रेलवे का एफसीआई मजदूरों ना केन्द्र सरकार ना राज्य सरकार की दर से मिलती है मजदूरी,मिल रहा प्रति बोरी तीन रुपए 30 पैसे

गुड शेड के एफसीआई गोदाम में लोडिंग अनलोडिंग कर रहे मजदूर शोषण के शिकार

ना केन्द्र सरकार और ना ही राज्य सरकार की दर से मिलती है मजदुरी

मजदूरों को दी जाती है प्रति बोरी 3 रुपए 30 पैसे

सेटिंग गेटिंग मिलिभगम से मजदूरों का डकार रहे लाखों का निवाला

मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी बोकारो : बोकारो से एक बडी‌ खबर आ रही है जिसमें एफसीआई के रेलवे बैंगन से आ रही अनाज को लोडिंग और अनलोडिंग कर रहे श्रमिक दोहन का शिकार हो रहे हैं। रेलवे का वैगन से एफसी आई का चावल जो आता है। बोकारो में एफसीआई का तीन गोदाम है जिसमें एक काशी झरिया दुसरा कृषि बाजार समिति और तीसरा बहादुरपुर में है। बोकारो के रेलवे स्टेशन समीप गुड शेड माल गोदाम में आये ट्रेन के बोगियों में आये अनाज को‌ ट्रकों में लोड कर गोदाम में भेजा जाता है। रेलवे के‌ रेल में रेक के अनुसार माल आता है। कभी रेक 28 का कभी 29 का तो कभी 42 का तो कभी 56 का रेक होता है रेक के अनुसार चावल आता है और फिर बोगी को खाली करने की प्रक्रिया शुरू होती है। एक बोगी में 1300 बोरी होता है जिसमें एक मजदूर को एक बोरी पर 3 रुपए 30 पैसे की मजदूरी दी जाती है। एक बोगी को खाली करने में 8 से 10 मजदूर शामिल होते हैं।

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केंद्र सरकार की नियमावली की माने तो लोडिंग और अनलोडिंग श्रमिकों के लिए संशोधित न्यूनतम मजदूरी दरें जारी की गई है। यह दरें रेलवे माल गोदाम, बंदरगाहों, हवाई अड्डों और वेयर हाउस में काम करने वाले अकुशल मजदूर श्रमिकों के लिए लागू है। जिन्हें क्षेत्र ए ,बी, सी की कैटेगरी में बांटा गया है। क्षेत्र A मेट्रो शहर में : लगभग ₹8 सौ 27 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से मिलना है। क्षेत्र B में अन्य शहर में : लगभग ₹6 सौ 93 रूपए प्रतिदिन के हिसाब से और क्षेत्र C ग्रामीण/कस्बे में लगभग ₹5 सौ 56 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से मिलना तय है। लेकिन गुड शेड में लोडिंग कर रहे मजदूर शोषण के शिकार हो रहे हैं। झारखंड सरकार की माने तो राज्यपाल के आदेशानुसार श्रम नियोजन विभाग के द्वारा लोडिंग और अनलोडिंग में मजदूरों का लादने और उतारने में 20 किलो से कम 4 रुपए 30 पैसे मिलना है 20 किलो से 40 किलों में 6 रुपए 20 पैसे मिलना है और 41 किलो से 65 किलों में 9 रुपए 10 पैसा मिलना है 66 किलो से 85 किलो में 12 रुपए 40 पैसे और 86 किलो से 100 किलो में 15 रुपए 10 पैसे और 100 किलो से अधिक में 15 रुपए 10 पैसा और प्रति किलो 2 रुपये दिया जाना है।
एफसीआई पदाधिकारी की माने तो लोडिंग और अनलोडिंग श्रमिकों को मिनिमम वेज 6 सौ 93 रुपए दिया जाना है। लेकिन गुड शेड के रेलवे बैंगन से चावल ढोने और उतारने वाले मजदूरों को ना केन्द्र सरकार की नियमावली से पैसे मिलते हैं और ना ही राज्य सरकार के नियमावली के अनुसार पैसे मिलते है। केंद्र सरकार के द्वारा अगर मजदूरों को मजदूरी प्रतिदिन के हिसाब से 6 सौ 93 रूपए मिलती तो मासिक 21 हजार के आसपास मजदूरों को मजदूरी मिलती और राज्य सरकार के नियमावली के अनुसार मजदूरों को अगर मजदूरी मिलती तो 9 रुपए 10 पैसे प्रति बोरे के हिसाब से मिलती लेकिन मजदूरों को ना केन्द्र सरकार की नियमावली से मिलती है और ना ही राज्य सरकार की नियमावली के अनुसार मजदूरी मिलती है। लोडिंग और अनलोडिंग कर रहे मजदूर दोनों से वंचित हैं और उन्हें मिलता है प्रति बोरी 3 रुपए 30 पैसे के हिसाब से और इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है आखिर मजदूर अपना दुखड़ा सुनाये तो किसे सुनाएं क्योंकि मजदूरों के हक का निवाला खा रहे लाखों करोड़ों डकार रहें हैं और इसमें ऊपर से नीचे तक सबका अपना- अपना हिस्सा फिक्स है। मजदूरों के लिए मजदूर दिवस मनाया जाता है मजदूरों के हक हुकूक की बात की जाती है लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है जो केंद्र सरकार और राज्य सरकार को इस पर ठोस पहल करते हुए सकारात्मक ठोस कारवाई करने की जरूरत है। लेबल कमिश्नर की माने तो यह मामला उनके संज्ञान में आया है जांच कर मजदूरों को जो उचित मजदूरी होगी वह दिलाने का काम करेंगे।

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