मुंबई भगदड़ रेलवे के पतन की याद दिलाती है : संदीप दीक्षित

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुंबई रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ को उजागर करते हुए कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने रविवार को रेल मंत्रालय पर कुप्रबंधन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रेलवे में न केवल पटरियों पर बल्कि रेलवे स्टेशनों पर भी त्रासदियों में वृद्धि हुई है।

दीक्षित ने आईएएनएस से कहा, “पिछले कुछ दिनों से हम देख रहे हैं कि रेलवे प्रबंधन चरमरा रहा है और यह पटरियों पर दुर्घटनाओं, प्लेटफार्मों पर भीड़ के खराब प्रबंधन या प्लेटफॉर्मों पर ट्रेनों के एक साथ आने से जाहिर होता है।”

गिरते मानकों की अनदेखी के लिए सरकार, विशेष रूप से रेल मंत्रालय की आलोचना करते हुए दीक्षित ने कहा, “सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि पिछले सात-आठ साल में हम बड़ी दुर्घटनाएं देख रहे हैं।”

कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार को नकारने की बजाय अपनी खामियों को स्वीकार करने के बाद सुधारात्मक उपाय करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

ट्रेनों के समय पर न पहुंचने को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए दीक्षित ने कहा, “वंदे भारत को छोड़कर कोई भी ट्रेन समय पर नहीं चल रही है। मैं ट्रेनों में खूब यात्रा करता हूं और मेरा मानना ​​है कि पिछले 8-10 सालों में एक अच्छी रेलवे व्यवस्था अव्यवस्थित हो गई है।”

बता दें कि रविवार को मुंबई के बांद्रा रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मचने से कम से कम नौ लोग घायल हो गए, जब यात्री उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाली ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहे थे।

इस मामले पर बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने कहा कि दिवाली से पहले बहुत अधिक भीड़ के कारण भगदड़ मची। बीएमसी ने कहा कि प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर, जहां बांद्रा टर्मिनस स्टेशन पर ट्रेन नंबर 22921 (बांद्रा-गोरखपुर एक्सप्रेस) के लिए भीड़ जमा हुई थी, भगदड़ में कुछ यात्री घायल हो गए। कुछ अधिकारियों ने दावा किया कि ट्रेन के समय में बदलाव के कारण ऐसा हुआ।

ट्रंप के शपथ ग्रहण में भाग लेने पहुंचे विदेश मंत्री जयशंकर ने जापानी समकक्ष से कई मुद्दों पर की बात

हिंदू मतदाताओं को एकजुट करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘बंटेंगे-कटेंगे’ नारे पर प्रतिक्रिया देते हुए दीक्षित ने कहा कि उन्हें एकता की बात नहीं करनी चाहिए क्योंकि वे हिंदुओं और मुसलमानों को बांटने में सबसे आगे रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने हमेशा विभाजन की राजनीति की है। वे लोगों को जाति और भाषा के आधार पर बांटते हैं और गैर-हिंदी भाषियों की देशभक्ति पर सवाल उठाते हैं।”

–आईएएनएस

आरके/एकेजे

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *