जापान में 6.9 तीव्रता के भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी

टोक्यो, 13 जनवरी (आईएएनएस)। जापान के दक्षिण पश्चिमी हिस्से में 6.9 तीव्रता का भूकंप आने के बाद सोमवार शाम सुनामी की चेतावनी जारी की गई।

जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी ने बताया कि रात 9.19 बजे आए भूकंप की तीव्रता मियाजाकी प्रान्त के कुछ हिस्सों में जापानी भूकंपीय पैमाने 5 से कुछ अधिक मापी गई। जापान के भूकंपीय स्केल में अधिकतम मान 7 है। वहीं अधिकतम 10 मान वाले रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.9 मापी गई।

मौसम एजेंसी ने मियाजाकी और कोची प्रान्तों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की है।

जापान टाइम्स के अनुसार, भूकंप का केंद्र ह्युगानाडा सागर में 30 किलोमीटर की गहराई पर था। भूकंप के तुरंत बाद, एजेंसी ने मियाजाकी और कोची प्रान्तों के तटों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की। उसने बताया है कि समुद्र में एक मीटर तक ऊंची लहरें उठ सकती हैं। आस-पास के लोगों से तट से दूर रहने और ऊंचे स्थानों पर जाने का आग्रह किया गया है।

चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि बीजिंग समय के अनुसार सोमवार रात 8.58 बजे शिजांग स्वायत्त क्षेत्र के शिगाजे में डिंगरी काउंटी में 5.0 तीव्रता का भूकंप आया।

चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र (सीईएनसी) के अनुसार, भूकंप का केंद्र 28.45 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 87.52 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था।

सीईएनसी द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भूकंप 10 किलोमीटर की गहराई पर आया।

पिछले सप्ताह 7 जनवरी को तिब्बत क्षेत्र में डिंगरी काउंटी में आए 6.8 तीव्रता के भूकंप के पीड़ितों की याद में सोमवार को एक स्मारक सेवा भी आयोजित की गई।

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सुबह 9.30 बजे, चामको टाउनशिप में सायरन गूंजने लगे, जहां यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। टाउनशिप स्क्वायर में एक विशाल बोर्ड लगा था, जिस पर सफेद मंदारिन और तिब्बती अक्षरों में डिंगरी भूकंप में मारे गए लोगों के लिए “गहरा शोक” लिखा हुआ था।

सरकारी अधिकारियों, बचावकर्मियों और स्थानीय निवासियों सहित सैकड़ों लोगों ने अपनी टोपियां उतारीं और मृतकों की याद में तीन मिनट तक मौन खड़े रहे।

पुनर्वास स्थलों पर, कुछ प्रीफैब घरों में पारंपरिक तिब्बती मक्खन के दीये टिमटिमा रहे थे, जो अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए शोक मनाने का एक तरीका है।

तिब्बत में आए इस भूकंप में 126 लोगों की जान चली गई। सोमवार को भूकंप के बाद सातवां दिन था, जो मृतकों के लिए बौद्ध अनुष्ठानों का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है।

–आईएएनएस

एकेजे/

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