लोकतांत्रिक मूल्यों का गला घोंटने वाली घटना थी आपातकाल* : विजय कुमार सिन्हा
हर कीमत पर संसदीय लोकतंत्र के मूल्य की रक्षा करना NDA का उद्देश्य

मीडिया हाउस न्यूज़ एजेंसी पटना 24 जून।आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने की पूर्वसंध्या पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि आपातकाल लोकतंत्र, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के गला घोंटने वाली घटना थी । इसीलिए हम इस अवसर को संविधान हत्या दिवस के रूप में लोगों के बीच ले जा रहे हैं । इस प्रयास से लोगों को आपातकाल जैसे भारतीय लोकतंत्र के ‘काले अध्याय’ से सबक लेने की प्रेरणा मिलेगी । साथ ही हम अपने जिन पुरोधाओं की संकल्पशक्ति के कारण उस कुचक्र से बाहर आ पाए थे, उन्हें भी हमारी सामूहिक स्मृति में सम्मानित स्थान मिलेगा ।
श्री सिन्हा ने कहा आपातकाल देश को अपनी जागीर समझने की मानसिकता से उपजा एक दौर था । अपने अलोकतांत्रिक रवैये को ‘वफादार नौकरशाही’ और ‘वफादार न्यायपालिका’ लाकर पोषित करना इसका उद्देश्य था । आपातकाल विचारों की आजादी, प्रेस की आजादी यहां तक कि जीने की आजादी को छीन कर देश को अराजकता की गर्त में धकेलने का एक कुप्रयास था । इस दौर में एक परिवार की सत्ता बरकरार रखने के लिए देश के संघीय ढांचे को तहस-नहस किया गया था । विपक्ष के नेताओं को जेल में डालकर ‘वैकल्पिक आवाजों’ को खामोश करने की कोशिश की गई ।
श्री सिन्हा ने कहा कि आज एक बार फिर देश में आपातकाल लाने वाले और उस राजनीतिक प्रवृत्ति के सारे पोषक एकसाथ आ गए हैं । इनका उद्देश्य जनहित नहीं बल्कि अपना और अपने परिवार का हित साधना है । आज भी उन्होंने अध्यक्ष के निर्वाचन का राजनीतिकरण कर लोकतांत्रिक परम्परा को खंडित करने का प्रयास किया । लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में NDA संसदीय सर्वोच्चता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को हर कीमत पर अक्षुण्ण रखने के लिए पूरी तरह संकल्पित है ।








