प्रदूषण नियंत्रण समिति-वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने निरीक्षण अभियान चलाया।

मीडिया हाउस न्यूज न्यूज नई दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने 24.12.2025 को एक निरीक्षण अभियान चलाया। यह निरीक्षण 12.12.2025 को किए गए निरीक्षणों के बाद संबंधित सड़क-रखरखाव एजेंसियों द्वारा अपनाए गए सुधारात्मक उपायों के अनुपालन और उनकी प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए किया गया। यह कार्रवाई वैधानिक ढांचे तथा वर्तमान में लागू ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान जीआरएपी) के प्रावधानों के तहत आयोग की सतत निगरानी और निरंतर प्रवर्तन प्रयासों का हिस्सा थी।

इस निरीक्षण अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर दिखाई देने वाली धूल के जमाव का आकलन करना, मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों (एमआरएसएम) की जमीनी स्तर पर हो रही कार्यवाही की समीक्षा करना, साथ ही नगर ठोस अपशिष्ट (एमएसडब्ल्यू) और निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) कचरे के जमाव तथा खुले में कचरा जलाने की घटनाओं की पहचान करना था।

आयोग के निर्देशों के तहत, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा बनाए गए 106 सड़क खंडों के निरीक्षण के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की कुल 15 टीमों तथा दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अधिकार क्षेत्र में आने वाले चयनित 27 सड़क खंडों के पुनः निरीक्षण के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की 02 टीमों को तैनात किया गया। निरीक्षण के दौरान जियो-टैग्ड और समय-चिह्नित फोटोग्राफिक दस्तावेज़ीकरण किया गया, जिसे समेकित निरीक्षण रिपोर्ट के हिस्से के रूप में आयोग को प्रस्तुत किया गया।

12.12.2025 को किए गए निरीक्षण के दौरान जिन 27 सड़क खंडों (डीडीए द्वारा अनुरक्षित) में अत्यधिक दृश्य धूल पाई गई थी, उनके 24.12.2025 को पुनः निरीक्षण के दौरान यह देखा गया कि अब इनमें से कोई भी यानी 0 स्ट्रेच (खंड) हाई डस्ट कैटेगरी में नहीं आया। इनमें से 07 सड़क खंडों में मध्यम स्तर की धूल, 19 में कम धूल स्तर दर्ज किया गया, जबकि 01 सड़क खंड पर कोई दृश्य धूल नहीं पाई गई। यह स्थिति इन सड़क खंडों के रख-रखाव में स्पष्ट सुधार को दर्शाती है और इससे यह भी साबित होता है कि पहले सीएक्यूएम द्वारा किए गए निरीक्षण के बाद संबंधित एजेंसी द्वारा अपनाए गए सुधारात्मक उपाय प्रभावी रहे हैं।

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साथ ही, पीडब्ल्यू द्वारा अनुरक्षित 106 सड़क खंडों के निरीक्षण में यह पाया गया कि 09 सड़क खंडों में डस्ट यानि धूल का स्तर अत्यधिक, 16 में मध्यम, 37 में कम, जबकि 44 सड़क खंडों में कोई दिखाई देने वाली धूल नहीं पाई गई। जिन कुछ सड़क खंडों में धूल की तीव्रता अधिक दर्ज की गई, वहाँ नगर ठोस कचरे (एमएसडब्ल्यू) और निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) कचरे का जमाव, साथ ही खुले में कचरा जलाने की घटनाएँ भी सामने आईं। यह संबंधित एजेंसी द्वारा जमीनी स्तर पर प्रवर्तन और रखरखाव को और मज़बूत करने की आवश्यकता को दर्शाता है।

आयोग ने यह पाया कि डीडीए द्वारा अनुरक्षित सड़क खंडों के पुनः निरीक्षण के परिणाम पहले जारी किए गए निर्देशों के प्रति सुधार और तत्परता को दर्शाते हैं। वहीं, पीडब्ल्यूडी द्वारा अनुरक्षित सड़क खंडों के निरीक्षण से यह स्पष्ट हुआ कि सड़क रखरखाव और धूल नियंत्रण में अब भी खामियाँ बनी हुई हैं, जिनके लिए तत्काल और सतत सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है। आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि सभी सड़क खंडों पर नियमित रूप से मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, एकत्रित धूल और कचरे का समय पर उठान एवं निपटान, सड़क सतह और सेंट्रल वर्ज का समुचित रखरखाव, पानी के छिड़काव और धूल-नियंत्रण उपायों का प्रभावी उपयोग, तथा खुले में कचरा जलाने की घटनाओं की सख्त रोकथाम सुनिश्चित की जाए।

आयोग ने दोहराया कि ‘ऑपरेशन क्लीन एयर’ के तहत लक्षित निरीक्षण और पुनः निरीक्षण अभियान आगे भी सक्रिय रूप से जारी रहेंगे, ताकि धूल नियंत्रण और खुले में जलाने की रोकथाम से संबंधित उसके वैधानिक निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके। इसका उद्देश्य दिल्ली भर की सड़क सतहों को स्वच्छ और धूल-मुक्त बनाए रखना है।

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