बच्चों को समझने के लिए अभिभावकों को बनना पड़ेगा दोस्त-साधना सिंह

Media House सोनभद्र-सोनभद्र विकास समिति एवं चाइल्ड राइट्स एंड यू के सहयोग से बच्चों के साथ बाल दिवस अन्तर्गत संचालित कार्यक्रम थीम सर्कल समय/ सुनने का समय – बच्चे समूह बैठक में समुदाय के सदस्यों के साथ अपने विचार/चिंताएं व्यक्त करेंगे के अन्तर्गत जनपद सोनभद्र के ब्लाक रावर्टसगंज के ग्राम बढौना, अमौली में गतिविधि का आयोजन किया गया।
संस्था काउन्सलर साधना सिंह द्वारा बताया गया की एक बच्चे की सफलता में अभिभावक सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ होते हैं। उनकी परवरिश ही व्यक्ति को जीवन जीने का तरीका सिखाती है लेकिन आजकल के बदलते दौर में अभिभावकों के सामने बच्चों को समझने की चुनौतियां बढ़ गई हैं। इस वजह से अभिभावकों ने परवरिश का तरीका भी बदल दिया है। वह बच्चों के दोस्त बनकर उनके साथ चलने का प्रयास कर रहे हैं।बच्चों पर सबसे बेहतर बनने की इच्छा से बढ़ता दबाव नए दौर के अभिभावकों की सबसे बड़ी समस्या है। शिक्षा, खेल यहां तक की रहने के तौर-तरीकों में भी बच्चों में एक होड़ लगी है। बच्चे इतनी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं कि उनकी गति को मिला पाना माता-पिता के लिए एक चुनौती है। मोबाइल फोन से मिली आजादी से बच्चे जितने एडवांस हो रहे हैं, उतना ही सुरक्षा के मद्देनजर अभिभावकों की चिंताएं बढ़ रही हैं। मगर इन्हीं समस्याओं के बीच मॉडर्न पेरेंटिंग के जरिये अभिभावक इन समस्याओं का भी हल ढूंढ़ लिया है। उनके अनुसार आधुनिकता की मदद से वह बच्चों के महत्वाकांक्षाओं को समझ पा रहे है। बच्चों को सही-गलत का फर्क सीखा पा रहे हैं इन्हीं बातो को हम सबको समझने की आवश्यकता है साथ ही बदलते मौसम के बीमारियों के बारे मे बताया गया की कैसे हम बिमारियो से सुरक्षित रह सकते है। सामाजिक कार्यकर्त्ती रीना शर्मा द्वारा जीवन कौशल के बारे मे विस्तृत जानकारी दिया गया। मौकेपर अभियान में में संस्था सचिव राजेश चौबे, काउन्सलर साधना सिंह, सामाजिक कार्यकर्त्ती सुनीता,रीना शर्मा,रेखा,रीमा, प्रिति,एकाउंटेंट, कोर्डिनेटर सहित समुदाय के बच्चें और अभिभावक मौजूद रहे ।










