सरस्वती विद्या मंदिर में मनाई गई तुलसीदास जयंती

मीडिया हाउस न्यूज एजेंन्सी 23ता०बोकारो। सरस्वती विद्या मंदिर जनवृत 3 C के विशाल सभागार में 14वीं सदी के महान भक्त कवि जिन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी राम भक्ति की गंगा जमुना बहा दी थी। ऐसे तुलसीदास जी के पावन जयंती के शुभ अवसर पर प्राचार्य रण सुमन सिंह ने दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया जिसमें सभी आचार्य बंधु भगिनी उपस्थित रहे एवं हिंदी की वरिष्ठ आचार्या श्रीमती अनीता कुमारी ने कार्यक्रम का योजना रचना तय किया। इस कार्यक्रम में विभिन्न भैया बहनों ने प्रतिभागी के रूप में तुलसीदास जी के कृतियों को प्रस्तुत किया जिनके नाम निम्नवत हैं। बहन सिद्धि जैन श्री राम स्तुति, बहन सुष्मिता सिंह एवं भैया अंश भाषण, बहन आशिक श्रेया और जानवी मानस पाठ का सस्वर वाचन, बहन सोनल भजन, भैया विश्वनाथ भट्टाचार्य दोहा, शिशु वाटिका के भैया बहन भजन, भैया आलोक झा एवं प्रज्ञा झा भजन कार्यक्रम की अगली कड़ी में मुख्य वक्ता वरिष्ठ आचार्य श्रीमती इंदु पांडे ने कहा कि रामचरित मानस के रचयिता और महर्षि बाल्मिकि के अवतार कहे जाने वाले तुसलीदासजी का जन्म दिन हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनायी जयंती मनाई जाती है। बताया जाता है कि जन्म लेते ही तुलसीदासजी के मुख से ‘राम’ नाम का शब्द निकला था इसलिए उनका नाम रामबोला रख दिया गया था। तथ्यों के अनुसार, तुलसीदासजी सरयूपारी ब्राह्मण थे और गोसाई समाज से उनका संबंध था। ‘होइहि सोइ जे राम रचि राखा को करि तर्क बढ़ावै साखा ॥’ भगवान राम के अनन्य भक्त तुलसीदासजी ने अपना पूरा जीवन भक्ति साधना में व्यतीत कर दिया था। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य श्री रण सुमन सिंह ने हिंदु धर्म के संरक्षण में तुलसीदास के योगदानों को अत्यंत मजबूती से रखा।
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