“लखपति दीदी”हर्बल गुलाल: सुरक्षित, प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल

Media House लखनऊ-उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि महिला स्वावलम्बन और सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वयं सहायता समूह (SHG) की दीदियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के माध्यम से होली पर्व के अवसर पर राज्यव्यापी विशेष अभियान प्रारम्भ किया गया है।

उप मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं नॉन-फार्म गतिविधियों के अंतर्गत गुलाल/अबीर, पापड़, चिप्स, मिठाइयाँ, अगरबत्ती, पिचकारी, टोपी, टी-शर्ट प्रिंटिंग एवं अन्य हस्तशिल्प उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। यह पहल न केवल ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि का माध्यम बन रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और उद्यमी बनाने की दिशा में भी एक ठोस कदम है। इस अभियान के तहत SHG दीदियों द्वारा प्राकृतिक संसाधनों से हर्बल गुलाल/अबीर तैयार किया जा रहा है। पलास के फूल, चुकंदर, गेंदे के फूल, पालक के रस आदि से निर्मित यह रंग पूर्णतः केमिकल-फ्री, त्वचा के लिए सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल है। इस पहल से “स्वस्थ होली – सुरक्षित होली” का संदेश भी समाज तक पहुँचाया जा रहा है।

उप मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सभी जनपदों में विकास भवन, कलेक्ट्रेट, तहसील एवं अन्य शासकीय परिसरों में स्वयं सहायता समूह के उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री काउंटर स्थापित किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन, नगर निकायों एवं संबंधित विभागों के सहयोग से संस्थागत एवं सामूहिक खरीद को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे दीदियों के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध हो सके। मुख्य विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर शासकीय कार्यालय परिसरों में अस्थायी स्टॉल लगवाना सुनिश्चित करें तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों को SHG उत्पादों की खरीद के लिए प्रेरित करें। जिलाधिकारी कार्यालय एवं तहसीलों को संभावित बड़े खरीदार के रूप में सक्रिय भूमिका निभाने हेतु जोड़ा गया है।

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स्वयं सहायता समूह के गुणवत्ता युक्त उत्पादों को ई-सरस, फ्लिपकार्ट, अमेज़न, मीशो जैसे ई-मार्केट प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड कराने की भी व्यवस्था की जा रही है, जिससे ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर बाजार उपलब्ध हो सके। सभी जनपदों को निर्देश दिए गए हैं कि समूह का नाम एवं कोड, संबंधित दीदी का नाम व संपर्क संख्या, बिक्री स्थल, कुल बिक्री राशि एवं प्राप्त बड़े ऑर्डर का विवरण Google Sheet पर नियमित रूप से अपडेट किया जाए। इससे राज्य स्तर पर सतत निगरानी, पारदर्शिता एवं प्रभावी समीक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। यह अभियान स्वयं सहायता समूह की दीदियों को “लखपति दीदी” के लक्ष्य से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। पर्व आधारित बिक्री, स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, संस्थागत खरीद और डिजिटल विपणन के माध्यम से महिलाओं की आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की जा रही है।

मिशन निदेशक, उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, दीपा रंजन ने कहा कि होली जैसे प्रमुख पर्व पर स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम है। यह अभियान “वोकल फॉर लोकल” की भावना को सुदृढ़ करते हुए ग्रामीण उद्यमिता को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार का यह प्रयास स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि महिला सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं, बल्कि ठोस योजनाओं और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से धरातल पर साकार हो रहा एक संकल्प है। स्वयं सहायता समूह की दीदियाँ आज होली के रंगों के साथ आत्मनिर्भरता, सम्मान और समृद्धि के नए आयाम स्थापित कर रही हैं।

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