पंजाब में बेमौसम बारिश ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें, मंडियों में जमा 15 लाख टन धान की खरीद और उठान प्रभावित

चंडीगढ़
पंजाब में बारिश ने धान की फसल पर दोहरी मार की है। खेतों में खड़ी फसल तेज हवा और पानी से प्रभावित हुई है तो मंडियों में बिकने के इंतजार में पड़ा धान भीगकर खराब होने के खतरे में है। कहीं मंडियों में तीन फीट तक पानी भर गया तो कहीं खुले में रखी धान की बोरियां पानी में डूब गईं।
खेतों में जलभराव के कारण कंबाइन से कटाई नहीं हो पा रही। दूसरी ओर, उठान की धीमी रफ्तार ने किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश की मंडियों में करीब 15 लाख मीट्रिक टन धान उठान के इंतजार में बताया जा रहा है। किसानों ने प्रभावित क्षेत्रों में गिरदावरी करवाकर मुआवजा देने की मांग की है।
मंडियों में भीगा धान, उठान की रफ्तार धीमी
बारिश के बीच मंडियों में धान की आवक जारी है, लेकिन उठान उस गति से नहीं हो रहा, जितनी जरूरत है। खुले में रखी बोरियों को तिरपाल से ढकने के बावजूद कई जगह पानी धान तक पहुंच गया। मंडियों में पर्याप्त ढके हुए स्थान और जलनिकासी की कमी ने परेशानी बढ़ा दी है। धान में नमी बढ़ने से खरीद के निर्धारित 17 प्रतिशत मानक को लेकर भी किसानों की चिंता बढ़ गई है।
एक दिन में मंडियों में तीन लाख मीट्रिक टन से अधिक धान पहुंचा, जबकि उठान दो लाख मीट्रिक टन से कम रहा। इससे मंडियों में धान का ढेर बढ़ता जा रहा है। राज्य सरकार केंद्र से उठान तेज करने की मांग कर रही है। पिछले साल का करीब 10 लाख मीट्रिक टन धान और गेहूं भी उठान के इंतजार में बताया जा रहा है। ऐसे में नई फसल के लिए मंडियों में जगह की कमी का संकट गहराने लगा है।










