16 दिसंबर को पुरे राज्य भर से 32 जनजाती सरना धर्म कोड को लेकर करेगी राजभवन का घेराव : भुवनेश्वर लोहरा

मीडिया हाउस न्यूज एजेंन्सी बोकारो : लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भुवनेश्वर लोहरा ने धनबाद जाने के क्रम में बोकारो में पत्रकारों से बातचीत की. बातचीत के दौरान उन्होनें बताया कि 6 दिसंबर को होने वाले भीम राव अंबेडकर की जयंती मनाई जानी है जिसको लेकर बोकारो में बातचीत हुई है जिसमें कहा है की भव्य तरीके से बोकारो तथा रांची में मनाया जाएगा। तथा 16 दिसंबर को पुरे राज्य भर से सरना धर्म कोड लेने के लिए 32 जनजाती राजभवन पहुंच रहे है और यह पहली कोई राजनीतिक दल सरना धर्म कोड लेने को लेकर अपना समर्थन दिया है और इसके लिए कटिबद्ध है जब तक सरना धर्म कोड नहीं मिलता है तो लोक जन विकास मोर्चा पुरे देश में आंदोलन करेगी। एक सवाल के जवाब उन्होंने कहा कि अगर आदिवासियों का सबसे बड़ा दुश्मन है तो वह आदिवासी है हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री थे और फिर होने वाले है उन्होंने विधानसभा में पारित करवाया.पारित करवा कर राज्यपाल के माध्यम से दिल्ली भेजना था लेकिन उन्होंने दिल्ली ना भेज कर के आदिवासियों को बेवकूफ बनाने का काम किये है। यह सही बात है कि राज्य सरकार के हाथ में नहीं है केंद्र सरकार के हाथ में है लेकिन राज्य सरकार को ईमानदारी तो बरतनी चाहिए उन्होंने ईमानदारी नहीं बरता। उन्होनें कहा की इस बार बिहार में होने वाले चुनाव में इस बार लोक जन विकास मोर्चा 243 सीट में से 101 सीट पर पार्टी चुनाव लड़ेगी।

● सरना धर्म कोड को लेकर लगातार होती रही मांग : सरना धर्म कोड को लेकर आदिवासी समाज लगातार संघर्षशील करती रही है जिसमें आदिवासी सेंगेल अभियान द्वारा बोकारो सेंगेल जिला अध्यक्ष सह बोकारो जोनल हेड सुखदेव मुर्मू ने कहा था कि 15 करोड़ आदिवासीयों जो प्रकृति पूजक है “सरना धर्म कोड” की घोषणा करें ताकि आदिवासीयों को जबरन ईसाई,हिन्दू,मुस्लिम आदि धर्म में धर्मातांरण से बाचाया जाए। अन्यथा आदिवासियों के साथ यह एक बड़ा संवैधानिक अन्याय होगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखंड द्वारा 5 जनवरी 2023 को आदिवासियों का ईश्वर मारंग बुरू (पारसनाथ पहाड़) को जैनों को लिखित सुपुर्द किया गया उसे आदिवासियों को अभिलंब वापस किया जाए। राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त संताली भाषा को  झारखंड में प्रथम राजभाषा बनाया जाए । ताकि हमें अपनी मातृभाषा में पढ़ने- लिखने (संवाद) का अवसर मिलें। साथ ही भारतीय करेंसी में भी संताली ऑल चिकी लिपि को भी अविलंब स्थान दिया जाए क्योंकि बाकि आठवीं अनूसूची में शामिल भाषाओं को भारतीय करेंसी में स्थान दिया गया है सभी आदिवासी गांव -समाज के स्वशासन व्यवस्था में वंशानुगत नियुक्त माझी -परगना आदि में संविधान कानून और जनतंत्र लागू किया जाए।

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