राज्य में कानून-व्यवस्था के लिए कलेक्टर-एसपी होंगे जिम्मेदार : मोहन यादव

भोपाल, 22 नवंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार रात राज्य के कलेक्टर-कमिश्नर के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में चाहे विकास का प्रश्न हो, शासन की प्राथमिकताओं के अनुसार कार्यों का क्रियान्वयन या कानून-व्यवस्था की बात हो, आदर्श स्थिति बनाए रखने का दायित्व कलेक्टर-एसपी का है। अपने जिले में सभी व्यवस्थाओं के लिए कलेक्टर और एसपी जिम्मेदार होंगे। जिन जिलों से अनियमितताओं की शिकायतें आएंगी, वहां बड़े अधिकारियों को भी नहीं बख्शा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 22 हजार थानों की सीमाओं में आवश्यक परिवर्तन हुए हैं। जन-कल्याण की दृष्टि से जिलों के पुनर्गठन के लिए राज्य शासन ने आयोग गठित किया है। इसमें कलेक्टर और जन-प्रतिनिधि भी जरूरी सुझाव देकर सहयोग करें। आने वाले समय में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण, आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने जैसे निर्णय क्रियान्वित होंगे। इस दृष्टि से अनेक प्रशासनिक कार्यों का सह-संबंध रहेगा। जिला स्तर पर भी जन-कल्याण के साथ प्रशासनिक सुधार प्राथमिक कार्य है।

उन्होंने आगे कहा परीक्षाओं को देखते हुए निर्धारित ध्वनि से अधिक कोलाहल यंत्रों पर नियंत्रण, नशे का व्यापार करने वालों पर अंकुश, पराली जलाने पर रोक, किसानों के लिए खाद और उर्वरक के व्यवस्थित वितरण, राजस्व कार्यों के त्वरित निराकरण को मुस्तैदी से किया जाए। खाद की कालाबाजारी करने वालों के विरुद्ध सख्त कदम उठाए जाएं।

सीएम यादव ने कहा कि प्रदेश में धान, ज्वार-बाजरा और सोयाबीन खरीदी से संबंधित कार्य व्यवस्थित रूप से सम्पन्न किए जाएं। जिन जिलों से अनियमितताओं की जानकारी मिलेगी, वहां दोषी अधिकारियों को नहीं बख्शा जाएगा। उपार्जन केंद्रों पर आवश्यक सुविधाएं होनी चाहिए। खाद-बीज की समय पर उपलब्धता और व्यवस्थित वितरण सुनिश्चित किया जाए। प्रदेश में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध होने के बावजूद जिन स्थानों से वितरण की अव्यवस्था की शिकायत मिलेगी, वहां दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि कार्य में ड्रोन के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए। ड्रोन के माध्यम से यूरिया के छिड़काव और खाद डालने से सामग्री की बचत भी संभव है। आवश्यकता अनुसार, किसानों को किराये पर ड्रोन उपलब्ध कराने, प्राकृतिक जैविक कृषि को प्रोत्साहित करने, प्राकृतिक खेती विकास योजना के क्रियान्वयन और किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएं।

–आईएएनएस

एसएनपी/एकेजे

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