पॉक्सो एक्ट: दोषी राजेश शर्मा को 3 वर्ष की कैद

– 6 हजार रूपये अर्थदंड, न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी
– अर्थदंड की धनराशि में से 3 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी
– करीब साढ़े 7 वर्ष पूर्व घर में घुसकर नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ किए जाने का मामला

Media House सोनभद्र। करीब साढ़े 7 वर्ष पूर्व घर मे घुसकर 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ किए जाने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट अमित वीर सिंह की अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए दोषसिद्ध पाकर दोषी राजेश शर्मा को 3 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। उसके ऊपर 6 हजार रूपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वहीं अर्थदंड की धनराशि में से 3 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक रायपुर थाना क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने रायपुर थाने में 18 जून 2018 को दी तहरीर में आरोप लगाया था कि सुबह 7:30 बजे वह अपनी पत्नी के साथ अपने पुराने घर का खपरैल लेने गया था उसकी 16 वर्षीय नाबालिग लड़की घर पर अकेली थी तभी राजेश शर्मा पुत्र रामवृक्ष शर्मा निवासी पनिकप खुर्द, थाना रायपुर, जिला सोनभद्र घर में घुस गया और बेटी के साथ अश्लील हरकत करने लगा तथा उसे मोबाइल देने लगा कि इससे खूब बात होगी। जब बेटी ने मोबाइल लेने से इनकार किया तो वह अकेला पाकर बेटी के साथ छेड़छाड़ करने लगा। जब बेटी चिल्लाने लगी तो वह भागने का प्रयास किया तभी वह अपनी पत्नी के साथ आ गया और राजेश शर्मा को पकड़ लिया। कुछ ही देर में राजेश शर्मा के घर के लोग लाठी डंडा लेकर आ गए और गाली देते हुए जान मारने की धमकी देने लगे। आसपास और गांव घर के लोग मौके पर आ गए तब वे लोग चले गए।आवश्यक कार्रवाई करें। इस तहरीर पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दिया और पर्याप्त सबूत मिलने पर कोर्ट में राजेश शर्मा के विरूद्ध चार्जशीट विवेचक ने दाखिल किया था।

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मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्को को सुनने, 8 गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी राजेश शर्मा (38) वर्ष को 3 वर्ष की कठोर कैद एवं 6 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वही अर्थदंड की धनराशि में से 3 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी। अभियोजन पक्ष की ओर ले सरकारी वकील दिनेश प्रसाद अग्रहरि, सत्यप्रकाश त्रिपाठी और नीरज कुमार सिंह ने बहस की।

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