इस साल समाप्त हुए कई पुराने कानून

नई दिल्ली, 30 दिसंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से औपनिवेशिक युग के कानूनों को समाप्त करने और देश के कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाने के मिशन पर रहे हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने कम्प्यूटरीकृत भूमि रिकॉर्ड के लिए ई-धारा प्रणाली जैसी पहल के माध्यम से 7/12 व्यवस्था वाले पुराने भूमि राजस्व कानूनों में सुधार किया था। वहीं, 2014 में केंद्र में सत्ता में आने के बाद से उनकी सरकार ने 1,500 से अधिक पुराने कानूनों को खत्म कर दिया है।

इस साल भी कई पुराने कानूनों को समाप्त कर नए कानून लाए गए हैं। तीन नए भारतीय आपराधिक कानून देश में लागू हुए। वायुयान विधेयक, 2024 ने 1934 के वायुयान अधिनियम का स्थान लिया और समुद्री माल परिवहन विधेयक ने एक शताब्दी पुराने समुद्री माल परिवहन अधिनियम, 1925 की जगह ली।

तीन नए आपराधिक कानूनों में भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) विधेयक, 2023; भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता, 2023 और भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता, 2023 संसद ने दिसंबर 2023 में पारित किया था। तीनों इस साल 1 जून से प्रभावी हो गए। नए कानूनों को भारत की कानूनी प्रणाली के स्वदेशीकरण के कदम के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो काफी हद तक एक सदी से अधिक समय से औपनिवेशिक कानूनों पर आधारित रहा है।

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) का स्थान लिया है, जिसमें राजद्रोह कानून जैसे पुराने प्रावधान शामिल थे। इस कानून का इस्तेमाल ऐतिहासिक रूप से ब्रिटिश शासन के दौरान असंतोष दबाने के लिए किया जाता था।

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भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह ली है और यह इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के प्रावधानों सहित साक्ष्य प्रबंधन को आधुनिक बनाता है।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) का स्थान ले लिया है और इससे पुलिस हिरासत अवधि और संदिग्धों से निपटने की प्रक्रियाओं में बदलाव सुनिश्चित हुआ है।

नए कानूनों का उद्देश्य लोगों को न्याय देना है, सजा देना नहीं। इनकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं :

– जीरो एफआईआर को अपनाना : किसी भी थाने में एफआईआर दर्ज करना

– अधिकार क्षेत्र की परवाह किए बिना ई-एफआईआर : पुलिस स्टेशन जाए बिना एफआईआर दर्ज करना

– आतंकवाद को परिभाषित किया गया है – इसमें ‘सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने’ या ‘देश को अस्थिर करने’ वाले कृत्यों को शामिल करना शामिल है

– छोटे अपराधों के प्रति सुधारवादी दृष्टिकोण – चोरी या मानहानि जैसे छोटे अपराधों के लिए ‘सामुदायिक सेवा’ की शुरुआत, जिससे समुदाय को लाभ होगा

– मॉब लिंचिंग में उम्रकैद/मौत की सजा हो सकती है

– धोखेबाजी से शादी करने पर 10 साल की कैद हो सकती है

– नाबालिग का गैंगरेप – मृत्युदंड/आजीवन कारावास का प्रावधान

– वेश्यावृत्ति के लिए बच्चे को खरीदना या बेचना – सात से 14 वर्ष का कारावास

– बच्चे को त्यागने पर सात वर्ष तक के कारावास का दंड हो सकता है

इसके अलावा इस साल वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 भी चर्चा में रहा। वक्फ बोर्ड के काम को सुव्यवस्थित करने और वक्फ संपत्तियों के कुशल प्रबंधन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 8 अगस्त 2024 को लोकसभा में दो विधेयक, वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 पेश किए गए थे।

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वक्फ संशोधन विधेयक में वक्फ संपत्तियों के लिए एक केंद्रीकृत पोर्टल करने का प्रावधान है जिसमें दावों के लिए उचित दस्तावेज की आवश्यकता होगी। विधेयक में केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने का प्रस्ताव है। संशोधन ऑडिट और उन मुतवल्लियों (ट्रस्टी) को हटाने का प्रावधान करता है, जो उचित रिकॉर्ड बनाए रखने में विफल रहते हैं या भूमि पर अतिक्रमण करते हैं। इस विधेयक का उद्देश्य सरकारी संपत्तियों को वक्फ में बदलने पर रोक लगाना भी है।

शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बाद अब समग्र शैक्षिक मानकों को बढ़ाने और सार्वजनिक परीक्षा विधेयक 2024 के साथ एक योग्यता प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए तैयार है। सार्वजनिक परीक्षा विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में विश्वास बहाल करना और पूरे देश में सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक तथा धोखाधड़ी के व्यापक मुद्दे का मुकाबला करना है। इसमें परीक्षा अधिकारियों या सेवा प्रदाताओं से जुड़े संगठित अपराधों के लिए अपराधियों को तीन से 10 साल तक की कैद और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। यह विधेयक संभवतः संसद के इतिहास में अपनी तरह का पहला विधेयक है, जो पूरी तरह युवाओं को समर्पित है। यह सार्वजनिक परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करता है। विधेयक युवाओं को आश्वस्त करता है कि उनके वास्तविक प्रयासों को उचित रूप से पुरस्कृत किया जाएगा और उनका भविष्य सुरक्षित हो।

देश के विमानन क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। देश में हवाई अड्डों की संख्या 2014 के 74 से बढ़कर 2024 में 157 हो गए हैं, और 2047 तक इनकी संख्या 350-400 तक पहुंचने की योजना है। पिछले दशक में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या भी दोगुनी हुई है। साल 2024 में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू एयरलाइन बाजार बन गया। हमारा लक्ष्य 2030 तक चार बिलियन डॉलर के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) उद्योग के साथ अग्रणी एविएशन हब बनना है। वायुयान विधेयक, 2024 विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक कदम है।

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पहली बार यह विधेयक ‘स्टेट ऑफ डिजाइन’ की अवधारणा को पेश करता है, जो भारत को अपने विमान डिजाइनों को मंजूरी देने और प्रमाणित करने के लिए सशक्त बनाता है, जो विनिर्माण में आत्मनिर्भर भारत को प्रोत्साहित करने और विमानन क्षेत्र में व्यापार करने में आसानी को बढ़ाने के लिए किया गया था। इसका उद्देश्य भारत को विमानन उद्योग के भीतर एक प्रमुख एमआरओ हब के रूप में स्थापित करना है।

भारत, परमाणु पनडुब्बियों और विमान वाहक पोत के डिजाइन और निर्माण की क्षमता वाले विश्व के कुछ देशों में से एक है। इस तकनीकी विशेषज्ञता के साथ, देश में उद्योग के लिए आवश्यक अत्यधिक कुशल कार्यबल भी है। नाविक आपूर्ति करने वाले देश के रूप में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है और उसकी हिस्सेदारी 10-12 प्रतिशत है। इसके विपरीत चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख जहाज निर्माण राष्ट्र बढ़ी उम्र की आबादी से जूझ रहे हैं। इससे जहाज निर्माण में भारत के युवा कार्यबल को नेतृत्व करने का एक अनूठा अवसर मिला है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए दो विधेयक संसद में पेश किए गए हैं।

तटीय नौवहन विधेयक, 2024 की विशेषताएं इस प्रकार हैं :

– सरलीकृत लाइसेंसिंग : सबसे उल्लेखनीय परिवर्तनों में से एक तटीय व्यापार में लगे भारतीय-ध्वज वाले जहाजों के लिये सामान्य व्यापार लाइसेंस की आवश्यकता को हटाना है।

– तटीय नौवहन के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस का निर्माण।

– यह सुनिश्चित करके राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया गया है कि तटीय व्यापार मुख्य रूप से भारतीय नागरिकों के स्वामित्व और संचालित भारतीय ध्वज वाले जहाजों द्वारा संचालित किया जाता है।

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– समुद्री क्षेत्र में रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा करने का प्रयास करता है।

समुद्र द्वारा माल की ढुलाई विधेयक, 2024 की विशेषताएं इस प्रकार हैं :

– इस अधिनियम ने लगभग एक सदी पुराने कैरिएज ऑफ गुड्स बाय सी एक्ट, 1925 को बदल दिया।

– अब मालवाहकों को उच्चतर मानक पर रखा जाएगा, जिससे मालिकों और माल भेजने वालों को संभावित नुकसान से सुरक्षा मिलेगी।

– यह विधेयक भारत के कानूनी ढांचे को समकालीन वैश्विक कार्य प्रणालियों और समुद्री परिवहन को नियंत्रित करने वाले अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के साथ संरेखित करता है।

– विधेयक सरकार को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन के लिए निर्देश जारी करने, वैश्विक समुद्री क्षेत्र में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और अपने शिपिंग संचालन में विश्वास को बढ़ावा देने का अधिकार देता है।

– विधेयक समुद्री परिवहन में दक्षता, कानूनी स्पष्टता और सुरक्षा को बढ़ावा देता है, जिससे देश की व्यापार महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाया जाता है।

