2030 में उत्पन्न होने वाले जलसंकट से निपटने को वेदांता तैयार

वेदांता ने 2026 में किया 85 मिलियन घन मीटर से अधिक जल संरक्षण

मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी नई दिल्ली/बोकारो : विश्व जल दिवस के अवसर पर, वेदांता लिमिटेड (NSE: VEDL), भारत की अग्रणी प्राकृतिक संसाधन कंपनी, ने घोषणा की कि उसने वित्त वर्ष 2026 (फरवरी तक) में अपने विभिन्न परिचालनों में 85 मिलियन घन मीटर से अधिक जल का पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग किया है। यह मात्रा 34,000 से अधिक ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल के बराबर है। वैश्विक स्तर पर 2030 तक संभावित 40% जल संकट की चेतावनी के बीच, वेदांता एक मजबूत, टिकाऊ और तकनीक-आधारित जल प्रबंधन ढांचा विकसित कर रहा है। कंपनी का जल सकारात्मकता सूचकांक (Water Positivity Index) 0.63 है, जो इसके जिम्मेदार जल प्रबंधन दृष्टिकोण को दर्शाता है।

सुदृढ़ जल प्रबंधन रणनीति: वेदांता की जल प्रबंधन रणनीति तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है:

  • रिसाइकिल (Recycle): उपचारित जल का पुनः उपयोग कर फ्रेशवॉटर पर निर्भरता कम करना
  • संरक्षण (Conserve): प्रक्रियागत सुधारों के माध्यम से जल खपत में कमी
  • पुनर्भरण (Replenish): वाटरशेड विकास और भूजल रिचार्ज के माध्यम से जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना

कंपनी ने अपने परिचालनों में 31% जल पुनर्चक्रण दर हासिल की है, जो जल-गहन उद्योगों में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। साथ ही, वेदांता ने विभिन्न जल संरक्षण एवं भूजल रिचार्ज परियोजनाओं के माध्यम से 7 मिलियन घन मीटर से अधिक जल का संरक्षण/पुनर्भरण किया है।

 नवाचार और परिचालन उत्कृष्टता: वेदांता अपने परिचालनों में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग कर जल दक्षता को बढ़ा रहा है:

BALCO में कूलिंग टॉवर ब्लोडाउन जल के पुनः उपयोग से प्रतिदिन लगभग 4,800 घन मीटर जल की बचत मीणाक्षी एनर्जी लिमिटेड में 100% समुद्री जल (saline water) का उपयोग, जिससे फ्रेशवॉटर की आवश्यकता समाप्त विभिन्न इकाइयों में क्लोज्ड-लूप वाटर मैनेजमेंट सिस्टम का कार्यान्वयन

सामुदायिक प्रभाव और सामाजिक पहल: विश्व जल दिवस 2026 की थीम “जल और लैंगिक समानता -जहां जल बहता है, वहां समानता बढ़ती है” के अनुरूप, वेदांता जल संरक्षण को सामाजिक विकास से जोड़ रहा है।

  • 225+ गांवों में जल एवं WASH कार्यक्रम
  • 10.5 लाख से अधिक लोगों को लाभ
  • सोलर संचालित बोरवेल, RO प्लांट और जल संरचनाओं के माध्यम से 30 लाख लीटर स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति
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मुख्य कदम: राजस्थान में नाड़ियों (तालाब) और खडीन का निर्माण वर्षा जल संचयन संरचनाओं का विकास पंजाब और ओडिशा में तालाबों का पुनर्जीवन और भूजल रिचार्ज लांजीगढ़ में जल संरचनाओं के माध्यम से सिंचाई और जल उपलब्धता में सुधार

ईएसएल स्टील का योगदान: वेदांता लिमिटेड की सहायक कंपनी ईएसएल स्टील लिमिटेड ने भी वित्त वर्ष 2026 में जल स्थिरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है:

• फ्रेशवॉटर उपयोग में वित्त वर्ष 2026 में 6% की कमी दर्ज की गई, जो संरक्षण और जिम्मेदार उपयोग के प्रति ईएसएल की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

 • ईएसएल की जल पुनर्चक्रण क्षमता वित्त वर्ष 2026 में 32% तक पहुंच गई है, जो बेहतर जल प्रबंधन और फ्रेशवॉटर पर निर्भरता में कमी को दर्शाता है। 

• ⁠575 केएलडी की कुल क्षमता वाले 5 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित किए गए हैं, जिनके माध्यम से अपशिष्ट जल का उपचार कर उसे बागवानी एवं सड़कों पर छिड़काव के लिए पुनः उपयोग किया जा रहा है।

• ⁠सीएसआर पहलों के तहत दो स्थानों-हुथुपाथर (3,300 घन मीटर) और अलकुशा (4,500 घन मीटर) में तालाबों का पुनर्जीवन किया गया है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को दैनिक उपयोग, कृषि एवं आजीविका के लिए बेहतर जल उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है।

 नेतृत्व की प्रतिक्रिया: रवीश शर्मा, डिप्टी सीईओ एवं पूर्णकालिक निदेशक, ईएसएल स्टील लिमिटेड ने कहा:

“ईएसएल स्टील में जल संरक्षण हमारे सतत विकास दृष्टिकोण का अभिन्न हिस्सा है। हम लगातार जल उपयोग को अनुकूलित करने, पुनर्चक्रण बढ़ाने और जल सकारात्मकता की दिशा में कार्य कर रहे हैं। वेदांता समूह का हिस्सा होने के नाते, हमारा प्रयास है कि हम औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और समुदायों के जल सुरक्षा में भी सार्थक योगदान दें।”

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राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता: वेदांता की जल प्रबंधन पहलों को राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स को नीति आयोग द्वारा “वॉटर पॉजिटिविटी” प्रमाणन प्राप्त हुआ है, जो कंपनी की उत्कृष्ट जल प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है।

आगे की दिशा: वेदांता उन्नत तकनीकों, पारिस्थितिकी संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से 2030 तक पूर्ण रूप से नेट वाटर पॉजिटिव बनने के अपने लक्ष्य की दिशा में तेजी से अग्रसर है.

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