कालाबाजारी, जमाखोरी करने वाले के विरूद्ध की जाये कड़ी कार्यवाही-जिलाधिकारी

मीडिया हाउस न्यूज एजेन्सी सोनभद्र-जिलाधिकारी बी0एन0 सिंह ने अवगत कराया है कि  समस्त थोक उर्वरक विक्रेता, समस्त फुटकर उर्वरक विक्रेता, समस्त बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति (बी.पैक्स), वर्तमान मे रबी की फसलो की बुवाई का कार्य तेजी से किया जा रहा है,जिसके कारण उर्वरको की मॉग मे वृद्वि हुई है। विभिन्न माध्यमों से संज्ञान में आ रहा है कि समितियो पर कृषको की भीड बढ रही है एवं उन्हे अपनी कृषित भूमि/जोत के अनुसार निर्धारित मात्रा मे उर्वरको की उपलब्धता नही करायी जा रही र्है इस सम्बन्ध मे कृषको समय से समुचित मात्रा मे गुणवत्तायुक्त उर्वरक निर्धारित दर पर उपलब्ध हो, इस हेतु जनपद स्तर पर शासन द्वारा जारी परिपत्र में जनपद स्तर पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाये,

उन्होंने बताया कि जनपद मे कुछ सचिवो के पास 02 अथवा उससे अधिक सहकारी समितियो का प्रभार है, जिसके कारण किसी विक्री केन्द्र के खुलने की स्थिति स्पष्ट न होने के कारण किसानो मे असन्तोष की स्थिति रहती है। इसके दृष्टिगत सम्बन्धित सचिव किस दिन किस विक्री केन्द्र पर उपलब्ध रहेगे, कि सूचना उर्वरक विक्री केन्द्रो के नोटिस बोर्ड पर अंकन किया जाय साथ-साथ इसकी सूचना किसानो के मध्य प्रसारित कराये, ताकि किसानो को उर्वरक प्राप्त करने मे किसी प्रकार की समस्या न हो तथा समयान्तर्गत उर्वरक उपलब्ध हो सके। यह अनुभव किया गया है कि समुचित जानकारी के अभाव एवं अगामी समय के आशा की प्रत्याशित मे प्रायः कृषको द्वारा फसल मे उर्वरक प्रयोग करने की मात्रा अधिकाधिक प्राप्त करने की प्रवृत्ति रहती है। समय-समय पर कृषि विभाग द्वारा उर्वरको फसल संस्तुति के अनुसार सही उपयोग के बारे मे निर्देश जारी किये जाते रहे है, तथा कृषि गोष्ठियो मे भी इसकी जानकरी उपलब्ध करायी जाती है। उर्वरको का आवश्यकता से अधिक उपयोग न हो अथवा पूर्व से ही अग्रिम भण्डार न किये जाए, इस हेतु यह आवश्यक है कि सहकारी समितियों में प्राथमिकता पर समिति के क्षेत्रान्तर्गत आने वाले सदस्यो को ही उनकी कृषि भूमि/जोत के अनुसार उर्वरको की उपलब्धता सुनिश्चित कि जाये, साथ-साथ उर्वरक वितरण के समय कृषको से खतौनी/जोत बही की छाया प्रति आवश्य लिया जाये।

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उन्होंने बताया कि आगामी रबी मौसम मे आलू, सरसो,गेहू,मक्का,दलहनी एवं तिलहनी इत्यादि फसलों की बुवाई प्रारम्भ की जायेगी, एैसी स्थिति मे यह आवश्यक होगा कि उर्वरको का प्रयोग संतुलित मात्रा मे हो साथ-साथ इस बात का भी ध्यान रखा जाये कि असामाजिक तत्वो द्वारा अधिक मात्रा मे उर्वरक क्रय कर गैर कृषि गतिविधियो मे जैसे यूरिया डार्वजन, कालाबाजारी, जमाखोरी इत्यादि न हो सकंे। इसके दृष्टिगत एक कृषक को उसके कृषि भूमि प्रति हेक्टेयर आधार पर अधिकतम डी0ए0पी0 05 बैग एवं यूरिया 07 बैग की मात्रा ही दी जाए, इस मात्रा से अधिक भण्डारण करने पर उसे उर्वरक (अकार्बनिक,कार्बनिक या मिश्रित) (नियंत्रण) आदेश,1985 का उल्लंघन माना जायेगा एवं उसके विरूद्व बैधानिक कार्यवाही की जायेगी। समिति स्तर पर समिति के सदस्यो को ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाए, तथा कृषको की कृषित भूमि से सम्बन्धित समस्त व्योरा/विवरण उर्वरक विक्रय रजिस्टर मे अनिवार्य रूप से अंकन किया जाए। अन्य कृषको को जो उस समिति के सदस्य नही है, उनको फार्मर आई0डी0 (थ्ंतउमत त्महपेजतलध्।हतपेजंबा) के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जा सकता है, जो कृषक समिति के सदस्य न हो और फार्मर आई0डी0 भी न रखते हो उन्हे निजी क्षेत्र के उर्वरक विक्री केन्द्रो से उर्वरको का क्रय करने हेतु कहा जाए। जिला कृषि अधिकारी, ए0आर0 को-आपरेटिव उपरोक्त निर्देशों का अनुपालन कडाई से सुनिश्चित करायेंगें। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाये जाने पर सम्बन्धित के विरूद्ध उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक या मिश्रित नियंत्रण आदेश ,1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अन्तर्गत बैधानिक कार्यवाही की जायेगी।

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