डाला-कचरे से फैल रहा है भयंकर दुर्गंध.! सात सूत्री मांग, राज्य मंत्री, सदर विधायक, जिलाधिकारी को ज्ञापन.!

मीडिया हाउस सोनभद्र- लक्ष्य एक समाजसेवी संस्था के पदाधिकारी अजय बिन्द, इंतजार सिंह ने क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री डाला के प्रबंधक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सात सूत्री मांग व समस्याओं को लेकर राज्य मंत्री संजीव गोंड़, सदर विधायक भूपेश चौबे, जिलाधिकारी सोनभद्र को ज्ञापन देते हुए न्याय की गुहार लगाई है। ताकि समस्याओं का समाधान हो सके।

आरोप लगाते हुए कहा कि अल्ट्राटेक सीमेन्ट लिमिटेड कम्पनी जब से आयी है, डाला के आस-पास अनेको समस्यायें उत्पन्न हो गई है। अल्ट्राटेक सीमेन्ट लि० द्वारा क्षेत्र में दुर्गन्ध फैलाया जा रहा है, जिससे अनेको गम्भीर बीमार हो रही है। आस-पास के क्षेत्रों में कम्पनी द्वारा जो प्रदूषण किया जा रहा है उससे हरे-भरे पेड़-पौधे, जीव-जन्तु, मानव जाति पर बहुत ही बूरा प्रभाव पड़ रहा है। कम्पनी द्वारा वेलफेयर (C.S.R.) के नाम पर सिर्फ दिखाया किया जा रहा है इत्यादि इन सभी समस्याओं को लेकर समाजसेवियों द्वारा समय-समय पर पत्रकों के माध्यम से जिला प्रशासन एवं यूनिट हेड को अनेको बार अवगत कराया जा चुका है फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

ज्ञात हो कि लक्ष्य एक समाज सेवी संस्था द्वारा मा० उच्च न्यायालय में आवेदन संख्या- 18317/2010 से सम्बन्धित जितने भी मामले है, अभी तक यथावत् बने हुए है। वर्तमान में बनवासी सामाजिक विकास समिति द्वारा मा० उच्च न्यायालय में आवेदन संख्या-18317/2010 विचाराधीन में पड़े हुए थे, उसी आवेदन स० को पुनः चालू कराने के लिए आवेदन सं0 577/2023 में उक्त संस्था के अध्यक्ष मदन प्रसाद अग्रहरी द्वारा दाखिल किया गया है, जिसकी अगली सुनवाई दिनांक 01/04/2026 को होनी है।

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क्षेत्र की गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए जनहित में निम्नलिखित माँग करते हैं।
1- डाला मलीन बस्ती जिसका रकवा नं0 113 व 179 है, जिसका मुकदमा मा० उच्च न्यायालय में वर्ष 2009-10 में लक्ष्य सस्था द्वारा किया गया था, जिसका आवेदन सं० 18317 है, किसी कारणवश केस की पैरवी समय से न करने की बजह से 2012 में विपक्षी के पक्ष में एक तरफा आदेश हो गया उसके पश्चात् वनवासी सामाजिक विकास समिति के अध्यक्ष मदन प्रसाद अग्रहरी पूर्व मण्डल उपाध्यक्ष ( भाजपा) के द्वार आवेदन सं0 577/2023 में पुनः मा० उच्च न्यायालय में अपील किया गया जिसकी सुनवाई मा० उच्च न्यायालय (इलाहाबाद) प्रयागराज में दिनांक 16/03/2026 को हुई जनहित को देखते हुए अगली सुनवाई दिनांक 01/04/2026 को सही है। श्रीमान जी से एवं माननीय जी से निवेदन है कि जब तक मलीन बस्ती डाला का पूर्ण समाधान न हो जाय मलीन बस्ती वासियों को मालिकाना हक न मिल जाय तब तक निगरानी रखी जाय।

(2) लक्ष्य संस्था द्वारा वर्ष 2009-10 में मा० उच्च न्यायालय (इलाहाबाद) प्रयागराज में गाटा नं0 113 व 179 पर मलीन बस्ती डाला को लेकर एक जनहित याचिका लगाई गई थी उस याचिका से सम्बन्धित मा० उच्च न्यायालय में पक्ष व विपक्ष के अधिवक्ताओं के द्वारा जिरह हो रहा था उसी समय विपक्षी अधिवक्ता के द्वारा यह कहा गया कि डाला मलीन बस्ती में 218 घरों की पहचान की गई है. उसमें से लगभग 118 लोग एक लाख रू० व 1 विश्वा जमीन लेने के लिए तैयार है. इतना सुनते ही मा० न्यायमूर्ति द्वारा लक्ष्य संस्था के अध्यक्ष अजय बिन्द पर जुर्माना लगाने की बात की गई। मा० महोदय पूर्व कम्पनी व राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारी गण व कुछ तथाकथित लोगो के द्वारा अफवाह फैलाकर धोखे से हस्ताक्षर कराकर 1 विश्वा जमीन व एक लाख रू० लेने के लिए साजिश के तहत् लिस्ट तैयार की गई थी। चूँकि मलीन बस्ती डाला का निस्तारण हो रहा है, इसके साथ-साथ विस्थापितों के समस्याओं का भी निस्तारण माननीय द्वारा किया जाय।

