एमपी ने एचपीवी टीकाकरण में दिखाया नेतृत्व, 5 लाख का हुआ वैक्सीनेशन, पश्चिम बंगाल में एक भी किशोरी को नहीं लगी वैक्सीन

 भोपाल
 सर्विकल कैंसर से बचाव के लिए ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) रोधी टीकाकरण अभियान में मध्य प्रदेश ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। 28 फरवरी से शुरू हुए विशेष अभियान के तहत 14 से 15 वर्ष की किशोरियों को टीका लगाने का लक्ष्य तय किया गया था।

प्रदेश में इस आयुवर्ग की अनुमानित संख्या आठ लाख है, जिनमें से 12 अप्रैल तक पांच लाख 86 हजार यानी 73 प्रतिशत किशोरियों को टीका लगाया जा चुका है। खास बात यह है कि केंद्र द्वारा निर्धारित छह लाख टीकाकरण का लक्ष्य भी प्रदेश ने समय रहते पूरा कर लिया है, जबकि अन्य बड़े राज्य इस मामले में काफी पीछे हैं।

देवास टीकाकरण अभियान के तहत 12457 बालिकाओं ने लगवाया टीका

जिले में कलेक्टर ऋतुराज सिंह के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। जिले में 10 स्थानों पर यह टीकाकरण किया जा रहा है।  मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ सरोजिनी जेम्स बेक ने बताया कि जिला चिकित्सालय देवास सहित स्वास्थ्य केंद्रों में 14 वर्ष की बेटियों को टीका लगाया जा रहा है। अब तक देवास जिले में अभियान के दौरान 12457 बालिकाओं ने सर्वाइकल कैंसर से बचाव का टीका लगवाया है।  जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सुनील तिवारी ने बालिकाओं के अभिभावकों से आग्रह किया है कि वे अपनी किशोरी बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण अवश्य कराएं और उन्हें सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित भविष्य प्रदान करने में सहयोग करें।

MP के कई जिलों ने 90% से अधिक लक्ष्य हासिल किया
एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान में जिला स्तर पर भी बेहतर प्रगति देखने को मिल रही है। डिंडोरी और राजगढ़ ने 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया है, जबकि खंडवा (98.47%) और बालाघाट (96.50%) भी लक्ष्य के बेहद करीब हैं। सागर में 92.86% और खरगोन में 91.11% टीकाकरण दर्ज किया गया है।

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भोपाल संभाग के रायसेन (89.26%) और नर्मदापुरम (87.82%) में भी अच्छी प्रगति हुई है। कटनी में 83.41% और मुरैना में 82.87% कवरेज दर्ज किया गया है। खास बात यह है कि सागर जिले में एक सप्ताह में 10,537 टीकाकरण कर तेजी दिखाई गई।

अन्य राज्यों की स्थिति कमजोर
यू-विन पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 10 अप्रैल तक गुजरात में 36 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 34 प्रतिशत, कर्नाटक में 24 प्रतिशत और महाराष्ट्र में मात्र तीन प्रतिशत टीकाकरण हो सका है। वहीं उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य एक प्रतिशत लक्ष्य भी हासिल नहीं कर पाए हैं। इससे स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश ने इस अभियान को गंभीरता से लागू कर बेहतर परिणाम हासिल किए हैं।

कई विभागों के समन्वय से मिली गति
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस सफलता के पीछे विभिन्न विभागों की संयुक्त भागीदारी अहम रही। स्कूल शिक्षा विभाग ने जागरूकता अभियान चलाया, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने किशोरियों को टीकाकरण केंद्रों तक पहुंचाने में सहयोग किया, जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग ने अभिभावकों को प्रेरित किया। इसके अलावा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने पीडीएस दुकानों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का काम किया। शुरुआती धीमी गति के बाद इसी समन्वय से अभियान ने रफ्तार पकड़ी।

अब नियमित टीकाकरण के रूप में जारी रहेगा अभियान
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों का कहना है कि विशेष अभियान को जल्द ही समाप्त कर इसे नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके तहत जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, सिविल अस्पतालों और चयनित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में निर्धारित दिनों पर टीका लगाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किशोरियां लाभान्वित हो सकें।

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टीकाकरण से 70-80 प्रतिशत तक बचाव संभव
एम्स भोपाल के पूर्व स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय हलदर के अनुसार, सर्विकल कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस है। एचपीवी टीका और नियमित पेप्समीयर जांच से इस बीमारी से 70 से 80 प्रतिशत तक बचाव संभव है। वर्तमान में एक डोज का टीका लगाया जा रहा है। निजी अस्पतालों में इसकी कीमत 1900 से 3000 रुपये के बीच है, जबकि शासकीय स्तर पर यह निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

देश के टॉप स्टेट में शामिल है एमपी
राज्य स्तर पर एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान का कुल लक्ष्य 8 लाख 3 हजार 684 किशोरियों को टीका लगाने का है। अब तक 2 लाख 8 हजार 873 का टीकाकरण हो चुका है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 25.99 प्रतिशत है। राष्ट्रीय स्तर पर एमपी का प्रदर्शन बेहतर है। टॉप स्टेट्स में प्रदेश शामिल है। हालंकि, शहरी क्षेत्रों के आंकड़े इस प्रदर्शन को कमजोर बना रहे हैं।

इन जिलों का प्रदर्शन भी चिंताजनक
रिपोर्ट में कई जिले ऐसे भी हैं जहां स्थिति बेहद चिंताजनक है। रीवा (9.59%), धार (7.93%), शिवपुरी (7.88%) और इंदौर (3.96%) जैसे जिलों में टीकाकरण 10 प्रतिशत से भी नीचे है। इन जिलों में जागरूकता की कमी, टीकाकरण को लेकर हिचक और अभियान की कमजोर मॉनिटरिंग को संभावित कारण माना जा रहा है।

हर साल सवा लाख महिलाएं आ रहीं चपेट में
भारत में हर साल करीब 1.25 लाख महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की चपेट में आती हैं और लगभग 75 हजार महिलाओं की मौत हो जाती है। यह बीमारी धीरे-धीरे विकसित होती है और शुरुआती चरण में अक्सर लक्षण नहीं दिखते। डॉक्टरों का कहना है कि किशोरावस्था में वैक्सीनेशन भविष्य में इस बीमारी से बचाव का सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है।

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ऐसे करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन
अभिभावक यू-विन डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए स्लॉट बुक कर सकते हैं। इसके अलावा सीधे नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर भी संपर्क किया जा सकता है। भोपाल में यह सुविधा 18 केंद्रों पर उपलब्ध है, जिनमें एम्स भोपाल, जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। टीकाकरण के समय उम्र का प्रमाण, मोबाइल नंबर और अभिभावक की सहमति जरूरी होगी।

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