जिला खाद आपूर्ति विभाग की कार्यशाला में खाली रही कुर्सियां, डीलरों पर मनमानी का उठता रहा सवाल 

 दर्जन भर जनप्रतिनिधि ही कार्यशाला में हुए उपस्थित, अनियमितताएं का लगाया आरोप
खानापूर्ति करने को लेकर किया‌ गया था कार्यशाला का आयोजन
मीडिया हाउस न्युज एजेंसी बोकारो : बोकारो जिले के खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं आपूर्ति विभाग ने जन जागरण के लिए, सरकार की योजनाओं के  व्यापक प्रचार प्रसार करने को लेकर टाउन हॉल में तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में चंद जनप्रतिनिधि ही उपस्थित हुए और बाकी सभी कुर्सियां खाली रही। सभागार में उपस्थित दर्जन भर प्रतिनिधियों के साथ-साथ सभागार की खाली कुर्सियां खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की योजनाओं की जानकारी लेती रही। सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह रहा की इतनी महत्वपूर्ण कार्यशाला का जिसका मकसद ही था व्यापक जन प्रचार प्रसार कराना उस कार्यशाला में पत्रकारों को ही आमंत्रित करने की जरूरत नहीं समझी गई। जिले की खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी शालिनी खालको ने बताया कि इस कार्यशाला का मकसद ही था व्यापक जन प्रचार प्रसार करना ताकि आम लोगों को यह जानकारी मिल सके की सरकार उनके लिए कौन-कौन सी योजनाएं चला रही है और उनको लाभ कैसे मिल सके। लेकिन मजेदार बात तो यह रही कि जिनके माध्यम से इन योजनाओं का प्रचार प्रसार हो सकता था, जिनके जरिए आम लोगों तक सरकार की योजनाओं की जानकारी और बात पहुंचाई जा सकती थी उनसे ही इस कार्यशाला से दूरी बनाए रखी गई। पत्रकारों को इस महत्वपूर्ण कार्यशाला की न तो कोई जानकारी दी गई और ना ही कार्यशाला में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया। अब लोगों को यह समझ में नहीं आ रही है की ऐसे महत्वपूर्ण कार्यशाला में पत्रकारों से दूरी बनाने का क्या औचित्य था। विभाग ने प्रचार प्रसार के लिए पत्रकारों से दूरी बनाकर ऐसा कौन सा मेकैनिज्म डेवलप कर लिया है यह किसी के समझ में नहीं आ रही थी वैसे कहा जा रहा है की इस कार्यशाला का आयोजन जैसे तैसे करके खाना पूर्ति करने का प्रयास किया गया है। वैसे जिला आपूर्ति पदाधिकारी के पास भी इसका कोई जवाब नहीं था की कुर्सियां क्यों खाली रह गई, पत्रकारों से दूरी क्यों बना कर रखा गया। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निमंत्रण देना क्यों नहीं उचित समझा गया, बिना पत्रकारों को आमंत्रित किये प्रचार प्रसार की कल्पना करनेवाला जिला आपूर्ति विभाग के डीएसओ इस सवाल पर गोल मटोल बातें कर गई।

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वैसे इस कार्यशाला में खाली कुर्सिया यह बताने में सक्षम थी कि इस आयोजन में कितनी गंभीरता और लगन शीलता दिखाई गई है एक हजार से ज्यादा की क्षमता वाले टाउन हॉल की खाली कुर्सियां भी किसी के आने का बाट जोहती रही पर बेचारे कुर्सियों को भी मायूसी ही हाथ लगा। भाषण चला, कुर्सियों ने भी‌ भाषण सुने। वैसे इस कार्यशाला में शामिल लोगों को लगा कि उन्होंने आकर अपना समय बर्बाद ही किया है। जनप्रतिनिधियों को यह कार्यशाला उत्साहित करने की बजाय मायूस कर गया और जनप्रतिनिधियों ने खुलकर आपूर्ति विभाग के काम में अनियमितताओं का आरोप लगाया उन्होंने कहा कि, कहां जा रहा है कि डीलर द्वारा 3 महीने में चीनी का वितरण किया जाता है लेकिन यहां एक दिन भी चीनी का वितरण नहीं किया जाता है और ऐसा कोई कार्ड ही नहीं बना है जिस कार्ड में चीनी मिलता हो,चाहे वह लाल हो, पीला हो, हरा हो ऐसा तो होना चाहिए कि एक आदमी को भी मिलना चाहिए था एक जगह भी कहीं चीनी नहीं मिलता है। जिंदा व्यक्ति को भी मृत घोषित कर दिया जाता है। ग्रामीण इलाकों में डीलर द्वारा पहले अंगूठा ले लिया जाता है और फिर राशन भी नहीं दिया जाता है और मिलता भी है तो उस राशन में कटौती काट ली जाती है या फिर चावल की क्वालिटी बिल्कुल ही खराब रहती है। इन पर कारवाई करने के बजाय बस खाना पूर्ति करने का काम किया जा रहा है ऐसे कई अनियमितताएं है जो डीलर द्वारा खुलकर कार्डधारीयो के साथ मनमानी और वसूली किया जाता है। बता दें कि इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना, मुख्यमंत्री नमक वितरण योजना, मुख्यमंत्री चना दाल वितरण योजना, सोना सोबरन धोती साड़ी वितरण योजना एवं चीनी वितरण योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी आम लोगों तक पहुंचानी थी लेकिन लोगों को निराशा ही हाथ लगी। विभाग इसे चाहे जितना सफल कार्यक्रम बता ले कार्यक्रम पर अपनी पीठ थपथपा ले पर इस कार्यक्रम में शामिल जनप्रतिनिधि ही इसकी सच्चाई बयां कर गए।

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