विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रबंधन

भोपाल

मध्यप्रदेश सरकार राज्य में विकास कार्यों को गति देने, अवस्थापना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत करने और जनकल्याणकारी योजनाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के उद्देश्य से 3000 करोड़ रुपये का वित्तीय संसाधन (ऋण) जुटाने जा रही है। इस राशि को 1000-1000 करोड़ रुपये के तीन सुव्यवस्थित चरणों में लिया जाएगा। मंगलवार को हुई भारतीय रिजर्व बैंक की ई-कुबेर पोर्टल नीलामी प्रक्रिया से कम ब्याज दर पर प्रदेश सरकार को ऋण प्राप्त होगा।

उप-मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने वित्तीय प्रबंधन के इस कदम को राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए दूरदर्शी और अत्यंत सकारात्मक फैसला बताया है। भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर प्लेटफार्म से प्राप्त होने वाला यह ऋण प्रदेश के आधारभूत ढ़ांचे जैसे सड़क निर्माण, पुल-पुलिया निर्माण, भू-अर्जन क्षेत्र, सिंचाई परियोजनाएं, बांध निर्माण, मेडिकल सेक्टर, विद्युत क्षेत्र, भवन निर्माण एवं आमजन की सुरक्षा से संबंधित कार्य किये जायेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि ऋण राशि का उपयोग राजस्व व्यय जैसे वेतन भत्ते, लाड़ली बहना योजना, पेंशन, प्रशासनिक व्यय, सीएम किसान कल्याण निधि एवं अनुदान राज्य सहायता में नहीं किया जाता है।

उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि सरकार ऋण लेकर पूंजीगत कार्यों में व्यय करती है। “पूंजीगत व्यय में वृद्धि से आधारभूत संरचना, उत्पादन क्षमता और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होता है, जिससे राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में वृद्धि को गति मिलती है। GSDP में वृद्धि के साथ रोजगार एवं आय के अवसर बढ़ते हैं, जिसका प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष लाभ आमजन की आय और जीवन-स्तर में वृद्धि के रूप में परिलक्षित होता है। इससे विकास परियोजनाओं की ग्रोथ और प्रदेश में समृद्धि आती है। किसी भी प्रदेश में ऋण लेकर विकास कार्यों में लगाना प्रदेश को विकासोन्मुखीकरण की ओर ले जाना है। वित्तीय अनुशासन (Financial Discipline) और आरबीआई (RBI) की निर्धारित सीमाओं के तहत ली जा रही यह राशि पूरी तरह से राज्य के विकास कार्यों में निवेश की जाएगी।

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वित्तीय प्रबंधन एवं विकास रणनीति के मुख्य बिंदु

वित्तीय वर्ष 2026-27 में निर्धारित ऋण सीमा के अंतर्गत बाज़ार परिस्थितियों के अनुसार 1000-1000 करोड़ रुपये की तीन किस्तों में यह राशि जुटाई जाएगी, जिसमें कम ब्याज दर पर बेहतर प्रबंधन हो सके। आर्थिक गतिविधियों के बुनियादी ढांचे में पूंजीगत निवेश (Capital Expenditure) होने से राज्य में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और व्यापारिक गतिविधियों में भी तेज़ी आएगी। 

मजबूत वित्तीय स्थिति का प्रमाण

उप-मुख्यमंत्री  देवड़ा ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा निर्धारित राजकोषीय जवाबदेही एवं बजट प्रबंधन (FRBM) सीमा 3 प्रतिशत के भीतर ही यह वित्तीय प्रबंधन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश का जीएसडीपी (GSDP) अनुपात मजबूत स्थिति में है और राज्य सरकार समय पर ऋण भुगतान का बेहतरीन रिकॉर्ड बनाए हुए है। वित्तीय रणनीति से प्रदेश में चल रहे विकास प्रोजेक्ट्स में और तेज़ी आएगी, जिससे 'विकसित मध्यप्रदेश' के संकल्प को सीधे मजबूती मिलेगी

 

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