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(3) यह कि कुछ अराजक तत्वों द्वारा यह अफवाह फैलाया गया कि लक्ष्य संस्था के अध्यक्ष अजय बिन्द एवं अन्य पदाधिकारी सवा करोड़ में बिक गये है, जिसके पश्चात् हम सब पर भद्दी-भद्दी गालियों के साथ जानलेवा हमला भी हुआ तथा मान-सम्मान पर गहना आघात हुआ हम सबको मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी इसकी जाँच कराई जाय और हम सबका मान-सम्मान वापस दिलाया जाय कुछ अराजक तत्वों द्वारा पुनः जान लेवा हमला करने कराने एवं मान-सम्मान को ठेस पहुँचाने के लिए षड्यन्त्र रची जा रही है इसकी जाँच कराकर उचित कार्यवाही की जाय।

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(4) डाला मलीन बस्ती में डाला पुलिस चौकी के बगल में गाटा सं0 179 पर एक डा० अम्बेडकर पार्क था जिसमें संविधान निर्मता बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर की मूर्ति स्थापित थी, जिससे कुछ लोगो के मिली भगत से उनकी जयन्ती के दिन हटा दिया गया है। उसे अल्ट्राटेक सीमेन्ट लि० द्वारा ट्रक पार्क बना दिया गया है उसे खाली कराकर बाबा साहब की वो मूर्ति उनकी 135वीं जयन्ती 14 अप्रैल, 2026 को स्थापित कर संविधान निर्माता बाबा साहब डा० भीमराव अम्बेडकर जी को सम्मान दिया जाय। (फोटो संलग्न)

(5) वर्ष 2008 के एक रिपोर्ट के अनुसार दी यू०पी० स्टेट सीमेन्ट कारपोरेशन लि० यूनिट डाला के नाम वर्तमान अभिलेख कोटा, परगना अगोरी, जनपद- सोनभद्र (सन् 1410-1415फ0) में कुल 248,9290 हे० भूमि अंकित थी, बाद में यह भूमि बढ़कर 487,8090हे० हो गई इसे जाँच कराकर राजस्व खाते में दर्ज कराई जाय। यह कि एक रिपोर्ट के अनुसार वन भूमि के सर्वे एजेन्सी का काम एक जुलाई 1994 को खत्म मान लेने के निर्देश भी कोर्ट ने दिये थे, उ०प्र० सरकार को भी धारा-20 की कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया गया था। 12 गाँव को छोड़कर क्योंकि कई कारणों से सर्वे का कार्य पूरा नहीं हुआ था किन्तु मा० सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद भी दावों की सुनवाई चलती रही धारा-20 की र्कावाही 421 में से सिर्फ उन्हीं पाँचों गाँवों कोटा, पड़रछ, बनारी, मकड़ी बारी व मारकुण्डी में पूरी हुई जहाँ 1083,31 हे0 जमीन पूर्व कम्पनी को छोड़ी जानी थी किन्तु पूर्व उ०प्र० सरकार द्वारा कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर उसे वापस ले लिया गया, फिर कुछ माह बाद सरकार द्वारा इसे पुनः वापस दे दिया गया। हालॉकि 1994 से लेकर अब तक एक लाख हे० से ज्यादा वन भूमि अवैध तरीके से प्रभावशाली रसूखदारों तथा गैर आदिवासियों के नाम की जा चुकी है। इसकी जाँच कराकर इन जमीनों को राजस्व खातें में दर्ज किया जाय।