बिल्स ऑफ लैडिंग बिल, 2024 : इसका उद्देश्य सरलीकरण और समझ में आसानी की सुविधा के लिए भारतीय बिल ऑफ लैडिंग एक्ट, 1856 को निरस्त तथा फिर से अधिनियमित करना है। अधिनियम में कहा गया है कि लदान बिल, जहाज पर माल होने का निर्णायक सबूत है। विधेयक के अनुसार केंद्र सरकार बिल के प्रावधानों को लागू करने के लिए निर्देश जारी कर सकती है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मर्चेंट शिपिंग बिल, 2024 को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य अनुपालन बोझ को कम करना, टन भार को बढ़ावा देना, नाविकों के कल्याण को बढ़ाना, समुद्री सुरक्षा करना, समुद्री प्रदूषण को रोकना, भारत के अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों को लागू करना, पारदर्शिता को बढ़ावा देना और व्यापार में आसानी करना है।

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भारत परिवहन क्रांति के कगार पर है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक विकास को चलाने की कुंजी के रूप में निर्बाध कनेक्टिविटी की कल्पना की है। 2024 सार्वजनिक परिवहन सुधारों के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष है, जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना और रोजगार पैदा करना है।

रेल (संशोधन) विधेयक, 2024 : भारतीय रेलवे ने अपने ब्रॉड गेज नेटवर्क का 97 प्रतिशत विद्युतीकरण हासिल कर लिया है, जो 2024-25 तक पूर्ण विद्युतीकरण की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत का पहला ऊर्ध्वाधर लिफ्ट समुद्री पुल, न्यू पंबन ब्रिज अब 105 साल पुरानी संरचना की जगह पूरा हो गया है। इसके अलावा 102 वंदे भारत ट्रेन सेवाओं के परिचालन (सितंबर 2024 तक) के साथ, रेलवे ने यात्री अनुभव को फिर से परिभाषित करना जारी रखा है। यह विधेयक परिचालन दक्षता में सुधार और रेलवे जोन को अधिक स्वायत्तता देने के लिए पेश किया गया था।

इस विधेयक की विशेषताएं इस प्रकार हैं :

– रेलवे क्षेत्रों को अधिक स्वायत्तता प्रदान करता है, जिससे उन्हें बजट, बुनियादी ढांचे और भर्ती का प्रबंधन स्वतंत्र रूप से करने की अनुमति मिलती है।

– 1905 के भारतीय रेलवे बोर्ड अधिनियम के प्रावधानों को रेलवे अधिनियम 1989 में विलय करके, भारतीय रेलवे को नियंत्रित करने वाले कानूनी ढांचे को सरल बनाता है।

– सुपरफास्ट ट्रेनों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के त्वरित विकास के लिए प्रावधान है।

– परिवर्तनों का उद्देश्य रेलवे बोर्ड के गठन और संरचना को सुव्यवस्थित करना है, जिससे रेलवे संचालन की समग्र दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।

जम्मू और कश्मीर स्थानीय निकाय कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 : पुराने कानून के निरस्त होने से जम्मू-कश्मीर भारत के अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बराबर आ गया। केंद्र सरकार के पास अब विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों को सीधे लागू करने का अधिकार था। अंततः न्याय हुआ – जम्मू और कश्मीर में 890 कानून लागू रहे, 205 राज्य कानून निरस्त किये गये, 129 कानूनों में संशोधन किया गया। पहली बार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और पहाड़ी भाषी लोगों को आरक्षण दिया गया। इतना ही नहीं, हाल के चुनावों में सबसे ज्यादा मतदान के साथ, ऐसा लगा कि घाटी में लोकतंत्र और स्वच्छंदता वापस आ गए हैं। जम्मू और कश्मीर स्थानीय निकाय कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 स्थानीय निकायों में आरक्षण को और बढ़ावा देता है।

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– जम्मू और कश्मीर स्थानीय निकाय कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 पूर्ववर्ती जम्मू और कश्मीर राज्य में लागू तीन कानूनों: जम्मू और कश्मीर पंचायती राज अधिनियम, 1989, जम्मू और कश्मीर नगरपालिका अधिनियम, 2000 और जम्मू और कश्मीर नगर निगम अधिनियम, 2000 में संशोधन करता है।

– संशोधन यह सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं कि स्थानीय निकाय कानून संविधान के अनुच्छेद 243डी और 243टी के अनुरूप हों।

– विधेयक ने पंचायतों, नगर पालिकाओं और नगर निगमों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण बढ़ा दिया। इसके अलावा, 33% महिला आरक्षण लागू किया गया।

बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक, 2024:

साल 2024 में भारत की बैंकिंग प्रणाली ने उल्लेखनीय लचीलापन और ताकत का प्रदर्शन किया है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के लिए सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात मार्च 2018 में 14.58 प्रतिशत से गिरकर सितंबर 2024 में 3.12 प्रतिशत हो गया है। साथ ही वित्त वर्ष 2023-24 में पीएसबी ने अपना अब तक का सर्वाधिक कुल शुद्ध लाभ 1.41 लाख करोड़ रुपये हासिल किया। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास ने ग्लोबल फाइनेंस के सेंट्रल बैंकर रिपोर्ट कार्ड 2024 द्वारा लगातार दूसरे वर्ष ‘ए प्लस’ रेटिंग से सम्मानित किया। बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक 2024 का उद्देश्य ग्राहक सुविधा में सुधार करना और निवेशक सुरक्षा को मजबूत करना है।

