपौप: जन सुराज

अवनीश श्रीवास्तव
मीडिया हाउस 9ता.मोतिहारी। बिहार सरकार के पचहत्तर प्रतिशत आरक्षण देने के कैबिनेट के फैसले पर तंज कसते हुए जन सुराज के संस्थापक और पदयात्रा के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने कहा है कि यह अति पिछड़ों को केवल लोलीपॉप दिखाया जा रहा है।‌ सरकार नौकरियां दे नहीं रही है और आरक्षण का झुनझुना थमा रही है। ग़रीब गरीबी से तब बाहर निकलेंगे जब उनके लिए उच्च स्तरीय शिक्षा और रोजगार की ठोस व्यवस्था की जाएगी। उक्त जानकारी आज यहां जारी एक बयान में जन सुराज के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय कुमार ठाकुर ने दी।‌ श्री ठाकुर ने बताया कि प्रशांत किशोर सरकार के जातिगत सर्वेक्षण जारी किए जाने के पहले से ही बिहार की बदहाली, फटेहाली, गरीबी, अशिक्षा, बेरोज़गारी तथा रोजगार के लिए निरंतर जारी पलायन पर सरकार की ग़लत नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। जन सुराज का सरकार पर यह आरोप साबित है कि लालू , नीतीश और भाजपा ने मिलकर बिहार को देश का सबसे गरीब, अशिक्षित और बेरोज़गारी वाला राज्य बना दिया है।‌ प्रशांत किशोर ने कहा है कि जबतक गांव के आम लोगों के बच्चों को पढ़ाई का बेहतर इंतजाम नहीं होगा, शिक्षा व्यवस्था को उच्च स्तरीय नहीं बनाया जाएगा तब तक अति पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और समाज के सभी वर्गों के बच्चों का भविष्य बेहतर नहीं बनाया जा सकता। लोग अच्छी शिक्षा हासिल करेंगे तभी तो उन्हें आरक्षण का लाभ मिलेगा।‌‌ उन्होने कैबिनेट द्वारा आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने के फैसले को चुनावी लौलीपौप बताया। उन्होंने लालू – नीतीश को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि पिछले बत्तीस वर्षों से तो यही दोनों बड़े भाई और छोटे भाई सरकार चलाते रहे हैं पर उन्हें तब अति पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और समाज के सभी वर्गों के गरीबों की चिन्ता कहां चली गई थी? आज़ इसलिए याद आया क्योंकि माथे पर संसदीय चुनाव है। प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जानना चाहा है कि मंत्रीमंडल में जातिगत सर्वेक्षण के अनुसार आनुपातिक रूप से कब अति पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और समाज के अन्य वर्गों को जगह देंगे? मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री कब अपने अतिरिक्त विभागों को दूसरे समाज के विधायकों को सौंपेंगे? प्रशांत किशोर ने उन दोनों नेताओं पर समाज के लोगों के साथ हकमारी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री अपने पास रखे विभागों को दलितों, अल्पसंख्यकों और अति पिछड़े समाज के विधायकों में क्यों नहीं बांट रहे हैं? सामाजिक न्याय की बातें मंचों पर तो शोभा देती है किन्तु जमीन पर लाने में ये दोनों फिसड्डी साबित हो रहे। उनकी हकमारी कर मालदार विभाग मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के पास हैं जिन्हें वे दोनों किसी को नहीं देना चाहते हैं।

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