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(6) अल्ट्रटेक सीमेन्ट लि० द्वारा डाला नगर के आस-पास गिला कूड़ा-कच्छा जलाकर प्रदूषण दुर्गन्ध फैलाया जा रहा है, जिससे लगभग 5 कि०मी० के दायरे में आस-पास में रहने वाले मानव जीवन व पशु-पक्षी, फसले, पेड़-पौधे व जीव-जन्तू इत्यादि पर बूरा प्रभाव पड़ रहा है। इस प्रदूषण और दुर्गन्ध से गम्भीर बिमारियों (अस्थमा, ब्रोंकाईटिस) कैंसर, त्वचा संक्रमण, एलर्जी हृदय रोग जैसी जान-लेवा बिमारियों हो सकती है। एक तरफ यहाँ के लोगो को अल्ट्रटेक सीमन्ट लि० द्वारा नौकरी, रोजगार नहीं दिया जा रहा है एवं वेलफेयर (C.S.R.) के नाम पर सिर्फ कागजी कार्यवाही की जा रही है। U.T.C.L. द्वारा शुद्ध हवा में दुर्गन्ध फैलाकर पूरे क्षेत्र को ही गम्भीर बिमारियों की तरफ ढकेला जा रहा है। इस विषय को लेकर डाला नगर अध्यक्ष फूलवन्ती देवी, सभासद एवं समाज सेवियों द्वारा विरोध किया जा चुका है। जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह एवं क्षेत्रीय अधिकारी आर के सिंह के रिपोर्ट के अनुसार स्पष्ट आदेश दिया गया है कि अनुबन्धित ईंधन के अतिरिक्त कोई अन्य सामग्री कोई गिला कूड़ा-कचड़ा जलाया नहीं जायेगा। किन्तु जान बूझकर गिला कूड़ा-कचड़ा जलाकर दुर्गन्ध फैलाया जा रहा है। इसकी जॉच कराकर U.T.C.L. डाला के अधिकारियों पर FIR दर्ज कराई जाय। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (N.G.T.) ने सोनभद्र जिले में U.T.C.L. यूनिट डाला के विरूद्ध एक याचिका में यह कहा गया है कि यूनिट डाला से निकलने वाली जहरीली गन्ध के कारण निवासियों को जानलेवा बिमारियों का सामना करना पड़ रहा है इसमें स्पष्ट है कि U.T.C.L. कम्पनी डाला तानाशाही रवैया अपना रही है। इस पर रोक लगाकर उचित कार्यवाही करें।

(7) अल्ट्राटेक सीमेन्ट लि० डाला द्वारा भलुआ एवं जुलगुल माईन्स स्टोन खदान से खनन कर नं 1 सीमेन्ट बनाने का दावा कर पोस्टर एवं दीवारों पर प्रचार किया जा रहा है उन खदानों का क्षेत्रफल 17,155हे0 में रिजेक्ट क्वालिटी स्टोन एग्रीगेट को अलग से चिन्हित करने का उल्लेख किया गया है। स्थालीय भूवैज्ञानिक एवं पूर्व अन्वेषण का भी अध्ययन किया गया था। भलुआ व जुलगुल माईन्स के खदानों के चट्टानों से प्राप्त बोर होल कोर तथा नमूनों के परिणामों के आधार पर इसकी ऊपरी सतह पर रिजेक्ट स्टोन के समान्यतः अधिक मात्रा में निकलने की सम्भावना है। यह कही गई थी शासनादेश सं० -6163/77-5-2001-257/91 के अनुसार रिजेक्ट स्टोन है, जिसकी उपयोगिता सीमेन्ट उद्योग में नहीं है। इसे बालाजी माईन्स एण्ड मिनरल्स को मात्र खनन करन के लिए दिया गया था। दिनांक 16/07/2005, 18/07/2005, 20/0/2005 से 22/07/2005, 25/08/2005 से 28/07/2005 के मध्य जनपद सोनभद्र के भलुआ जुलगुल लाईम स्टोन के प्रश्नगत खनन क्षेत्र का स्थलीय / भूवैज्ञानिक निरीक्षण किया गया इस निरीक्षण के उपरान्त देखा गया कि पूरे लाईम स्टोम सीमेन्ट बनाने के उपयोग में नहीं है फिर किस आधार पर U.T.C.L. यूनिट डाला के द्वारा नं01 का सीमेन्ट बनाने का भ्रामक प्रचार किया जा रहा है।

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खनन करने से माईन्स में जो बड़े-बड़े गड्‌ढे हुए है, गड्‌ढे होने से जल एवं पर्यावरण दोहन हो रहा है इसकी तत्काल जाँच कराकर अल्ट्राटेक सीमेन्ट लि० यूनिट डाला पर उचित कार्यवाही किये जाने को लेकर डाक द्वारा पत्राचार करते हुए जिलाधकारी सोनभद्र, मुख्यमंत्री उ०प्र० सरकार, प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली, मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय प्रयागराज, समाज कल्याण मंत्री उ०प्र० सोनभद्र, विधायक (सदर) जिला सोनभद्र, मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली को पत्र भेजकर कार्यवाही की मांग की है।

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