इस विधेयक की विशेषताएं इस प्रकार हैं :

– अधिनियम की उल्लेखनीय विशेषताओं में से एक खाताधारकों को अपने बैंक खातों या सावधि जमा के लिए चार व्यक्तियों को नामित करने की अनुमति देना है।

– विधेयक में दावा न किए गए लाभांश, शेयर और ब्याज को निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण कोष (आईईपीएफ) में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है, जिससे व्यक्ति बाद में इन राशियों का दावा कर सकें।

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– संशोधन विशेष रूप से सहकारी बैंकों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जो भारत के बैंकिंग परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

देश में आम चुनाव, सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने का प्रावधान लाने के लिए संविधान (129वां) संशोधन विधेयक और संघ राज्य क्षेत्र कानून (संशोधन) विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत किए गए है। विधेयक का उद्देश्य एक नया अनुच्छेद 82ए (लोकसभा और सभी विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव) जोड़ना तथा संसद और राज्य विधानसभाओं के सदनों की अवधि के संबंध में अनुच्छेद 83, 172 और 327 में संशोधन करना है।

इस विधेयक की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं :

– अधिनियमन के पश्चात, राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचना जारी करके “नियत तिथि” को आम चुनाव के पश्चात लोक सभा की पहली बैठक के रूप में निर्धारित किया जाएगा।

– लोकसभा का कार्यकाल नियत तिथि से पांच वर्ष का होगा। इस तिथि के पश्चात तथा लोक सभा के पूर्ण कार्यकाल की समाप्ति से पूर्व गठित सभी विधानसभाओं का कार्यकाल लोकसभा के पूर्ण कार्यकाल की समाप्ति के साथ ही पूरा हो जाएगा।

– लोकसभा तथा सभी राज्य विधानसभाओं के लिए भावी आम चुनाव एक साथ आयोजित किए जाएंगे।

– यदि लोकसभा या विधानसभा समय से पूर्व भंग हो जाती है, तो उसके पश्चात होने वाला चुनाव शेष अवधि के लिए होगा।

मुख्य लाभ:

– विकासात्मक गतिविधियों पर प्रयासों को पुनः केन्द्रित करके शासन में स्थिरता को बढ़ावा देता है।

– आदर्श आचार संहिता के कारण होने वाले व्यवधान को कम करके नीतिगत पक्षाघात को रोकता है।

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– बार-बार चुनाव-संबंधी कार्मिकों की तैनाती की आवश्यकता को कम करके संसाधनों के दुरुपयोग को कम करता है।

– स्थानीय स्तर पर ध्यान केंद्रित करने और क्षेत्रीय मुद्दों को उजागर करने की अनुमति देकर क्षेत्रीय दलों की प्रासंगिकता को बनाए रखता है।

– विविध नेताओं और समावेशिता के लिए अधिक जगह बनाकर राजनीतिक अवसरों को बढ़ाता है।

– राजनीतिक दलों को चुनाव प्रचार के बजाय मतदाताओं की जरूरतों को पूरा करने की अनुमति देकर शासन पर ध्यान केंद्रित करता है।

– कई चुनाव चक्रों से जुड़ी लागतों में कटौती करके वित्तीय बोझ को कम करता है।

उल्लेखनीय है कि लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव 1951-52, 1957, 1962 और 1967 में आयोजित किए गए। हालांकि, 1968 और 1969 में कुछ विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने के कारण यह चक्र बाधित हो गया। विधि आयोग की “चुनावी कानूनों में सुधार” पर 170वीं रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि एक साथ चुनाव सामान्य प्रक्रिया होनी चाहिए, राज्य विधानसभाओं के लिए अलग-अलग चुनाव अपवाद होंगे। लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के लिए चुनाव आदर्श रूप से हर पांच साल में एक बार होने चाहिए। कार्मिक, लोक शिकायत और विधि एवं न्याय पर विभाग से संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 79वीं रिपोर्ट में एक साथ चुनाव कराने की व्यवहार्यता की जांच की। इसने चुनावी प्रक्रियाओं की आवृत्ति को कम करने के लिए वैकल्पिक, व्यावहारिक तरीकों की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस मुद्दे पर विचार के लिए 2 सितंबर 2023 को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया। समिति ने 14 मार्च 2024 को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की, जिन्हें सरकार ने स्वीकार कर लिया है।

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–आईएएनएस

एकेजे/एबीएम

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