खनन हादसा-मुख्यमंत्री के जाते ही हुआ बड़ा खनन हादसा, दर्जनों मजदूरों के दबे होने की सूचना, मौके पर प्रशासन.!

घटना स्थल पर पहुंचे राज्य मंत्री ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए घटना की जांच कराई जाने व कार्रवाई की बात कही।
- – बिना मानक नियम कानून के खुलेआम चल रहा है खनन कार्य.!
- – मुख्यमंत्री करे कठोर कार्यवाही, खनन का प्रभार मुख्यमंत्री के पास.!
- – खदानों में मानक के विपरीत हो रहे विस्फोट से दरक रहे हैं पहाड़.!
- – क्षमता से अधिक खदानों में भी हो रहा है विस्फोट का प्रयोग.!
- – डीजीएमएस खनन विभाग की कार्यशैली संदिग्ध, जांच के नाम पर फॉर्मेलिटी.!
घटनास्थल पर पहुंचे जिला अधिकारी व पुलिस अधीक्षक ने घटना की जांच करायें जाने की बात कही.!
AKGupta.मीडिया हाउस सोनभद्र-मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चोपन सोनभद्र में आयोजित जनजाति गौरव दिवस कार्यक्रम में शामिल होने के उपरांत जैसे ही कार्यक्रम का समापन हुआ, उसके लगभग 2 घंटे के बाद ही सभा स्थल से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर संचालित श्री कृष्णा माइनिंग वर्क्स बिल्ली, पार्टनर-मधुसूदन सिंह, दिलीप केसरी के द्वारा संचालित गहरी खदान में अचानक ऊपर से पहाड़ी का बड़ा टीला धसने से खदान में कार्य कर रहे लगभग दर्जनों मजदूरों के दबे होने व हादसा की सूचना की खबर फैलते ही खनन क्षेत्र एवं प्रशासन के लोगों में खलबली मच गया।
सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम के आगमन की सूचना को लेकर समस्त खदानों एवं क्रशर प्लांटों के संचालक पर रोक लगा दिया गया था, रोक के बावजूद खदान में कार्य निरंतर चल रहा.! घटना की सूचना पर जिलाधिकारी पुलिस अधीक्षक राज्य मंत्री व अन्य अधिकारी तत्काल घटना स्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेते हुए मालवा हटाए जाने एवं मजदूरों के शव निकल जाने व मामले की जांच करा कर करवाई किये जाने की बात कही। घटना को लेकर राज्य मंत्री संजीव कुमार गोंड ने कहा कि यह घटना बहुत ही दुखद है उक्त मामले की जांच करा कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। खबर लिखे जाने तक राहत कार्य जारी था।
सोनभद्र-मुख्यमंत्री के आगमन का असर, बंद हुए क्रशर प्लांट, रुका प्रदूषण, प्रशासन की कार्यशैली संदिग्ध.! उठे सवाल.! https://mediahousepress.com/effect-of-sonbhadra-chief-ministers-arrival-crusher-plant-stopped/
सूत्रों की माने तो जिस क्षेत्र में खनन कार्य हो रहा था व टीला गिरा है वह क्षेत्र लीज सीमा से बाहर है.! खदानों में बिना सेफ्टी के कार्य हो रहा था, खदानों में कार्य करने वाले मजदूरों का कोई रिकॉर्ड नहीं होता है, जिससे यह पता चले की खदान में कार्य करने वाले मजदूर कहां के थे, क्या उन सभी मजदूरों का बीमा था कि नहीं जो जांच का विषय है।











