दिल्ली विधानसभा चुनाव : नरेला सीट पर दिलचस्प चुनावी लड़ाई के आसार, मुद्दों की भरमार

नई दिल्ली, 8 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्ली विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ तमाम सीटों पर चुनावी जंग रोचक हो चली है। इसी कड़ी में नरेला विधानसभा सीट हॉट सीट बनी हुई है।

नरेला दिल्ली में स्थित एक विधानसभा क्षेत्र है और यह उत्तर पश्चिमी दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। 1966 से 1993 तक नरेला दिल्ली महानगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत था और यह पूर्वी दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा था। 1993 से 2008 तक नरेला दिल्ली विधानसभा सीट पूर्वी दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा बना रहा।

साल 2008 में दिल्ली विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन हुआ और नरेला को उत्तर पश्चिमी दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के तहत एक अलग विधानसभा क्षेत्र बना दिया गया। इस परिसीमन के कारण नरेला का राजनीतिक स्थिति में भी बदलाव हुआ और अब यह उत्तर पश्चिम दिल्ली लोकसभा का हिस्सा है, जबकि पहले यह पूर्वी दिल्ली लोकसभा में था।

निर्वाचन क्षेत्र को विभिन्न कॉलोनियों में बांटा गया है। जिसमें राजीव कॉलोनी, नई बस्ती, पंजाबी कॉलोनी, गौतम कॉलोनी, स्वतंत्र नगर, शिवाजी कॉलोनी, मास्टर कॉलोनी, संजय कॉलोनी, इंद्रा कॉलोनी और पुलिस कॉलोनी शामिल हैं। नरेला विधानसभा क्षेत्र में आम मुद्दों में बिजली, पानी, सड़कों का निर्माण और शहरीकरण के मुद्दे प्रमुख हैं। इन मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा होती है।

2011 की जनगणना के अनुसार नरेला उप-जिले की कुल जनसंख्या 809,913 थी। जिसमें पुरुषों की संख्या 439,576 और महिलाओं की संख्या 370,337 है। वहीं अगर साक्षरता की बात करें तो 569,830 लोग साक्षर थे, जो कुल जनसंख्या का 70.3 प्रत‍िशत हैं। इसमें पुरुष साक्षरता 75.9 प्रत‍िशत और महिला साक्षरता 63.8 प्रत‍िशत थी। वहीं नरेला में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या 155,299 थी।

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2015 के विधानसभा चुनाव में नरेला विधानसभा सीट पर आम आदमी पार्टी के शरद चौहान ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नील दमन खत्री को हराया था। शरद कुमार को कुल 96,143 वोट मिले, जबकि नील दमन खत्री को 55,851 वोट प्राप्त हुए थे। वहीं कांग्रेस के प्रवीण कुमार तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें 4,643 वोट मिले।

2020 विधानसभा चुनाव में नरेला विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी (आप) ने मौजूदा विधायक शरद चौहान पर दोबारा दांव लगाया। वहीं भाजपा ने पूर्व विधायक नीलदमन खत्री को मैदान में उतारा है। कांटे की लड़ाई में शरद चौहान को 86,262 वोट मिले जबकि भाजपा प्रत्याशी नील दमन खत्री ने 68,833 वोट हासिल किए थे और कांग्रेस के सिद्धार्थ कुंडू को 6,270 वोट मिले थे।

नरेला विधानसभा सीट पर 1993 में भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल की थी। इसके बाद 1998, 2003 और 2008 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों ने नरेला विधानसभा सीट पर विजय प्राप्त की। 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस से यह सीट वापस छीन ली थी। हालांकि 2015 में आम आदमी पार्टी ने पहली बार नरेला विधानसभा सीट पर विजय हासिल की। ऐसे में इस बार के विधानसभा चुनाव में भी इस सीट पर भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच दिलचस्प चुनावी जंग होने के आसार हैं।

–आईएएनएस

एकेएस/सीबीटी

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