अमृत सरोवर.! भ्रष्टाचारी चहेते ठेकेदार, चहेते अधिकारी के प्रति मौन जिले के उच्च अधिकारी.!

कृपा शंकर पांडे,मीडिया हाउस न्यूज एजेंसी 12ता. चोपन सोनभद्र –यूपी के सोनभद्र में वैसे तो भ्रष्टाचार शब्द नया नहीं है। हर विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार को बड़ी आसानी से अंजाम दिया जाता है। क्षेत्र की जनता भ्रष्टाचार शब्द सुनकर शायद अब ऊब चुकी है। लेकिन हर मंच से सरकार की जीरो टोरलेंस नीति की बखान से जनता एक बार फिर मुखर होकर भ्रष्टाचार की पोल खोलने में लग गई है। एनडीए सरकार में अधिकारियों को जो खुली छूट मिली है वो कहि न कही सरकार की किरकिरी जरूर करा रही।

हालांकि सरकार उन अधिकारियों पर लगाम लगाने की तनिक भी प्रयास नहीं करती जो उनके विचार के अधिकारी है या फिर सोनभद्र जिले में धन बल या किसी और लिंक से अधिकारी बनकर आये है। बात की जाय सरकार की अहम योजनाओं में से एक अमृत सरोवर की तो जिस मंशा से अमृत सरोवर का निर्माण कराया जाना था उस अमृत को जहर में तब्दील कर दे रहे चोपन ब्लॉक के अधिकारी। चोपन ब्लॉक के अधीन आने वाले चोपन गांव क्षेत्र में अमृत सरोवर निर्माण में जमकर भ्रष्टाचार के मशाले और स्थानीय पहाड़ों की बोल्डर व सोलिंग का उपयोग हो रहा है। बोल्डर भी कृषि कार्य हेतु उपयोग में लाये जाने वाले ट्रेक्टर से ढुलाई कर लाई जा रही है। जिसका परमिट भी शायद ही हो। काम मे हीलाहवाली होता देख स्थानीय जनता मुखर होकर विरोध कर रही है। मनरेगा के तहत लगे मज़दूर भी गर्मी में उस तेज़ी से काम नहीं कर पा रहे जिस तेजी से काम करना चाहिए।
दूसरा मजदूर कभी समय से नहीं आते और बेवक्त घर चले जाते है। क्योंकि मौके पर मनरेगा अधिकारी कभी आते ही नहीं। उनको भी तो गर्मी व धूप लगती है। ऊपर से मेटीरियल देने वाले ठेकेदार की पहुँच ऊपर तक होने की वजह से खराब मेटेरियल का भरपूर स्तेमाल किया जा रहा। बालू भी स्थानीय नदी से बिना परमिट के अवैध रूप से गिर रही है। जिसे पहुचाने का कार्य सायकल से बाहरी मज़दूर कर रहे। जोड़ाई का कार्य भी बस्सी से हो रहा। लूट की ऐसी महामारी चल रही जैसे मानो ठेकेदार व अधिकारी एक ही योजना से लखपति बन जाएंगे। जनता की माने तो अमृत सरोवर का शिलान्यास बकायदे मंत्रोच्चार के साथ सूबे के समाज कल्याण मंत्री संजीव गोंड ने किया था। मंत्रोच्चार के बाद भी घटिया काम का होना मानो भगवान को ही धोखा देना। शिलान्यास के बाद पूरे क्षेत्र में जोरशोर से प्रचार-प्रसार भी किया गया था अमृत सरोवर का। जनता ने उपहास करते हुए बताया कि, अमृत सरोवर के कई फायदे भी मंत्री साहब ने गिनाए थे मौके पर। सोचने वाली बात है कि, सरकार के मंत्री के क्षेत्र में खुले आम भ्रष्टाचार हो रहा हो उनको खबर भी न हो ऐसा कैसे हो सकता है। जबकि मंत्री जी की पत्नी चोपन ब्लॉक प्रमुख भी है। वही बीजेपी परिवारवाद के खिलाफ होने का दावा करती है।
ब्लॉक प्रमुख के ईदगिर्द अधिकारियों की फ़ौज रहती है। सूत्रों की माने तो ब्लॉक प्रमुख बनते ही मंत्री के सहयोगियो ने कमीशन का रेट बड़ा दिया है। बड़े हुए रेट पर अगर ठेकेदार आपत्ति जताते है तो उनको ब्लॉक से एक भी काम नहीं मिलेगा। ऐसे में वो बेरोजगारी की मार झेल नहीं सकते। आखिर मरता क्या न करता वाली कहावत यहाँ सही साबित होती है। अगर ठेकेदार अच्छा कार्य कराए तो उसको घर से राशि लगानी पड़ सकती है। कुछ राशि कमिशन देने के बाद बच जाए इसलिए वो घटिया सामग्री का उपयोग करते है। वहीं निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने और निर्माण कार्य को गुणवत्ता युक्त मानकों के अनुरूप कराने की मांग स्थानीय लोगों ने की है। जब इस मुद्दे चोपन ब्लॉक के अधिकारियों का बयान लेने की कोशिश की गई तो पता चला कि वो आये नहीं है। हो सकता है किसी मीटिंग में जिले पर गए हो। सोमवार होने की वजह से छुट्टी के बाद गांव की जनता एक आस लेकर आई थी कि उनका काम होगा। लेकिन अधिकारी की ऑफिस से नदारद होने की वजह से फरियादी की एक तो गर्मी में समय की बर्बादी हुई दूसरा दूरदराज से आने वाले फरियादी का किराया भाड़ा भी नुकसान हुआ। सूत्र बताते है कि, गर्मी ज्यादा होने की वजह से अधिकारी या तो आते नहीं या फिर ऑफिस में कम ही समय देते है क्षेत्र में भर्मण करने के बहाने।
बताते चले कि, देश में भूमिगत जल का स्तर काफी गिरता जा रहा है ऐसे में हमारे सामने सिंचाई के लिए, पीने के लिए एवं उद्योगों के लिए पानी का संकट पैदा हो गया है। पानी के मुख्य स्रोत सूख जा रहे हैं। वर्षा जल का संरक्षण नहीं हो पा रहा है। वर्षा जल के संरक्षण के सबसे बड़े स्रोतों में से एक तालाब अब खत्म होते जा रहे हैं। इसलिए सरकार द्वारा पेयजल संकट से निपटने के लिए अमृत सरोवर योजना 2023 लाई गई है। अमृत सरोवर योजना का उद्देश्य तालाबों को पुनर्जीवित करना, उन्हें पर्यटन के लिए आकर्षक बनाना, उनका सौंदर्यीकरण करना, तालाब के चारों तरफ रोशनी की व्यवस्था करना, तालाब के चारों तरफ पेड़-पौधे लगाना एवं स्वच्छता कायम रखना है एवं लोगों को तालाबों के महत्व के प्रति जागरूक करना भी है।










