सभी जिलाधिकारियों को रजिस्टर्ड फर्मों की पुनः जांच कर कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश

Media House लखनऊ-उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन पूर्ण पारदर्शिता, ईमानदारी एवं जवाबदेही के साथ किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से मनरेगा/ वीबी- जीरामजी के कार्यों तथा उनमें प्रयुक्त सामग्री की आपूर्ति से संबंधित दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने पर बल दिया है।

उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने कहा कि ग्राम्य विकास योजनाएं प्रदेश के गरीब, श्रमिक एवं ग्रामीण परिवारों के सशक्तिकरण का आधार हैं। किसी भी स्तर पर अनियमितता, पक्षपात या हितों के टकराव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे शासनादेश के अनुरूप सभी प्रक्रियाओं की समीक्षा करते हुए पारदर्शी एवं निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित करें। प्रदेश सरकार की मंशा है कि महात्मा गांधी नरेगा योजना / विकसित भारत-रोजगार गारण्टी एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाते हुए रोजगार सृजन एवं आजीविका संवर्धन के लक्ष्यों को पूर्ण पारदर्शिता के साथ प्राप्त किया जाए।

प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास विभाग द्वारा जारी शासनादेश मे महात्मा गांधी नरेगा योजना तथा विकसित भारत-रोजगार गारण्टी एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी रामजी) के अंतर्गत मैटेरियल, ईंधन, स्टेशनरी, अन्य सामग्री अथवा सेवाओं की आपूर्ति हेतु वेण्डर पंजीकरण के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं और इन निर्देशो का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए
जिलाधिकारियो को निर्देश दिये गये हैं।

संशोधित निर्देशों के अनुसार मनरेगा/वीबी-जी रामजी कार्यक्रम के क्रियान्वयन से जुड़े पदाधिकारियों/कर्मियों—जैसे क्षेत्र पंचायत प्रमुख, खण्ड विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक, सहायक कार्यक्रम अधिकारी, सहायक लेखाकार, कम्प्यूटर ऑपरेटर, ग्राम रोजगार सेवक तथा सोशल ऑडिट से जुड़े जिला/ब्लॉक संसाधन व्यक्ति एवं कम्प्यूटर ऑपरेटर—के पारिवारिक सदस्यों या निकट संबंधियों द्वारा स्थापित फर्म/कम्पनियों को वेण्डर के रूप में पंजीकृत नहीं किया जाएगा।
परिवार/संबंधी की परिभाषा जिला पंचायत सेवा नियमावली, 1970 के पैरा-54 के अनुसार निर्धारित की गई है, जिसमें पिता, माता, पति-पत्नी, पुत्र-पुत्री, दामाद, भाई-बहन, सास-ससुर, चाचा-मामा, भतीजा-भांजा, चचेरा/ममेरा भाई आदि सम्मिलित हैं। इस संबंध में सभी जिला कार्यक्रम समन्वयकों/जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने जनपदों में मनरेगा एवं वीबी-जी रामजी के अंतर्गत वेण्डर के रूप में पंजीकृत फर्मों/कम्पनियों की पृष्ठभूमि की पुनः गहन जांच कर उक्त निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें।

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